• और जा थाने....! ..

    जिसे जो विकल्प पसंद आए, अपना सकता है। दरवाजे खुले हैं। ये नहीं जंचे तो वो, वो नहीं जंचे तो ये। और जा थाने। थाने वाले .....

  • सियासी टोटके ..

    समय ने सिखाया अथवा किसी और ने, पर लगने लगा हैं कि कार्यशाला जारी हैं। एक समय वो भी था तब उन्हें कोई भी  याद नहीं आता .....

  • छोले-भटूरे वाला उपवास ..

    उन्हें क्या पता था कि छोले छील के रख देंगे। उन्हें क्या पता था कि भटूरे भंूड का ठीकरा फोड़ देंगे। भद पिटी सो तो पिट .....

  • सचिन तुस्सी गे्रट हो ..

    सचिन वास्तव में सचिन हैं। सचिन की कथनी और करनी में रत्ती भर भी फरक नहीं। सचिन किरकिट के भगवान की तरह इंसानियत के जा .....

  • बदनुमा बंद ..

    इसे बंद कहा जाए तो लानत है ऐसे बंद पर। इसे विरोध प्रदर्शन कहा तो धिक्कार है ऐसे विरोध प्रदर्शन पर। बंद इससे पहले भी .....

  • गुलाब तो गुलाब ही रहेगा ..

    समझ में नहीं आया कि नाम को घटाने या बढाने से किस को क्या मिलेगा। कुतर देंगे तो किसी को कोई घाटा होने वाला नहीं। इंच- .....

  • विडम्बना ..

    इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि छोटे मियां को उस के बारे में कोई जानकारी नहीं है और बड़े मियां खुदी के बंदों को कोस बैठ .....

  • मटकी में भांग ..

    शुकर है कि साबजी ने एक चावल ही देखा, पूरी देग देखी होती तो सारे चावल कच्चे नजर आते। खालीपीली उन्हीं की बात नहीं। सा .....

  • सियासी नृत्य दिवस ..

    किसी और ने पकड़ा कि नहीं, हम ने तो लपक लिया। देखा भतेरों ने, पर सटीक मुलम्मा चढाने की किसी को नहीं सूझी। किसी के दिमा .....

  • बुआ-बबुआ और बीजेपी ..

    ये पुर भी फुर्र..वो पुर भी फुर्र..। दोनों पुरों ने तोते फुर्र..फुर्र..कर दिए। खुद उन की समझ में नहीं आया कि ये क्या हो ग .....

  • 'हैप्पी वेतन आयोग' ..


    हम तो चाहते हैं कि सब लोग 'हैप्पी' हो। चारों ओर हैप्पीनेस हो। गली-गली में हैप्पी-हैप्पी हो। पर जिस तरह से है .....

  • आओ फिर से दीया जलाए ..

    देखते ही देखते एक साल और गुजर गया। होली मनाई। ईद मनाई। गुरूपरब मनाए। साल के पहले महिने में गणतंत्र दिवस मनाया। अग .....

  • पायलट हठ ..

    कुल जमा कई लोगों की 'वाट' लग गई। किसी का शैड्यूल बिगड़ गया। किसी की अगली हवाई जहाज या रेल छूट गई। किसी की व्यापा .....

  • अब तो चेतो भाई ..

    इतना देखने, भुगतने और सहने के बाद तो उन्हें चेत जाना चाहिए। उन्हें समझ लेना चाहिए कि कुत्ता हर हाल में कुत्ता होता .....

  • परचियों पर लानतांजलि ..

    किसने सोचा था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। किसे पता था कि कृत्यों-करतूतों का ऐसा घिनौना चेहरा सामने आएगा। बाहर लोग .....

  • फैसले में लोचे!  ..

    आदरजोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत। दिल खोल के स्वागत। ऐसा मजबूरी में नहीं, वरन दिल की गहराईयों से किया जा रह .....

  • हम सुधरेंगे! ..

    लगता है कि हम ने ना सुधरने की कसम खा रखी है। नारे लगाने को कहा जाए तो गूंजेगा-'गर्व से कहो-हम नहीं सुधरेंगे।' इस .....

  • करी-नो करी ..

    हम तो समझे थे कि 'नौकरी' का हौव्वा बेरोजगारों के बीच ही खड़ा रहता है, सियासी क्षेत्र में बखेड़ा हुआ तो पता चला क .....

  • 'कारियों' का मौसम ..

    ऐसा मौसम हर साल आता है। कोई जहमत उठाए तो साल में दो-तीन बार आ सकता है। कोई काम करना चाहे तो वर्ष पर्यन्त चल सकता है। .....

  • रावणगिरी  ..

