इस बार एकजुट विपक्ष घेरेगा सरकार को

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बैठक में 27 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लिया भाग

नई दिल्ली
संसद का संयुक्त शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इस बार एनडीए का घटक रही शिवसेना के विपक्ष में बैठने से सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है। वहीं सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों का भी प्रभाव संसद में चर्चा के दौरान देखा जा सकता हे। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। इस दौरान पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक पार्टियों से यह भी कहा कि संसद में बेरोजगारी पर भी चर्चा होनी चाहिए। वहीं, सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और श्रीनगर से सांसद फारूक अब्दुल्ला की हिरासत के मसले को पुरजोर तरीके से उठाया और उन्हें संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति देने की मांग की। इस बैठक में 27 राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने मांग की कि सत्र के दौरान आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और कृषि संकट के मुद्दों पर चर्चा 
होनी चाहिए।

फारूक अब्दुल्ला के लिए उठी आवाज
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने कहा कि यह सरकार की संसदीय बाध्यता है कि सत्र में फारूक अब्दुल्ला की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ''एक सांसद को अवैध तरीके से हिरासत में कैसे रखा जा सकता है? उन्हें संसदीय प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। दरअसल, फारूक और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के फैसले बाद से ही हिरासत में हैं। उन्हें नागरिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कानून फारूक के पिता शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने 1978 में अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में बनाया था।

बैठक में शीतकालीन सत्र पर हुई चर्चा
केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई इस बैठक का संचालन संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन के ठीक ढंग से चलने के लिए सहयोग की अपील की थी। बैठक के बाद बिरला ने कहा कि सदन में विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग अलग मुद्दों का उल्लेख किया, जिनपर वे 18 नवंबर से 13 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान सार्थक चर्चा करना चाहते हैं।

अपनों ने भी दिखाए तेवर
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के साथ ही अपनों ने भी मोदी सरकार को तेवर दिखाए। एनडीए के सहयोगी अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने अब तक ओबीसी मंत्रालय गठित नहीं किए जाने पर निराशा जताई और राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी में शामिल जातियों की अलग से गिनती कराने की मांग की। तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन ने सरकार पर विपक्ष दलों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। बैठक में अनुप्रिया ने कहा कि सरकार के दूसरे कार्यकाल में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है। मीडिया में 2021 में पिछड़ी जातियों की अलग से जनगणना नहीं कराने की चर्चा है, जबकि सरकार ने इसका वादा किया था। उन्होंने आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के प्रावधानों का पालन न किये जाने पर भी नाराजगी जताई और केंद्र से राज्य सरकारों से संवाद करने की मांग की। 

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