• वचन पलट्टै सो मुवा ..

    वचन पलट्टै सो मुवा, कागा मुवा न जाण।
    नाम लियो समसेर रो, मार्यो तीर कबाण।।

    ''तुम कौए को मरा हुआ मत जानो, .....

  • पखा-पखी मत रायियो ..

    पंचां करो पंचायती, छोडो मन रो धेस।
    पखा-पखी मत राखियो, जद ही मिटै कळेस।।

    हे पंचों। तुम पंचायती करो, लेकिन .....

  • उळझै-सुळझै आप ही ..

    कूण किसी  को देत है, करम देत झकझोर।
    उळझै-सुळझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    ''इस दुनिया में कौन किसको देता .....

  • तैसी उपजै बुध्ध ..

    होणहार हिरदै बसै, बिसर जाय सब सुध्ध।
    जैसी हो होतव्यता, तैसी उपजै बुध्ध।।

    जब होनहार होने को होती है तो म .....

  • कामण सूं न डरै कवण ..

    हित कर जौड़े हाथ, कामण सूं न डरै कवण। 
    नमै त्रिलोकी नाथ, राधा आगळ राजिया।।

    हर कोई अपने हित के लिए हाथ ज .....

  • उत्तम गुणकारी हुवै ..

    उत्तम गुणकारी हुवै, स्वारथ बिना सुजाण।
    करसण सींचै जळ भरै, मेह न मांगै दाण।।

    जो उत्तम व्यक्ति होता है व .....

  • काल कदै नहिं आय ..

    काल-कालए करता थकां, बीत जुगाजुग जाय।
    रहवो सदा उडीकता, काल कदै नहिं आय।।

    कल-कल करते तो सुग पर युग बीत जात .....

  • आप तणै मुख आपरो ..

    जग ने नर हळका जका, बोलै हळका बोल।
    आप तणै मुख आपरो, भूरख कर दै मोल।।

    जो मनुष्य हलका होता है, वह हलका बोला क .....

  • कौडी खरच न खाय ..

    देख जियै पण दै न कुछ, कौड़ी खरच न खाय। 
    जाचक देख्यां जळ मरै, मांगै तो मर जाय।। 

    कंजूस व्यक्ति धन देखकर .....

  • निभसी क्योंकर नाथिया ..

    घट घण भरिया घाट, बात मुखां मीठी चवै। 
    हित कर पकडय़ो हाथ, निभसी क्योंकर नाथिया।।

    अंदर तो बहुत षडयंत्र .....

  • विद्या बिन विलखै वदन ..

    सूरवीर अति साहसी, रूपवंत दातार।
    विद्या बिन विलखै वदन, जिम तिय बिन भरतार।।

    ''सूरवीर, साहसी, रूपवान, दा .....

  • तोई गुण लिख्या न जाय ..

    आभो जो कागद करूं, मस व्है सायर मांय।
    वणरायां लखण करूं, तोइ गुण लिख्या न जाय।।

    ''यदि आकाश को कागज करूं, .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत परिणाम। 
    धड़ भांजै, भांजै धडै़, सकल सुधारै काम।।

    जिनके भीतर रीति-नीति .....

  • पीपा पाप न कीजियै ..

    पीपा पाप न कीजियै, अळगा रहियै आप।
    करणी आपोआप री, कुण बेटा कुण बाप।।

    ''संत पीपा कहते हैं कि मनुष्य को प .....

  • सज्जण दुरजण जाण यों ..

    बाजर बरू समान, किंकर देखण में लगै। 
    फळ में भेद महान, सज्जण-दुरजण जाण यों।।

    बाजरा और बरू दिखने में तो एक .....

  • हिम्मत मत हारोह ..

    हिम्मत मत हारोह, फैंकों, चिंत्या-फिकर नै। 
    सिमटै सुख सारोह, सुख होवै सुखदान जी।।

    मनुष्य को हिम्मत नही .....

  • चालै जां की जी है ..

    सुण जीवण संग्राम री, एक बात निरधार।
    चालै जां की जीत है, सोवै जां की हरि।।

    ''मनुष्य के जीवन-संग्राम की .....

  • भावी लिखियो भाळ ..

    बैठो जाय पताळ, समंद लांघ गिर पर चढो।
    भावी लिखियो भाळ, नित प्रति पावै नाथिया।।

    भले ही पाताल में जाकर बैठ .....

  • दाणो-पाणी परसराम ..

    कित कासी कित कासमिर, खुरासाण गुजरात।
    दाणो-पाणी परसराम, बांह पकड़ ले जात।।

    कहां तो काशी और कहां कश्मीर .....

  • कदैक मल-मल न्हाय ..

    या मन की या रीत है, जहां-तहां चल जाय।
    कदैक लोटे छार में कदैक मल मल न्हाय।।

    मनुष्य मन की यह आदत है कि वह जह .....

  • गुण वाळौ संपति लहै ..

    गुण वाळो संपति लहै, लहै न गुण बिन कोय।
    काढै नीर पताळ सूं, जे गुण घट में होय।।

    जो गुण वाला होता है, जिसमें .....

  • गाहक नहिं जिण गांव में ..

    गुण रो किसो उछाह, गाहक नहिं जिण गांव में।
    बिकै बरोबर भार, गुड़-गोबर गोविंदया।।

    जिस गांव में कोई गुण ग्र .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत-नीत  परिणाम। 
    धड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।
     
    जिनके भीतर रीति- .....

  • नैण स्रवण अर नासका ..

