• दुरजण केरा बोलड़ा ..

    दुरजण केरा बोलड़ा, मत पांतरज्यो कोय।
    अणहूंती हूंती कहै, सगळी साच न होय।।

    किसी दुष्ट-दुर्जन के बोलों को .....

  • तोय कंटीलो होय ..

    दुरजण रूंख बबूल रो, साजन बार म बोय।
    जे अमरित सींचीजियै तो कंटीलो होय।।

    दुर्जन तो बबूल के पेड़ के समान ह .....

  • ओ सेवट प्रगटै उदै ..

    साच न बूढो होय, साच अमर संसार में।
    केतो ढाबै कोय, ओ सेवट प्रगटै उदै।।

    सत्य न तो बूढा होता है और न ही मरता .....

  • माणस रा नित रा रहै ..

    दसा दिवस इक सार, माणस रा नित ना रहै।
    ओ संसार असार, चौकस जाणो चतरसी।।

    मनुष्य की दशा और दिन सदैव एक जैसे नह .....

  • बडा है दीनदयाल ..

    दुनिया में सब ही बड़ा, बडा है दीनदयाल।
    छिण में छाल उडाय कर, पल में करै निहाल।।

    दुनिया में वैसे तो सब ही ब .....

  • मैं ने आग लगाय ..

    मैं नै आग लगाय, सब जागा हरजी वसै।
    मैं फिर कौण बलाय, किंकर जैं सूंबंध रह्यो।।

    अहंकार को आग लगा दे, क्योंक .....

  • सो ही साधू जन्न ..

    पूजा मान बड़ाइयां आदर मांगै मन्न।
    राम कहै सब परहरै, सो ही साधू जन्न।।

    मन तो चाहता है कि मान मिले, पूजा ह .....

  • जब ही तक मन मांय ..

    बुद्धि विवेक कुलीनता, जब ही तम मन मांय।
    काम-बाण की अगन की, लपट न जब तक आय।।

    मनुष्य के मन में बुद्धि विवेक .....

  • हुयी हुवै बेजड़ हुसी ..

    हुयी हुवै बेजड़ हुसी, जं जं जं हुणिहार।
    तं तं तं न मिटै उदै, नं नं नं न विचार।।

    ''पहले भी हुई है, आज भी हो .....

  • विपत देखमत रोय ..

    संपत देख न हांसियै, विपत देख मत रोय।
    जिण दीहाड़े जिण घड़ी, होणी हुवै सो होय।।

    मनुष्य को संपत्ति देखकर प .....

  • जब लग बंधी मूठ ..

    भैरव भरम हि लाख का, जब लग बंधी मूठ।
    प्रगट भयै तो कुछ नहीं, भया जमानै झूठ।।

    जब तक मुटठी बंधी हुई होती है, त .....

  • गरब्यो कहां गंवार ..

    दिन दस दौलत पाय कर, गरब्यो कहा गंवार।
    जोड़त लाग्या बरसा सौ, जात न लागै वार।।

    हे मूर्ख। दस दिन दौलत पाकर .....

  • आण बंटावै आय ..

    वरतै हेत सवाय, कर बंधु राखै कनै।
    आण बंटावै आय, दुख आधो रे द्यारमा।।

    ''जो सच्चा मित्र होता है वह अत्यधि .....

  • सुणसी आळस छोड़ ..

    सरस कथा जो होय तो, सुणसी आळस छोड़।
    बसत भली जो होवसी, तो ग्राहक जग क्रोड़।।

    ''यदि कथा सरस होगी, आकर्षक ह .....

  • जात सभाव न जाय ..

    भावै कितरा हो बडा, ह्वो ऊंचो पद पाय।
    प्रक्रति कदै बदळै नहीं, जात सभावु न जाय॥

    ''कोई भले ही कितना ही बड .....

  • बात-बात में बात ..

    ज्यों केकै कै पात में, पात-पात में पात। 
    त्यों चातर की बात में, बात-बात में बात।।

    ''जैसे केले के पत्त .....

  • किंकर हो हुसियार ..

    मौत बाज तइमार, प्राण कबूतर ना बचे।
    किंकर हो हुसियार, राम नाम री ओट ले।।

    मौत रूपी बाज घूम रहा है और देर सव .....

  • मरणो दीसै मोतिया ..

    उदै-अस्त लौ राज, अड़बां-खड़बां आथ है। 
    काइ ना आवै काज, मरणो दीसै मोतिया।।

    उदय से अस्त तक राज्य है, अरबो .....

  • वां रो रक्षक राम ..

    घास-फूस खावै पसू, छतां सतावै काम। 
    लाडू-पेड़ा नित भरवै, वां रो रक्षक राम।।

    पशु तो घास-फूस खाते हैं फिर .....

  • अवसर खाबो-पैरबों ..

    अवसर खाबों-पैरबों अवसर देणो दान। 
    अवसर चूको आदमी, सो आदम किणग्यान।।

    इस संसार में अवसर पर खाना पहनना ह .....

  • प्रकृति कदै बदळै नहीं ..

    भावै कितना हो बडा, व्हो ऊंचा पद पाय।
    प्रक्रति कदै बदळै नहीं, जात सभाव न जाय॥

    ''भले ही कोई ऊंचा पद प्रा .....

  • हर कोई जाचण करों ..

    उद्दम अरथ अपार, हर कोई जाचण करो। 
    सुख-दुख भोगै सार, करमां लारै किसनिया।।

    उद्यम में ही अपार अर्थ समाये .....

  • कहणी प्रभु रीझै न कछु ..

    कहणी प्रभु रीझै न कछु, रहणी रीझै राम।
    सपनै रीसौ म्होर सूं, कौडी सरै न काम।।

    भगवान किसी की कहनी पर नहीं र .....

  • आदत वा छूटै न जो ..

    रेखा काचै कुंभरी, पक्यां अम्रित हो जाय। 
    आदत वा छूटै न जो, बचपण में पड़ जाय।।

    कच्चे घड़े पर बनायी हुई र .....