देवताओं और मनुष्यों का उत्सव माह दीपावली 

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देवताओं और मनुष्यों का उत्सव माह कार्तिक त्योहारों का महीना है। साल भर में सबसे ज्यादा त्योहार इसी महीने में आते हैं। इतने ज्यादा कि दिन के हिसाब से गिनती लगाएं, तो पूरे महीने में प्रतिदिन तीन त्योहार आते हैं। इनमें प्रमुख त्योहारों में धनतेरस या धन्वंतरी जयंती, हनुमान जयंती, नरक चौदस, छोटी दीवाली, महालक्ष्मी पूजन, अन्नकूट महोत्सव, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, विश्वकर्मा जयंती, षष्ठी व्रत, अक्षय नवमी, देवोत्थानी एकादशी, तुलसी विवाह, भीष्म पंचक, बैकुंठ चतुर्दशी, कार्तिक पूर्णिमा, पुष्कर स्नान और श्री गुरुनानक देव जी की जयंती आदि हैं। प्रत्येक त्योहार का अपना दर्शन और संदेश है। दोनों को मिलाकर देखें, तो धर्म और अध्यात्म का व्यावहारिक संदेश या शिक्षण मिल जाता है। उसके अनुकरण की प्रेरणा खेल-खेल में नहीं उत्सव और उल्लास के माहौल में मिल जाती है। स्कंद पुराण में लिखा है कि धर्म का आधार लेकर भी जो धन कमाते हैं, उसका दसवां हिस्सा पुण्य-परमार्थ व ईश्वरीय कार्य में लगाया जाए, तो ही शुद्ध होता है। कई लोग अपनी सुख-सुविधाओं और बच्चों के लिए लाखों रुपये व्यय करते हैं, परंतु धन का त्याग धर्म कार्य हेतु नहीं करते हैं। उनका वही धन दुर्घटना या रोग में स्वत: ही सूद के साथ व्यय हो जाता है। साधना का अर्थ है- तन, मन और धन का त्याग। कहने पर लोग तुरंत कह देते हैं कि तन और मन से क्या कर सकते हैं? जो व्यक्ति स्थूल धन का त्याग नहीं कर सकता, जो ईश्वर प्रदत्त है, वह सूक्ष्म मन, बुद्धि और अहंभाव का क्या त्याग करेंगे।
 

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