    अच्छा हुआ जो रावण पकड में आज गया। भलमन साहत कि भागा नहीं।  भागता और पकड़ में आ जाता तो वीडियो और धांसू बनता। आगे-आ .....

  • मैं चली... मैं चली.... ..

    चली गई सो तो चली गई पर उन्हें इस तरह नहीं जाना चाहिए। क्यूं गई। इस तरह जाने के पीछे क्या कारण रहे हंै। वो जाने। घर ही .....

  • सुन ले बापू ये पैगाम... ..

    पैगाम देने और भेजने के कई तरीके हैं। परंपरात के साथ-साथ नए और आधुनिक भी। जरूरी नहीं कि लिखा पढ़ी के जरिए ही संदेशा .....

  • मदद पर लूट भारी ..

    इस मुद्दे को लेकर दो पक्ष उभर कर सामने आते हैं।  इस का मतलब यह नहीं कि एक वादी और दूसरा प्रतिवादी। वरन ये कि दो विच .....

  • धोया और निचोया ..

    किरकिरी होना कह दो। हेटी लगना कह दो। एक और लाफा खाना कह दो। धोया-निचोया और सुखोया कह दो। एक बार और मुखोटा उतरना कह द .....

  • राक्षसों से सावधान! ..

    हाल और ऐसे ही चलते रहे तो प्लेट या बोर्ड टंगने की पूरी आशंका। कई लोग इस आशंका को निर्मूल समझते होंगे। मालिक करे वैस .....

  • शरणार्थी या आतंकवादी ..

    हम कैसे हैं इस को प्रमाणित करने के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं। आखी दुनिया में हमारी पैंठ है। दो देशों को .....

  • हवा में सवा अरब ..

    पिछले सालों में किस पे कितना खरच हुआ था, उस की जानकारी मांगी नहीं। उन से पहले के सालों की जानकारी उनके पास शायद होग .....

  • इंतजार है दुम कटने का  ..

    जाहिल ने अपनी जाहिलियत एक बार और बता दी। दुनिया ने उस की नीचता फिर देख ली। सोचा था कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नसीहत .....

  • मरवा दिया कबुड़े ने ..

    किसे पता था कि शांति के दूत कहे जाने वालों के कारण बवाल मच जाएगा। जांच दल ने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाई। नि .....

  • पति बिचारे कहां चले... ..

    फर्ज करो कि नारा लगता तो कैसे लगता। नारे के सुर कैसे होते। नारे के बोल कैसे होते। नारे के शब्द क्या होते। जाहिर है .....

  • ईनाम का स्तर ..

    औरों की तो कह नहीं सकते। आप की आप जानो-उन की वो। हमारे मन में कभी ऐसा खयाल भी नहीं उभरा कि ईनाम का स्तर गिरा दिया जाए .....

  • जीएसटी खुश हुए ..

    नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद देश में क्या हुआ और क्या हो रहा है-सब देख रहे हैं। आगे क्या होगा, किसी को पता नहीं .....

  • मां तूझे सलाम ..

    मां को सलाम। बारंबार सलाम। मां को सेल्यूट। बारंबार सेल्यूट। देश में जितने भी आदरसूचक परंपराएं स्थापित की हुई है .....

  • मांगीलालगिरी ..

    सोने से घड़ाई महंगी पड़ गई। पडी सो तो पड़ी दो और धाराएं और फूट पड़ी। एक-नियम सब के लिए बराबर है और दूसरी चासागिरी से .....

  • अफ प्लस वाह ..

    अफवाहों के कारण बवाल मच जाता है। अफवाहें तनाव पसार देती हैं। अफवाहें बवंडर मचा देती है। अफवाहें किसी को नाहक बदना .....

  • बांडी खोपड़ी वाले ..

    बांडी खोपड़ी वाले
    असल में वो जुमला 'बांडी खोपड़ी' वालों पर लागू होना चाहिए। ऐसे लोगों पर लागू होना चाहिए जो .....

  • पप्पू पास हो गया ..

    खुशी हुई। अच्छा लगा। परीक्षा लेने वाले की सोच सकारात्मक लगी। पप्पू उस परीक्षा में खरा उतरा इस बात की भी खुशी हुई। .....

  • दोनों मिलकर खाएंगे ..

    समझ में नहीं आया कि उस प्रकरण को क्या कहें। कहने को तो कुछ भी कहा जा सकता है। जो जी में आए कह दो, पण कहाई के पांव मजबूत .....

  • खेतों में दारू ..

    जिन का नुकसान हुआ उन के प्रति हमारी सहानुभूति है। हम इतना ही कर सकते हैं। पास-पड़ोस में होते तो रूबरू होकर तसल्ली द .....