इतने ऊपर चले गए कि जमीन पर रहने वाले तुच्छ दिखते हैं

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नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का लोकसभा में आज जवाब दिया। मोदी ने कहा, चुनाव में कौन जीता या कौन हारा, ये मेरी सोच का दायरा नहीं हो सकता। जनता ने पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद हमें जनादेश दिया। मोदी ने कहा, यहां (सदन में) बताया गया कि हमारी ऊंचाई को कोई तौल नहीं सकता। हम ऐसी गलती नहीं करते। हम किसी की लकीर छोटी करने में यकीन नहीं करते, हम अपनी लकीर लंबी करने में जिंदगी खपा देते हैं। आपकी ऊंचाई आपको मुबारक हो, आप इतने ऊंचे चले गए कि आपको जमीन दिखनी बंद हो गई। जड़ों से उखड़ गए, जमीन पर जो हैं, वे आपको तुच्छ दिखते हैं। आपका और ऊंचा होना मेरे लिए अत्यंत संतोष का विषय है। मेरी कामना है कि आप और ऊंचे उठे। ऊंचाई पर आपसे कोई बहस नहीं है। हमारा सपना ऊंचा होने का नहीं, जड़ों से जुडऩे का है, हमारा रास्ता जड़ों से ताकत पाकर देश को मजबूती देना है। हम इस प्रतिस्पर्धा में आपको शुभकामनाएं देते हैं कि आप और ऊंचे उठते जाएं।

कई दशकों के बाद देश ने मजबूत जनादेश दिया
प्रधानमंत्री ने कहा, कई दशकों के बाद देश ने एक मजबूत जनादेश दिया है। एक सरकार को दोबारा फिर से लाए हैं। पहले से अधिक शक्ति देकर लाए हैं। भारत का लोकतंत्र हर भारतीय के लिए गौरव का विषय है। हमारा मतदाता इतना जागरूक है कि वह अपने से ज्यादा अपने देश को प्यार करता है। अपने से ज्यादा देश के लिए निर्णय करता है। यह चुनाव में साफ नजर आया है। मुझे इस बात का संतोष है कि 2014 में जब हम पूरी तरह नए थे, तब देश के लिए भी अपरिचित थे। लेकिन, उन स्थितियों से बाहर निकलने के लिए देश ने एक प्रयोग के रूप में कि चलो भाई जो भी है, इनसे तो बचेंगे। फिर हमें मौका मिला, लेकिन 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद, हर तराजू पर तौले जाने के बाद, पल-पल को जनता ने बारीकी से देखा, परखा, जांचा और समझा। इसके बाद हमें दोबारा बैठाया। ये लोकतंत्र की बहुत बड़ी ताकत है कि चाहे जीतने वाला हो, या हारने वाला, मैदान में था, या मैदान के बाहर था। सरकार के 5 साल के कठोर परिश्रम, समर्पण, जनता के लिए नीतियों को लागू करने का सफल प्रयास जो था.. उसे लोगों ने अपना समर्थन दिया और हमें दोबारा बैठाया है।

राष्ट्रपतिजी का भाषण आम आदमी की आशाओं की प्रतिध्वनि
मोदी ने कहा, राष्ट्रपतिजी ने अपने भाषण में यह बताया कि हम भारत को कहां और कैसे ले जाना चाहते हैं। भारत के सामान्य लोगों की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्राथमिकता क्या हो, इसका एक खाका खींचने का प्रयास किया। राष्ट्रपतिजी का भाषण आम आदमी की आशाओं की प्रतिध्वनि है। यह भाषण देश के कोटि-कोटि लोगों का धन्यवाद भी है। सबको मिल-जुलकर आगे बढऩा समय की मांग है और देश की अपेक्षा है। आज के वैश्विक वातावरण में यह अवसर भारत को खोना नहीं चाहिए। मोदी ने कहा, इस चर्चा में सांसदों ने हिस्सा लिया। जो पहली बार आए हैं, उन्होंने अच्छे ढंग से अपनी बात को रखने की कोशिश की, चर्चा को सार्थक बनाने की कोशिश की। जो अनुभवी हैं, उन्होंने भी अपने-अपने तरीके से चर्चा को आगे बढ़ाया। ये बात सही है कि हम मनुष्य हैं। जो मन पर छाप रहती है, उसे निकालना कठिन रहता है। उसके कारण चुनावी भाषणों का भी थोड़ा असर नजर आता था। वही बातें यहां सुनने को मिल रही थीं। आप इस पद पर नए हैं और जब आप नए होते हैं तो कुछ लोगों का मन भी करता है कि आपको शुरू में ही परेशानी में डाल दें। सब परिस्थितियों के बावजूद आपने बहुत बढिय़ा ढंग से इन सारी चीजों को चलाया, इसके लिए भी आपको बधाई। सदन को भी नए स्पीकर महोदय को सहयोग देने के लिए अभार व्यक्त करता हूं।

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