थाईलैंड में मशहूर है लाल, पीले और हरे रंग वाली थाई करी, भारत से पहुंची थी बनाने की रेसिपी

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हमने और आपने कितनी ही 'करीÓ का स्वाद लिया होगा, लेकिन थाई करी की बात तो एकदम अलग ही है। दुनिया के लोकप्रिय खानपान में 'थाई करीÓ का नंबर तीसरा है और इसकी वजह है, इसमें इस्तेमाल होने वाले कई तरह के पेस्ट। इतना ही नहीं, आप तीन अलग रंगों में भी इस करी का स्वाद ले सकते हैं। दुनियाभर में आप कहीं चले जाएं, आपको थाईलैंड का खाना परोसने वाले रेस्तरां नजर आ जाएंगे। संसार के सबसे लोकप्रिय खानपान में फ्रांसीसी और चीनी खाने के बाद थाईलैंड का ही नंबर आता है, जो आजकल इतालवी और मैक्सिकन खाने से आगे चल रहा है। कोरियाई व्यंजन या भूमध्य सागरी कुछ समय के लिए भले ही लोकप्रियता हासिल कर ले, लेकिन 'थाई करीÓ सदाबहार है। खानपान के शौकीन इनके नाम याद करने की जरूरत नहीं समझते, बल्कि इनके लिए लाल करी, हरी करी और पीली करी जैसे विशेषण इस्तेमाल करते हैं। अंग्रेजों के लिए 'करीÓ एक ऐसा नाम था, जिसके अंतर्गत दर्जनों कोरमे, सालन और कलिए समा जाते थे। और उनका मानना है कि भारत से थाईलैंड तक 'करीÓ को पहुंचाने वाले हिन्दुस्तानी सौदागर, धर्मप्रचारक और मजदूर, कारीगर आदि ही थे।
दिलचस्प बात यह है कि खानपान पर भारतीय प्रभाव सिर्फ थाईलैंड में ही नहीं देखने को मिलता, बल्कि मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया तक नजर आता है। लाओस और कंबोडिया में भी भाषा, कला और भवन निर्माण आदि पर भारतीय-हिंदू या बौद्ध छाप साफ झलकती है , परंतु वहां का खाना थाईलैंड की तरह करी वाला नहीं। थाईलैंड की करी अगर लाल रंग वाली हो, तो बहुत तीखी होती है, क्योंकि उसका रंग ही यह संकेत देता है कि उसकी आत्मा पिसी लाल मिर्च में रची-बसी है।
 

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