• सेर पर सवा सेर ..

    सोचा था कि येड़ों को नए आइडिया के बारे में क्या पता चलेगा। जो कुछ हैं, वो हम हैं। हम से बढ कर कौन। वो जरदा-बिड़ी का फट .....

  • गिरावटखान-गिरेचंद ..

    समझ में नहीं आता कि मानखा और कितना गिरेगा। इतना तो गिर गया कि गिरावट को शरम आने लग गई। फिर भी और गिरने के लिए नित नए .....

  • थोक के भाव "फेल" ..

    उस बात पर खुश होने की बजाय अफसोस जताना चाहिए था, पर हम ने खुशी जताई। खुशी मारे ऐसे इतराए कि इतराते रहे। अफसोस भी जता .....

  • आओ लडें! ..

    आगे बढने से पहले इस बात का खुलासा कर दें कि हम पक्कमपक्के भारतीय और भारतवंशीय हैं इस के बावजूद लडऩे की बात कर रहे ह .....

  • पकड़ाई के बदले पैकेज ..

    हम तो कहें कि सरकारों को ऐसी प्रोत्साहन योजनाएं शुरू कर देनी चाहिए। जिस राज्य सरकार की जैसी श्रद्धा हो। जिस राज्य .....

  • अफवाहों से सावधान ..

    ठीक नहीं है भाई, बिल्कुल ठीक नहीं है। पहले जो कुछ हुआ था, उसे भी उचित नहीं माना गया। इन दिनों जो हो रहा है  वह भी उसी .....

  • हाथी मेरे... ..

    शीर्षक के आगे लगाए डाट्स में कुछ लिख कर खाली जगह भरने को कहा जाए तो सभी का एक ही जवाब होगा। किसी को लगे कि कॉपी की गई .....

  • खटकों की खनक ..

    वो चाहे किसी भी दिशा की ओर मुंह कर के बैठें, हमें तो खटका गहराता नजर आ रहा है। उसकी आहट कब की हो चुकी थी। आगाह भी किया .....

  • पति-पत्नी और कुत्ता ..

    कहां से कहां पहुंच गए यार। अच्छे-भले संबंध के बीच कुत्ता बांध दिया। पति-पत्नी और वो लिखते तो समझ में आ जाता। हम जै .....

  • सनकी का ओम शांति ..

    हमारे यहां से बिलकुल उलटा। भारत, तो भारत। दुनिया के किसी मुल्क में वैसा नहीं हो रहा। होना भी नहीं चाहिए। हंगामा है .....

  • घर वाली-पानी वाली ..

    जंची नहीं भाई..बिल्कुल नहीं जंची..। ये क्या बात हुई कि सात जनम के रिश्ते को कहां से कहां जोड़ दिया। उन के पदचिन्हों प .....

  • भैंस टैक्स ..

    वो लगा के भले ही राजी हो जाएं । जहां तक अपना ख्याल है। नतीजा कुछ नहीं निकलना। सवाल ये कि उनके दिमाग में यह कुबद आई कै .....

  • उकेरीगिरी ..

    इसे खामखा का बखेड़ा कहें तो किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए। हो भी जाए तो हमारी सेहत पे कोई फरक पडऩे वाला नहीं। व .....

  • नेछौ होयो ..

    चलो, अब पूरी शांति हुई। सब को शांति मिली। रोज-रोज के बखेड़े से पीछा छूटा। आगे जो होगा सो होगा थोड़े दिन तो शांति के स .....

  • चोटी खोलते ही ओले पड़े ..

    गजब किया रे बाबा.. गजब किया रे..। कायदा तो यह होता कि धीरे-धीरे पांव पसारे जाते। स्टाइल सीखी जाती। नेटवर्क मजबूत किय .....

  • काले-सफेद चले खाकी की ओर ..

    समझ में नहीं आया। सच्ची मुच्ची में समझ से बाहर। हर ऐंगल से सोचा। हर कोण से समझने की कोशिश की पर पल्ले नहीं पड़ा। उल .....

  • दो और दो=तीन ..

    इसके माने दो और दो तीन होणा तय। एक दुदु-बिद्दु छह भी हो सकता है। हो क्या सकता है, ये भी होगा। हंडरेड परसेंट होगा। माट .....

  • और जा थाने....! ..

    जिसे जो विकल्प पसंद आए, अपना सकता है। दरवाजे खुले हैं। ये नहीं जंचे तो वो, वो नहीं जंचे तो ये। और जा थाने। थाने वाले .....

  • सियासी टोटके ..

    समय ने सिखाया अथवा किसी और ने, पर लगने लगा हैं कि कार्यशाला जारी हैं। एक समय वो भी था तब उन्हें कोई भी  याद नहीं आता .....

