• काळो-उजळो वरण है ..

    काळो उजळो वरण है, बिन पग भाज्यां जाय।
    बिना जीव बोलै घणा, जाचै जगती आय।।

    जिसका काला उजला रंग हैं, जो बिना .....

  • तिया विरच्ची जौ करै ..

    आग विरच्यो जळ मरै, सिंघ विरच्यो खाय।
    तिया विरच्ची जो करे, सो दई वो न कराय।।

    'आग के विपरित होने पर जल मरन .....

  • उळझै-सुळझै आप ही ..

    कूण किसी को देत है, करम देत झकझोर।
    उळझै-सुळझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    कौन किसको देता है, देता तो भाग्य है .....

  • होणी हो सो होय ..

    गयो न जोबन बावडै़, मुवा न जीवै कोय।
    अणहोणी होवै नहीं, होणी हो सो होय।।

    गया हुआ यौवन फिर भी नहीं आता है। औ .....

  • क्रोध अनल बुझ जाय ..

    अति सीतल म्रिदु वचन सूं, क्रोध अनल बुझ जाय। 
    ज्यों ऊफणतै दूध ने, पाणी देय समाय।।

    ''अत्यंत शीतल और को .....

  • लालच री दौड़े लहर ..

    लालच री दौड़े लहर, भन वियां धन भाळा।
    बैठो थावर बारमो, कांधे आण कराळ।।

    धन देख कर मनुष्य में लालच की लहर द .....

  • माणस रा नित ना रहै ..

    दसा-दिवस इस सार, माणस रा नित ना रहै।
    ओ संसार असार, चौकस जाणो चतरसी।।

    मनुष्य की दशा और दिन हमेशा एक जैसे न .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत-नीत परिणमा।
    घड़ भांजै, भांजै घडै़, सकळ सुधारै काम।।

    जिनके भीतर रीति-नीति के .....

  • पिंड में मोटा पाप ..

    पिंड में मोटा पाप, पंथ बहता बाथां पडै़।

    अळगा रहजो आप, मैला मिनखां मोतिया।।

    जो कपटी होते हैं उ .....

  • जो अपणै मन साच ..

    भैरव डर किण बात रो, जो अपणै मन साच। 
    आपै परगट होवसी, जो कंचन ओ काच।।

    यदि अपने मन में सच्चाई है तो फिर किस .....

  • सीख दिवी परमाण ..

    दिवी सीख जो सीख लै, करै सीख गुण जाण।
    उदैराज उण मिनख नै, सीख दिवी परमाण।।

    जो किसी द्वारा दी हुई सीख को ग्र .....

  • आदत वा छूटै न जो ..

    रेखा कांचै कुंभ री, पक्यां अम्रित हो जाय। 
    आदत वा छूटै न जो, बचपण में पड़ जाय।।

    जिस प्रकार कच्चे माटी क .....

  • मन आणै अहंकार ..

    सपनो-सो संसार, जाणै पण भूलै जगत।
    मन आणै अहंकार, छिण भर में नर छोरिया।।

    यह संसार स्वप्रवत् है, मनुष्य यह .....

  • हालै होडाहोड ..

    मूरख मारग छोड, देखा-देखी दरड़ में।
    हालै होडाहोड, गाडर ज्यों गोविन्दिया।।

    मूर्ख व्यक्ति बिना सोचे-समझ .....

  • मोटै मालिक रो घणो ..

    मोटै मालिक रो घणो, मोटो नहचो चित्त।
    छिटकासी नहिं बीच में, नेह निभासी नित्त।।

    इस संसार में स्वामी का चि .....

  • मन चींत्या मूळ न हुवै ..

    हिकमत करो हजार, मन चींत्या मूळ न हुवै।
    करता किया करार, सो ही होसी सारंगा।।

    कोई हजार तरकीबें ही क्यों न क .....

  • होणी हर रै हात ..

    बीती करो न बात, आसा करो ना आगली। 
    होणी हर रै हात, चोखी-भूंडी चकरिया।।

    न तो बीती हुई बात करनी चाहिए और न आ .....

  • नर क्रितघण मानै नहीं ..

    कीघोड़ा उपगार, नर क्रितघण मानै नहीं।
    लानतियां ज्यां लार, रजली उडावो राजिया।।

    जो किसी के किये हुए उपका .....

  • अबळा है क बलाय ..

    डोरी सूं डर जाय, ना तर डरै न न्हार सूं।
    अबळा है क बलाय, चातर जाणै चकरिया।।

    डरने को तो स्त्री डोरी से भी डर .....

  • कामण आगै के लिया ..

    पिरथी रा पैमाल, पल मांही कर दै परी।
    सिंघ हुया है स्याळ, कामण आगै केलिया।।

    जो पलभर में पृथ्वी को पदाक्रा .....

  • वचन पलट्टै सो मुवा ..

    वचन पलट्टै सो मुवा, कागा मुवा न जाण।
    नाम लियो समसेर रो, मार्यो तीर कबाण।।

    ''तुम कौए को मरा हुआ मत जानो, .....

  • पखा-पखी मत रायियो ..

    पंचां करो पंचायती, छोडो मन रो धेस।
    पखा-पखी मत राखियो, जद ही मिटै कळेस।।

    हे पंचों। तुम पंचायती करो, लेकिन .....

  • उळझै-सुळझै आप ही ..

    कूण किसी  को देत है, करम देत झकझोर।
    उळझै-सुळझै आप ही, धजा पवन के जोर।।

    ''इस दुनिया में कौन किसको देता .....

  • तैसी उपजै बुध्ध ..

    होणहार हिरदै बसै, बिसर जाय सब सुध्ध।
    जैसी हो होतव्यता, तैसी उपजै बुध्ध।।

    जब होनहार होने को होती है तो म .....

