Dainik Jaltedeep - Latest News in Hindi & Epaper Jodhpur & Jaipur -
  • दुरजण केरा बोलड़ा ..

    दुरजण केरा  बोलड़ा, मत पांतर जो कोय।
    अणहूंती हूंती कहै, सगळी साच न होय।।

    दुष्ट-दुर्जन व्यक्ति के बोलो .....

  • सरस कथा जो होय तो ..

    सरस कथा जो होय तो, सुणै सहू चित लाय। 
    ज्यां सुवास होवै कुसुम, मधुप सही त्यां जाय।।

    यदि कथा रसमय है तो स .....

  • बात कहीजै नेह सूं ..

    बात कहीजै नेह सूं, सुणै कान दे चित्त।
    जीव ठौड़ ज्यां रो नहीं,  वां सूं कहड़ी वत्त।।

    ''किस्से-कहानी त .....

  • तुम कस लख्योसुजान ..

    पढ कुरान बौरा भयो, नहि राच्यो रहमान।
    नर राची सूभयो नहीं, तुम कस लख्यो सुजान।।

    कुरान तो खूब पढते रहे, लेक .....

  • जो मत पाछै संचरै ..

    जो मत पाछै संचरै, सो मत पहली होय।
    काज न विणसै आपणो, लोग हंसै नहिं कोय।।

    जो मत बाद में मिलता है, वही मत यदि .....

  • रहणो तेज अंगार ज्यूं ..

    रहणो तेज अंगार ज्यूं, माल कह्यो रे मीत।
    सीधै ऊपर दो चढै, आ दुनिया री रीत।।

    मनुष्य को तेज अंगारे की तरह इ .....

  • लिछमी जाणै आपणी ..

    लिछमी जाणै आपणी, कदै न अपणी होय।
    घिरत-फिरत की छांहड़ी, जाणत है सब कोय।।

    लोग समझते हैं कि लक्ष्मी तो अपनी .....

  • हामळ भरूं करोड़ ..

    वा ही संखी सोहणी, मैं हूं संख ढपोळ।
    देण-लेण नै कुछ नहीं, हामळ भरू करोड़।।

    वह तो सुंदर शंखी थी, लेकिन मैं त .....

  • हुवै चौगणो मान ..

    जग में इधको मान, पावै फूल सुगंध सूं।
    हुवै चौगणो मान, मंगळ गुए संू रूप रो।

    इस संसार में सुगंध के कारण फूल .....

  • गुणवाळो संपत्ति लहै ..

    गुणवाळो संपत्ति लहै, लहै न गुण बिन कोय।
    काढै नीर पताळ सूं, जे गुण घट में होय।।

    जो गुणी होता है, गुणवाळा ह .....

  • ह्वै ज्यां बुधबळ हेक ..

    बुधवळ नको विवेक, सबळा नर निबळा सही।
    ह्वै ज्यां बुधवळ हेक, निबळा सबळा नाथिया।।

    यदि किसी में न तो बुद्धि .....

  • करणी आपोआप री ..

    पीपा पाप न कीजियै, अळगा रहजो आप।
    करणी आपोआप री, कुण बेटा कुण बाप।।

    संत पीता कहते हैं कि मनुष्य को पाप नह .....

  • अकल बिना रा आदमी ..

    नह समझै माने नहीं, जिणु रो कोइ न जोर।
    अकल बिना रा आदमी, ढबै किणी विध दोर।।

    ''जो समझता नहीं है, मानता नही .....

  • तैसी उपजै बुध्ध ..

    होणहार हिरदै, बिसर जाय सब सुध्ध।
    जैसी हो होतव्यता, तैसी उपजै बुध्ध।।

    जब को होनी को होती है तो वह मनुष्य .....

  • कायर खडग़ न बावसी ..

    आफू बांटण जोग पंथ, सूरां हंदा काम।
    कायर खडग़ न बावसी, रंक न देसी दाम।।

    युद्ध के मैदान में जाना और योग पं .....

