Dainik Jaltedeep - Latest News in Hindi & Epaper Jodhpur & Jaipur -
  • जोबन आवै जोर ..

    दौलत सूं दौलत बधै, दुनिया आवै दौर।
    जस होवै सब जगत में, जोबन आवै जोर।।

    धन से धन में वृद्धि होती है। धन के क .....

  • राई घटै न राजिया ..

    नहचै होय निसंक, चित नह कीजै चळ-विचळ।
    ऐ विधना रा अंक, राई घटै न राजिया।।

    मनुष्य को धीरज धारण कर नि:शंक रहन .....

  • अणहोगी होवै नहीं ..

    क्रोड़ सयाणप लाख बुध, कर देखौ से कोय।
    अणहोणी होवै नहीं, होणी हो सो होय।।

    कोई क्या, सब अपनी करोड़ चतुराई .....

  • मत कोई करो विसास ..

    कामण नै केकाण रो, मत कोई करो विसास।
    जे चढवै नित चालवै, ते ताही का दास।।

    'स्त्री और घोड़ का कभी कोई विश्व .....

  • धूरत लक्षण माल ..

    मुख दीसै विगस्यो कमळ, चंदन वचन रसाला।
    हिवड़े जाणै कतरणी, धूरत लच्छण माल।।

    जिसका मुंह खिले हुए कमल के स .....

  • त्यों चातर की बात में ..

    ज्यों केळै के पात में, पात-पात में पात।
    त्यों चातर की बात में, बात-बात में  बात।।

    जिस प्रकार के केले के .....

  • समझै सोय गंवार ..

    तिरिया मूरत प्रेम री, सुख-दुख भागीदार। 
    तिणनै जूती पांव री, समझै सोय गंवार।।

    स्त्री तो प्रेम-अपनापन क .....

  • तैसी उपजै बुध्ध ..

    होणहार हिरदै बसै, बिसर जाय सब सुध्ध। 
    जैसी हो होतव्यता, तैसी उपजै बुध्ध।।

    जब कोई होनी होने को होती है .....

  • भैरव अपणी हद्द में ..

    भैरव अपणी हद्द में, रह्यां सकल  सुख होय।
    मान महत सुख ऊपजै, औगण कहै न कोय।।

    हर किसी को अपनी सीमा में रहन .....

  • नीति-निपुण नरपत नहीं ..

    मूढ बसै पुर मांय, नीति-निपुण नरपत नहीं। 
    खोस खोस धन खाय, तहां न वसियै चतरजी।।

    जहां मूर्ख लोग बसते हो और .....

  • मूरख आगै ग्यान ..

    पाणी में पाखाण, भीजै पर छीजै नहीं।
    मूरख आगै ग्यान, रीझै पर बूझै नहीं।।

    पानी में पत्थर भीगता तो है, लेकिन .....

  • सकल सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत  परिणाम। 
    घड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।

    जिनके अंदर रीति-नी .....

  • आगै पर राखै नहीं ..

    करणो हुवैज ज काम, आगै पर राखै नहीं।
    चातुरता रो धाम, सोय कहावै चतरसी।।

    जो व्यक्ति अपना काम तुरंत कर लेता .....

  • राब तिहारो रोस ..

    राब तिहारो रोस, जीवतड़ो भूलूं नहीं।
    छोडी थी सौ कोस, आगै आई आगरै।।

    हे राब। मैं तुम्हारा जीवन भर नहीं भूल .....

  • हाथां ठाली हालणो ..

    हाथां ठाली हालणो, जाझी संपत जोड़
    मौत सरीखी मिनख रै, खलक मांय नहिं खोड़।।

    अनाप-शनाप धन-संपत्ति जोडऩे के .....

  • सकल सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।

    ''जिसके भीतर रीति-नीत .....

  • जो घर नार कुनार ..

    पुरस बिचारा क्या करै, जो घर नार कुनार।
    ओ सींवै दो आंगळा, वा फाडै़ गजच्यार।।

    अब पुरूष बेचारा करे तो क्या .....

  • अकल सरीरा माय ..

    अकल सरीरां मांय, तिलां तेल घ्रित दूध में।
    पण है पड़दै मांय, चौड़े काढो चतरसी।।

    जिस प्रकार तिलों में ते .....

  • गरवा सहजै गुण करै ..

    गरवा सहजै गुण करै, कंत म कारण जाण। 
    सायर पोखै सर भरै, मेह न मांगै दाण।।

    जो बड़े होते हैं, महापुरूष होते .....

  • ओ सेवट प्रगटै उदै ..

    साच न बूढो होय, साच अमर संसार में।
    केतो ढाबो कोय, ओ सेवट प्रगटै उदै।।

    सत्य कभी बूढा नहीं होता, क्योंकि स .....

  • वेह का घाल्या न टकै ..

    वेह का घाल्या ना टळै, छठी रात रा अंक।
    राई घटै न तिलवधै, रह रे जीव निसंक।।

    छठी की रात को वेहमाता द्वारा डा .....

  • मतलब बड्डी बात ..

    मतलब बड्डी बात, मतलब सूं दुनिया भरी।
    बिन मतलब अेक बात, किंकर कोइ बूझै नहीं। 

    दुनिया में मतलब ही सबसे ब .....

  • बिन हिम्मत किम्मत नहीं ..

    हिम्मत किम्मत होय, बिन हिम्मत किम्मत नहीं।
    करै न आदर कोय, रद कागद ज्यों राजिया।।

    संसार में हिम्मत की क .....

  • नर अवसर चूकै नहीं ..

    समझदार सूजाण, नर अवसर चूकै नहीं।
    अवसर रो औसाण, रहै घण दिन राजिया।।

    जो समझदार और जानकार होता है, वह अवसर .....