  • कामण सूं न डरै कवण ..

    हित कर जौड़े हाथ, कामण सूं न डरै कवण। 
    नमै त्रिलोकी नाथ, राधा आगळ राजिया।।

    हर कोई अपने हित के लिए हाथ ज .....

  • उत्तम गुणकारी हुवै ..

    उत्तम गुणकारी हुवै, स्वारथ बिना सुजाण।
    करसण सींचै जळ भरै, मेह न मांगै दाण।।

    जो उत्तम व्यक्ति होता है व .....

  • काल कदै नहिं आय ..

    काल-कालए करता थकां, बीत जुगाजुग जाय।
    रहवो सदा उडीकता, काल कदै नहिं आय।।

    कल-कल करते तो सुग पर युग बीत जात .....

  • आप तणै मुख आपरो ..

    जग ने नर हळका जका, बोलै हळका बोल।
    आप तणै मुख आपरो, भूरख कर दै मोल।।

    जो मनुष्य हलका होता है, वह हलका बोला क .....

  • कौडी खरच न खाय ..

    देख जियै पण दै न कुछ, कौड़ी खरच न खाय। 
    जाचक देख्यां जळ मरै, मांगै तो मर जाय।। 

    कंजूस व्यक्ति धन देखकर .....

  • निभसी क्योंकर नाथिया ..

    घट घण भरिया घाट, बात मुखां मीठी चवै। 
    हित कर पकडय़ो हाथ, निभसी क्योंकर नाथिया।।

    अंदर तो बहुत षडयंत्र .....

  • विद्या बिन विलखै वदन ..

    सूरवीर अति साहसी, रूपवंत दातार।
    विद्या बिन विलखै वदन, जिम तिय बिन भरतार।।

    ''सूरवीर, साहसी, रूपवान, दा .....

  • तोई गुण लिख्या न जाय ..

    आभो जो कागद करूं, मस व्है सायर मांय।
    वणरायां लखण करूं, तोइ गुण लिख्या न जाय।।

    ''यदि आकाश को कागज करूं, .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत नीत परिणाम। 
    धड़ भांजै, भांजै धडै़, सकल सुधारै काम।।

    जिनके भीतर रीति-नीति .....

  • पीपा पाप न कीजियै ..

    पीपा पाप न कीजियै, अळगा रहियै आप।
    करणी आपोआप री, कुण बेटा कुण बाप।।

    ''संत पीपा कहते हैं कि मनुष्य को प .....

  • सज्जण दुरजण जाण यों ..

    बाजर बरू समान, किंकर देखण में लगै। 
    फळ में भेद महान, सज्जण-दुरजण जाण यों।।

    बाजरा और बरू दिखने में तो एक .....

  • हिम्मत मत हारोह ..

    हिम्मत मत हारोह, फैंकों, चिंत्या-फिकर नै। 
    सिमटै सुख सारोह, सुख होवै सुखदान जी।।

    मनुष्य को हिम्मत नही .....

  • चालै जां की जी है ..

    सुण जीवण संग्राम री, एक बात निरधार।
    चालै जां की जीत है, सोवै जां की हरि।।

    ''मनुष्य के जीवन-संग्राम की .....

  • भावी लिखियो भाळ ..

    बैठो जाय पताळ, समंद लांघ गिर पर चढो।
    भावी लिखियो भाळ, नित प्रति पावै नाथिया।।

    भले ही पाताल में जाकर बैठ .....

  • दाणो-पाणी परसराम ..

    कित कासी कित कासमिर, खुरासाण गुजरात।
    दाणो-पाणी परसराम, बांह पकड़ ले जात।।

    कहां तो काशी और कहां कश्मीर .....

  • कदैक मल-मल न्हाय ..

    या मन की या रीत है, जहां-तहां चल जाय।
    कदैक लोटे छार में कदैक मल मल न्हाय।।

    मनुष्य मन की यह आदत है कि वह जह .....

  • गुण वाळौ संपति लहै ..

    गुण वाळो संपति लहै, लहै न गुण बिन कोय।
    काढै नीर पताळ सूं, जे गुण घट में होय।।

    जो गुण वाला होता है, जिसमें .....

  • गाहक नहिं जिण गांव में ..

    गुण रो किसो उछाह, गाहक नहिं जिण गांव में।
    बिकै बरोबर भार, गुड़-गोबर गोविंदया।।

    जिस गांव में कोई गुण ग्र .....

  • ज्यां घट बहुळी बुध बसै ..

    ज्यां घट बहुळी बुध बसै, रीत-नीत  परिणाम। 
    धड़ भांजै, भांजै घडै़, सकल सुधारै काम।।
     
    जिनके भीतर रीति- .....

  • नैण स्रवण अर नासका ..

    नैण स्रवण अर नासका, नाही करत कह्योह।
    सुत बांधव अर भीत, अचरज कहा भयोह।।

    वृद्धावस्था आ जाने पर आंखें, नाक .....

  • बोल न तीखी बात ..

    बोल न तीखी बात, बात लगे ज्यों तीरिया।
    आग लगावै गात, मंगळ मीठो बोल तूं। 

    ऐसी तीखी बात कभी नहीं बोलनी चाह .....

  • संपत देखै जरा ..

    मानै करनिज मीच, पर संपत देखै जरां।
    निपट दुखी ह्वै नीच, रीसां बळ-बळ राजिया।।

    जो औरों के पास सुख-संपत्ति द .....

  • कांई पछतावौ करै ..

    कांइ करै अणुराय, कांई पछतावो करै।
    होणहार थिर थाय, जाणहार जावै जसा।।

    क्या तो कोई उपाय करै और क्या कोई पछ .....