  • अदतां रै धरजाय ..

    कीड़ीपण पावै नहीं, अदतां रै घर जाय।
    और घरां सूं आणियो, जिको गमाड्ै जाय।। 

    चींटी तक भी कंजूस के घर जाकर .....

  • सकल सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।

    जिसके अंदर रीति-नीति के .....

  • करै चानणो जगत में ..

    दुख भी सेवै भोत, मंगळ सेवा भाव ले।
    होय जामती जोत, करै चानणो जगत में।।

    जो सबके मंगल का, सब की सेवा का भाव ल .....

  • पर कारज समरथ्थ ..

    घर कारज, सीळा घणा, पर कारज समरथ्थ।
    जयां नै राखै सांइया, आडा दे-दे हथ्थ।।

    जो लोग अपने काम में तो बड़े शिथि .....

  • करम देत झकझोर ..

    कूण किसी को देत है, करम देत झकझोर।
    उलझै-सुलझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    इस संसार में कौन किसको देता है, देता .....

  • उद्दम अरथ अपार ..

    उद्दम अरथ अपार, हर कोई जाचण करो।
    सुख-दुख भोगैसार, करमां लारै किसनिया।।

    उद्यम में अपार अर्थ निहित होते .....

  • को मेटणो समथ्थ तिण ..

    ह-रह भूल न मिंत तूं, पीट न अधिक कपाट।
    को मेटणो समथ्थ तिण, जे विध लिख्या ललाट।।

    रूको-को मित्र, भाग्य के किव .....

  • नर अवसर चूकै नहीं ..

    समझदार सूजाण, नर अवसर चूकै नहीं।
    अवसर रो औसाण, रहै घणा दिन राजिया।।

    जो मनुष्य समझदार और जानकार होता है .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत-नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घडै़ सकळ सुधारै काम।।

    जिनके भीतर रीति-नीति के .....

  • राजवियां री राह ..

    ऊंड उदधि अथाह, थाह न पावै तैरवा।
    राजवियां री राह, नर कुण जाणै नारणा।

    ''जिस प्र्रकार अथाह गहरे समुद्र .....

  • देखो इणरो ग्यान ..

    एक माखी अर दुस्ट जन, देखो इणरो ग्यान।
    आपणपो तन त्याग कर, दुखी करै पर-प्राण।।

    एक मक्खी और दुष्ट व्यक्ति क .....

  • नह समझै मानै नहीं ..

    नह समझै मानै नहीं, जिणरो कोइ न जोर।
    अकल बिना रा आदमी, ढबै किसी विध ढोर।।

    जो समझता नहीं हैं, मानता नहीं है .....

  • जग में वांछै जीवणो ..

    जग में वांछै जीवणो, सै प्राणी समदाय।
    हठ कर नर जिणनै हरै, जुलम कह्यो नहिं जाय।।

    ''इस संसार में सभी प्रा .....

  • बड्डा घणा बणेह ..

    कूड़ी गांठ कनेह, राखै कण वध राखणा।
    बड्डा घणा बणेह, मन सूं ठाकर मोतिया।।

    जो झूठी गठरी रखते हों, का को मन ब .....

  • सोवै जां की हार ..

    सुण जीवण संग्राम री, एक बात निरधार।
    चाळै जां की जीत है, सोवै जां की हार।।

    ''जीवन रूपी संग्राम की यही ब .....

  • बोल न तीखी बात  ..

    बोल न तीखी बात, बात लगै ज्यूं तीरिया।
    आग लगावै गात, मंगळ मीठो बोल तूं।।

    मनुष्य को किसी से तीखी बात नहीं .....

  • नर अवसर चूकै नहीं ..

    समझदार सूजाण, नर अवसर चूैके नहीं।
    अवसर रो औसाण, रहै घणा दिन राजिया।।

    जो समझदार और जानकार मनुष्य होता ह .....

  • घट माही खोटा घडै़ ..