    नैण स्रवण अर नासका, नाही करत कह्योह।
    सुत बांधव अर भीत, अचरज कहा भयोह।।

    वृद्धावस्था आ जाने पर आंखें, नाक .....

  • बोल न तीखी बात ..

    बोल न तीखी बात, बात लगे ज्यों तीरिया।
    आग लगावै गात, मंगळ मीठो बोल तूं। 

    ऐसी तीखी बात कभी नहीं बोलनी चाह .....

  • संपत देखै जरा ..

    मानै करनिज मीच, पर संपत देखै जरां।
    निपट दुखी ह्वै नीच, रीसां बळ-बळ राजिया।।

    जो औरों के पास सुख-संपत्ति द .....

  • कांई पछतावौ करै ..

    कांइ करै अणुराय, कांई पछतावो करै।
    होणहार थिर थाय, जाणहार जावै जसा।।

    क्या तो कोई उपाय करै और क्या कोई पछ .....

  • मैं फिर कौण बलाय ..

    मैं नै आग लगाय, सब जाग्यां हरजी बसै।
    मैं फिर कौण बलाय, किंकर जै सूं बंध रह्यो।।

    मैं यानी अहंकार को आग लग .....

  • मैं फिर कौण बलाय ..

    मैं नै आग लगाय, सब जाग्यां हरजी बसै।
    मैं फिर कौण बलाय, किंकर जै सूं बंध रह्यो।।

    मैं यानी अहंकार को आग लग .....

  • सभा बीच न सुहात  ..

    सभा बीच न सुहात, निगुणा गुण ज्यां में नहीं।
    है गुण ज्यां रै हाथ, नरियंद अरधै नाथिया।।

    राजदरबार में गु .....

  • वा बिरिया तो टळ गई ..

    चाली पिरवा पून, मत्तीर गळ-गळ गई।
    अबै भलै घी घाल, वा बिरिया तो टळ गई।।

    ''पूर्वी हवा चली थी जिससे मतीरे .....

  • होणी हो सो होय ..

    गयो न जोबन बावडै़, मुवा न जीवै कोय।
    अणहोणी होवै नहीं, होणी हो सो होय।।

    गया हुआ यौवन फिर लौट कर नहीं आता .....

  • जाणहार जावै जसा ..

    कांइ करै अणुराय, कांई पछतावो करै।
    होणहार थिर  थाय, जाणहार जावै जसा।।

     

    क्या तो कोई अनुकरण करे और .....

  • समै पाय चूको मती  ..

    समै पाय चूको मती, कवी कहत है कूक। 
    चात्रग नर खटकै हियै, समै चूक री हूक।।

    मनुष्य को अवसर पाकर उसे कभी न .....

  •  पराधीन सुख नाय ..

    पराधीन सुख नाय, मंगळ पावै राज जो।
    पंछी सुख ना पाय, जो सोने रो पींजरो।।

    पराधीन होने पर मनुष्य को कोई सुख .....

  • फळ करणी रा सार ..

    फळ करणी रा सार, पडै़ ज सबनै भुगतणा।
    करो उपाय हजार, रती न छूटै रमणिया।।

    इस संसार में सार की बात यही है कि .....

  • अब क्यूं कूटै बावळी ..

    गई-गई नै जाण दै, रही-रही नै सीख।
    अब क्यूं कूटै बावळी, मुवै सांप री लीक।।

    ''जो-जो बीत गई है, उसे जाने दे औ .....

  •  सकळ सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुकी बुध बसै, रीत नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घड़ै, सकळ सुधारै काम।।

    ''जिनके भीतर रीति-नी .....

  • रहणी रीझै राम ..

    कहणी प्रभु रीझै न कछु, रहणी रीझै राम।
    सपनै री सौ म्हौर सूं, कौडी सरै न काम।।

    भगवान कभी कथनी से नहीं रीझ .....

  • तूं क्यों गरब करह ..

    हाथां परबत तोलता, समदां घूंट भरेह।
    ते जोधा दीखै नहीं, तूं क्यों गरब करेह।।

    ''जो पर्बतों को हाथों से .....

  • जग में वांछै जीवणो ..

    जग में वांछै जीवणो, सै प्राणी समदाय।
    हठ कर नर जिणनै हरै, जुलम कह्यो नहिं जाय।।

    ''इस संसार में सभी प्र .....

  • झूठ बरोबर पाप ..


     साच बरोबर तप नहीं, झूठ बरोबर पाप।
    जाकै हिरदै साच है, ताकै हिरदै आप।।

    ''सत्य के बराबर कोई तपस्या .....

  • सो मत पैला होय ..

    जो मत पाछै संचरै, सो मत पैला होय।
    काम न विणसै आप रो, दुरजण हसै न कोय।।

    यदि किसी को कोई विचार बाद में आता ह .....

  • उळझै-सुळझै आप ही ..

    कूण किसी को देत है, करम तेल झकझोर। 
    उळझै-सुळझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    इस संसार में कौन किसको देता है, द .....

  • निभसी क्योंकर नाथिया ..

    घट घण भरिया, घाट, बात मुखां मीठी चवै।
     हित कर पकड़्यो हाथ, निभसी क्योंकर नाथिया।।

    ''जिसके भीतर तो क .....

  • अणहोणी होवै नहीं ..

    क्रोड़ सयाणप लाख बुध, कर देखो सै कोय।
    अणहोणी होवै नहीं, होणी हो सो होय।।

    कोई भले ही करोड़ चतुराइयां और .....