  • छोले-भटूरे वाला उपवास ..

    उन्हें क्या पता था कि छोले छील के रख देंगे। उन्हें क्या पता था कि भटूरे भंूड का ठीकरा फोड़ देंगे। भद पिटी सो तो पिट .....

  • सचिन तुस्सी गे्रट हो ..

    सचिन वास्तव में सचिन हैं। सचिन की कथनी और करनी में रत्ती भर भी फरक नहीं। सचिन किरकिट के भगवान की तरह इंसानियत के जा .....

  • बदनुमा बंद ..

    इसे बंद कहा जाए तो लानत है ऐसे बंद पर। इसे विरोध प्रदर्शन कहा तो धिक्कार है ऐसे विरोध प्रदर्शन पर। बंद इससे पहले भी .....

  • गुलाब तो गुलाब ही रहेगा ..

    समझ में नहीं आया कि नाम को घटाने या बढाने से किस को क्या मिलेगा। कुतर देंगे तो किसी को कोई घाटा होने वाला नहीं। इंच- .....

  • विडम्बना ..

    इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि छोटे मियां को उस के बारे में कोई जानकारी नहीं है और बड़े मियां खुदी के बंदों को कोस बैठ .....

  • मटकी में भांग ..

    शुकर है कि साबजी ने एक चावल ही देखा, पूरी देग देखी होती तो सारे चावल कच्चे नजर आते। खालीपीली उन्हीं की बात नहीं। सा .....

  • सियासी नृत्य दिवस ..

    किसी और ने पकड़ा कि नहीं, हम ने तो लपक लिया। देखा भतेरों ने, पर सटीक मुलम्मा चढाने की किसी को नहीं सूझी। किसी के दिमा .....

  • बुआ-बबुआ और बीजेपी ..

    ये पुर भी फुर्र..वो पुर भी फुर्र..। दोनों पुरों ने तोते फुर्र..फुर्र..कर दिए। खुद उन की समझ में नहीं आया कि ये क्या हो ग .....

  • 'हैप्पी वेतन आयोग' ..


    हम तो चाहते हैं कि सब लोग 'हैप्पी' हो। चारों ओर हैप्पीनेस हो। गली-गली में हैप्पी-हैप्पी हो। पर जिस तरह से है .....

  • आओ फिर से दीया जलाए ..

    देखते ही देखते एक साल और गुजर गया। होली मनाई। ईद मनाई। गुरूपरब मनाए। साल के पहले महिने में गणतंत्र दिवस मनाया। अग .....

  • पायलट हठ ..

    कुल जमा कई लोगों की 'वाट' लग गई। किसी का शैड्यूल बिगड़ गया। किसी की अगली हवाई जहाज या रेल छूट गई। किसी की व्यापा .....

  • अब तो चेतो भाई ..

    इतना देखने, भुगतने और सहने के बाद तो उन्हें चेत जाना चाहिए। उन्हें समझ लेना चाहिए कि कुत्ता हर हाल में कुत्ता होता .....

  • परचियों पर लानतांजलि ..

    किसने सोचा था कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। किसे पता था कि कृत्यों-करतूतों का ऐसा घिनौना चेहरा सामने आएगा। बाहर लोग .....

  • फैसले में लोचे!  ..

    आदरजोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत। दिल खोल के स्वागत। ऐसा मजबूरी में नहीं, वरन दिल की गहराईयों से किया जा रह .....

  • हम सुधरेंगे! ..

    लगता है कि हम ने ना सुधरने की कसम खा रखी है। नारे लगाने को कहा जाए तो गूंजेगा-'गर्व से कहो-हम नहीं सुधरेंगे।' इस .....

  • करी-नो करी ..

    हम तो समझे थे कि 'नौकरी' का हौव्वा बेरोजगारों के बीच ही खड़ा रहता है, सियासी क्षेत्र में बखेड़ा हुआ तो पता चला क .....

  • 'कारियों' का मौसम ..

    ऐसा मौसम हर साल आता है। कोई जहमत उठाए तो साल में दो-तीन बार आ सकता है। कोई काम करना चाहे तो वर्ष पर्यन्त चल सकता है। .....

  • रावणगिरी  ..

    अच्छा हुआ जो रावण पकड में आज गया। भलमन साहत कि भागा नहीं।  भागता और पकड़ में आ जाता तो वीडियो और धांसू बनता। आगे-आ .....

  • मैं चली... मैं चली.... ..

    चली गई सो तो चली गई पर उन्हें इस तरह नहीं जाना चाहिए। क्यूं गई। इस तरह जाने के पीछे क्या कारण रहे हंै। वो जाने। घर ही .....