    मुख ऊपर मीठास, घट मांही खोटा घडै़।
    इसड़ां सूं इखळास, राखीजै नाहिं राजिया।।

    मुख पर तो बडी मीठी मीठी बात .....

  • दुरजण केरा बोलड़ा ..

    दुरजण केरा बोलड़ा, मत पांतरज्यो कोय।
    अणहूंती हूंती कहै, सगळी साच न होय।।

    किसी दुष्ट-दुर्जन के बोलों को .....

  • तोय कंटीलो होय ..

    दुरजण रूंख बबूल रो, साजन बार म बोय।
    जे अमरित सींचीजियै तो कंटीलो होय।।

    दुर्जन तो बबूल के पेड़ के समान ह .....

  • ओ सेवट प्रगटै उदै ..

    साच न बूढो होय, साच अमर संसार में।
    केतो ढाबै कोय, ओ सेवट प्रगटै उदै।।

    सत्य न तो बूढा होता है और न ही मरता .....

  • माणस रा नित रा रहै ..

    दसा दिवस इक सार, माणस रा नित ना रहै।
    ओ संसार असार, चौकस जाणो चतरसी।।

    मनुष्य की दशा और दिन सदैव एक जैसे नह .....

  • बडा है दीनदयाल ..

    दुनिया में सब ही बड़ा, बडा है दीनदयाल।
    छिण में छाल उडाय कर, पल में करै निहाल।।

    दुनिया में वैसे तो सब ही ब .....

  • मैं ने आग लगाय ..

    मैं नै आग लगाय, सब जागा हरजी वसै।
    मैं फिर कौण बलाय, किंकर जैं सूंबंध रह्यो।।

    अहंकार को आग लगा दे, क्योंक .....

  • सो ही साधू जन्न ..

    पूजा मान बड़ाइयां आदर मांगै मन्न।
    राम कहै सब परहरै, सो ही साधू जन्न।।

    मन तो चाहता है कि मान मिले, पूजा ह .....

  • जब ही तक मन मांय ..

    बुद्धि विवेक कुलीनता, जब ही तम मन मांय।
    काम-बाण की अगन की, लपट न जब तक आय।।

    मनुष्य के मन में बुद्धि विवेक .....

  • हुयी हुवै बेजड़ हुसी ..

    हुयी हुवै बेजड़ हुसी, जं जं जं हुणिहार।
    तं तं तं न मिटै उदै, नं नं नं न विचार।।

    ''पहले भी हुई है, आज भी हो .....

  • विपत देखमत रोय ..

    संपत देख न हांसियै, विपत देख मत रोय।
    जिण दीहाड़े जिण घड़ी, होणी हुवै सो होय।।

    मनुष्य को संपत्ति देखकर प .....

  • जब लग बंधी मूठ ..

    भैरव भरम हि लाख का, जब लग बंधी मूठ।
    प्रगट भयै तो कुछ नहीं, भया जमानै झूठ।।

    जब तक मुटठी बंधी हुई होती है, त .....

  • गरब्यो कहां गंवार ..

    दिन दस दौलत पाय कर, गरब्यो कहा गंवार।
    जोड़त लाग्या बरसा सौ, जात न लागै वार।।

    हे मूर्ख। दस दिन दौलत पाकर .....

  • आण बंटावै आय ..

    वरतै हेत सवाय, कर बंधु राखै कनै।
    आण बंटावै आय, दुख आधो रे द्यारमा।।

    ''जो सच्चा मित्र होता है वह अत्यधि .....

  • सुणसी आळस छोड़ ..

    सरस कथा जो होय तो, सुणसी आळस छोड़।
    बसत भली जो होवसी, तो ग्राहक जग क्रोड़।।

    ''यदि कथा सरस होगी, आकर्षक ह .....

  • जात सभाव न जाय ..

    भावै कितरा हो बडा, ह्वो ऊंचो पद पाय।
    प्रक्रति कदै बदळै नहीं, जात सभावु न जाय॥

    ''कोई भले ही कितना ही बड .....