• समै पाय चूको मती  ..

    समै पाय चूको मती, कवी कहत है कूक। 
    चात्रग नर खटकै हियै, समै चूक री हूक।।

    मनुष्य को अवसर पाकर उसे कभी न .....

  •  पराधीन सुख नाय ..

    पराधीन सुख नाय, मंगळ पावै राज जो।
    पंछी सुख ना पाय, जो सोने रो पींजरो।।

    पराधीन होने पर मनुष्य को कोई सुख .....

  • फळ करणी रा सार ..

    फळ करणी रा सार, पडै़ ज सबनै भुगतणा।
    करो उपाय हजार, रती न छूटै रमणिया।।

    इस संसार में सार की बात यही है कि .....

  • अब क्यूं कूटै बावळी ..

    गई-गई नै जाण दै, रही-रही नै सीख।
    अब क्यूं कूटै बावळी, मुवै सांप री लीक।।

    ''जो-जो बीत गई है, उसे जाने दे औ .....

  •  सकळ सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुकी बुध बसै, रीत नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घड़ै, सकळ सुधारै काम।।

    ''जिनके भीतर रीति-नी .....

  • रहणी रीझै राम ..

    कहणी प्रभु रीझै न कछु, रहणी रीझै राम।
    सपनै री सौ म्हौर सूं, कौडी सरै न काम।।

    भगवान कभी कथनी से नहीं रीझ .....

  • तूं क्यों गरब करह ..

    हाथां परबत तोलता, समदां घूंट भरेह।
    ते जोधा दीखै नहीं, तूं क्यों गरब करेह।।

    ''जो पर्बतों को हाथों से .....

  • जग में वांछै जीवणो ..

    जग में वांछै जीवणो, सै प्राणी समदाय।
    हठ कर नर जिणनै हरै, जुलम कह्यो नहिं जाय।।

    ''इस संसार में सभी प्र .....

  • झूठ बरोबर पाप ..


     साच बरोबर तप नहीं, झूठ बरोबर पाप।
    जाकै हिरदै साच है, ताकै हिरदै आप।।

    ''सत्य के बराबर कोई तपस्या .....

  • सो मत पैला होय ..

    जो मत पाछै संचरै, सो मत पैला होय।
    काम न विणसै आप रो, दुरजण हसै न कोय।।

    यदि किसी को कोई विचार बाद में आता ह .....

  • उळझै-सुळझै आप ही ..

    कूण किसी को देत है, करम तेल झकझोर। 
    उळझै-सुळझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    इस संसार में कौन किसको देता है, द .....

  • निभसी क्योंकर नाथिया ..

    घट घण भरिया, घाट, बात मुखां मीठी चवै।
     हित कर पकड़्यो हाथ, निभसी क्योंकर नाथिया।।

    ''जिसके भीतर तो क .....

  • अणहोणी होवै नहीं ..

    क्रोड़ सयाणप लाख बुध, कर देखो सै कोय।
    अणहोणी होवै नहीं, होणी हो सो होय।।

    कोई भले ही करोड़ चतुराइयां और .....

  • सत तो लिछमी होय ..

    सत री चेरी लिच्छमी, आद कहै सब कोय।
    जे दरिद्र तो सत नहीं, सत तो लिछमी होय।।

    लक्ष्मी तो सत् की दासी है, ऐसा .....

  • सच न छोडै मित्त तूं ..

    सत्त न छोडै मित्त तूं, रिध्ध चौगणी होय।
    सुख-दुख रेखा करम की, टाळ सकै नहिं कोय।।

    हे मित्र। तुिम सत को कभ .....

  • भाग बळी उदाराज कह ..

    भाग बळी उदराज कह, भाग न समवड़ कोय। 
    भागे घर-सुख पाइसै, भागे पर-सुख होय।।

    इस संसार में भाग्य बलवान होता .....

  • सदा भरोसो सत्त रो ..

    आतम-बल आधार, सदा भरोसो सत्त रो।
    होवै बिन हथियार, के करसी जग कालिया।।

    ''जिसका आधार आत्मबल हो और जिसको .....

  • मार्यों बोड बिलाव ..

    करड़ी कूंती करणावतां, गळ में घाली लाव।
    कड़ बांधी काठो कर्यो, मार्यो बोड बिलाव।।

    एक करणावत सरदार के घर .....