  • भैरव अपणी हद्द में ..

    भैरव अपणी हद्द में, रहयां सकल सुख होय।
    मान महत सुख ऊपजै, ऑगण कहै न कोय।।

    ''अपनी सीमा में रहने पर ही मनु .....

  • जं जं जं हुणिहार ..

    हुयी हुवै बेजड़ हुसी, जं जं जं हुणिहार। 
    तं तं तं न मिटै उदै, नं नं नं न विचार।।

    होनी तो पहले भी हुई है, आ .....

  • ऐ मारै हंस-खेल ..

    छोटी-मोटी कामणी, सारी विस की बेल।
    बैरी मारै दांव सूं, ऐ मारै हंस-खेल।।

    छोटी और बड़ी सभी नारियां विष की ब .....

  • तहां न बसियै जाय ..

    भलो-बुरो सब एक सौ, खळ-गुळ एकै भाय।
    ऐसी अन्यायी पुरी, तहां न बसियै जाय।।

    जहां भला और बुरा एक समान माना जात .....

  • माणस आ ही परखिया ..

    भरिया सो छळकै नहीं, छळकै सो आधाह। 
    माणस आ ही परखिया, बोल्या अर लाघाह।।

    भरा हुआ घड़ा छलकता नहीं है, जो छ .....

  • सतगुरू की महमा अनंत ..

    सतगुरू की महमा अनंत, अनंत किया उपकार। 
    लोचन अनंत उघाडिय़ा, अनंत दिखावणहार।। 

    सद्गुरू की महिमा अनंत .....

  • दुरजण केरा बोलड़ा ..

    दुरजण केरा  बोलड़ा, मत पांतर जो कोय।
    अणहूंती हूंती कहै, सगळी साच न होय।।

    दुष्ट-दुर्जन व्यक्ति के बोलो .....

  • सरस कथा जो होय तो ..

    सरस कथा जो होय तो, सुणै सहू चित लाय। 
    ज्यां सुवास होवै कुसुम, मधुप सही त्यां जाय।।

    यदि कथा रसमय है तो स .....

  • बात कहीजै नेह सूं ..

    बात कहीजै नेह सूं, सुणै कान दे चित्त।
    जीव ठौड़ ज्यां रो नहीं,  वां सूं कहड़ी वत्त।।

    ''किस्से-कहानी त .....

  • तुम कस लख्योसुजान ..

    पढ कुरान बौरा भयो, नहि राच्यो रहमान।
    नर राची सूभयो नहीं, तुम कस लख्यो सुजान।।

    कुरान तो खूब पढते रहे, लेक .....

  • जो मत पाछै संचरै ..

    जो मत पाछै संचरै, सो मत पहली होय।
    काज न विणसै आपणो, लोग हंसै नहिं कोय।।

    जो मत बाद में मिलता है, वही मत यदि .....

  • रहणो तेज अंगार ज्यूं ..

    रहणो तेज अंगार ज्यूं, माल कह्यो रे मीत।
    सीधै ऊपर दो चढै, आ दुनिया री रीत।।

    मनुष्य को तेज अंगारे की तरह इ .....

  • लिछमी जाणै आपणी ..

    लिछमी जाणै आपणी, कदै न अपणी होय।
    घिरत-फिरत की छांहड़ी, जाणत है सब कोय।।

    लोग समझते हैं कि लक्ष्मी तो अपनी .....

  • हामळ भरूं करोड़ ..

    वा ही संखी सोहणी, मैं हूं संख ढपोळ।
    देण-लेण नै कुछ नहीं, हामळ भरू करोड़।।

    वह तो सुंदर शंखी थी, लेकिन मैं त .....

  • हुवै चौगणो मान ..

    जग में इधको मान, पावै फूल सुगंध सूं।
    हुवै चौगणो मान, मंगळ गुए संू रूप रो।

    इस संसार में सुगंध के कारण फूल .....

  • गुणवाळो संपत्ति लहै ..

    गुणवाळो संपत्ति लहै, लहै न गुण बिन कोय।
    काढै नीर पताळ सूं, जे गुण घट में होय।।

    जो गुणी होता है, गुणवाळा ह .....

  • ह्वै ज्यां बुधबळ हेक ..

    बुधवळ नको विवेक, सबळा नर निबळा सही।
    ह्वै ज्यां बुधवळ हेक, निबळा सबळा नाथिया।।

    यदि किसी में न तो बुद्धि .....

  • करणी आपोआप री ..

    पीपा पाप न कीजियै, अळगा रहजो आप।
    करणी आपोआप री, कुण बेटा कुण बाप।।

    संत पीता कहते हैं कि मनुष्य को पाप नह .....

  • अकल बिना रा आदमी ..

    नह समझै माने नहीं, जिणु रो कोइ न जोर।
    अकल बिना रा आदमी, ढबै किणी विध दोर।।

    ''जो समझता नहीं है, मानता नही .....

  • तैसी उपजै बुध्ध ..

    होणहार हिरदै, बिसर जाय सब सुध्ध।
    जैसी हो होतव्यता, तैसी उपजै बुध्ध।।

    जब को होनी को होती है तो वह मनुष्य .....

  • कायर खडग़ न बावसी ..

    आफू बांटण जोग पंथ, सूरां हंदा काम।
    कायर खडग़ न बावसी, रंक न देसी दाम।।

    युद्ध के मैदान में जाना और योग पं .....

  • अदतां रै धरजाय ..

    कीड़ीपण पावै नहीं, अदतां रै घर जाय।
    और घरां सूं आणियो, जिको गमाड्ै जाय।। 

    चींटी तक भी कंजूस के घर जाकर .....

  • सकल सुधारै काम ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत परिणाम।
    घड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।

    जिसके अंदर रीति-नीति के .....