  • नहीं पुन्न बिन नारणा ..

    निपट निरोगी काय, खान-पान सगळा पचै।
    अत लांबी ह्वै आय, नहीं पुन्न बिन नारणा।।

    शरीर एकदम स्वस्थ हो, कोई बी .....

  • सज्जन जे अंगी करै ..

    पदमनाभ पंडित भणै, भावी चंचल होय। 
    सज्जन जे अंगी करै, वचन न लोपै कोय।।

    ''पंडित पद्ननाभ का कहना है कि .....

  • सज्जन माणस अमिय सम ..


    सज्जन माणस अमिय सम, दीठां हरख करंत।
    दुख्ख हरै मीठो चवै, नैण विकास करंत।।

    ''जो सज्जन पुरूष होते है .....

  • कुळवंता पाळै घणा ..

    बोलै थोड़ा बोल, कुळवंता पाळै घणा
    कपटां तणा निलोळ, जण-मण सूं वेस्या करै


    जो कुलीन व्यक्ति होते हैं, व .....

  • भूंडा किमहि न हुंत ..

    भल्ला जे सहजे भला, भूंडा किमहि न हुंत। 
    चंदण विसहर ढाकियो, परमळ तो न तजंत।।


    जो भले होते हैं सहज रू .....

  • समझदार सूजाण ..


    समझदार सूजाण, नर अवसर चूकै नहीं।
    अवसर रो ओसाण, रहै घणा दिन राजिया।।


    जो समझदार और जानकार होता है, .....

  • जे कोई सिख जाय ..


    सतगुरू सबद उलांघ कर, जे कोई सिख जाय।
    रज्लब पग-पग काळ है,जहां जाय तहां खाय।।


    यदि कोई शिष्य अपने गु .....

  • माया का सुख पांच दिन ..


    माया का सुख पांच दिन, गरब्यो कहा गंवार।
    सपनै पायो राज-धन, जात न लागै वार।।


    हे मूर्ख। यह जो माया क .....

  • काज न विणसै आपणो ..


    जो मत पाछै संचरै, सो मत पहली होय।
    काज न विणसै आपणो, दुरजण हंसै न कोय।।


    यदि किसी मनुष्य को बाद में .....

  • हियै मूढ जो होय ..


    हियै मूढ जो होय, की संगत ज्यां री करै।
    काळै ऊपर कोय, रंग न लागै राजिया।।


    ''जो हृदय से ही, अंदर से .....

  • दस दिन दौलत पाय कर ..

    दिन दस दौलत पाय कर, गरब्यो कहा गंवार। 
    जोड़त लाग्या बरस सौ, जात न लागै वार।।


    दस दिन दौलत पाकर तुम अहंकार .....

  • गवरीजै जस गीतड़ा ..


    अथ्थ जकां दी आपणी, हरख गरीबां हथ्थ। 
    गवरीजै जस गीतड़ा, ताण-तणक्कां सथ्थ।।


    जिन्होंने अपनी धन द .....

  • जो घर नार कुनार ..


    पुरस बिचारा क्या करै, जो घर नार कुनार।
    ओ सींवै दो आंगला, वा फाडै गजच्यार।।


    ''यदि घर में कु-स्त् .....

  • परोपकार पाको रतन ..


    परोपकार पाको रतन, परत न देसी पूठ।
     स्वारथ सीसी काच री, फट-दे जासी फूट।।


    ''परोपकार तो पक्का रत .....

  • दीजो कदै न द्यारमा ..


    छाती पड़सी छेद, बेगम सारा बक्कसी।
    भूल त्रिया नै भेद, दीजो कदै न द्यारमा।।


    कभी भूलकर भी अपनी स्त .....

  • साबत रखजै साख ..

    लीजे नहिं वै लाख, जावण दीजै जोख सूं।
    साबत रखजै साख, दरजो बधसी, द्यारमा।।


    यदि लाखों रूपये भी मिलते ह .....

  • लालच री दौड़े लहर ..

    लालच री दौडै़ लहर, भवन वियां धन भाळ।
    बैठो थावर बारमो, कांधे आय कराळ।।
    धन देखकर मनुष्य के मन में लालच की लहर दौड .....