जिस व्रत के करने से पूरी होती है मोक्ष की मनोकामना

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पापहारिणी एकादशी तिथि के बारे में कौन नहीं जानता है। जैसा कि आप जानते हैं कि तिथियों को पांच भागों में बांटा गया है। उसमें एकादशी को नंदा अर्थात आनंद देने वाली तिथि होने का गौरव प्राप्त है। एकादशी तिथि को सभी तिथियों में श्रेष्ठ माना जाता है। इसे हरिवासर भी कहते हैं। इस तिथि को नारायण का दिवस कहा जाता है। ऐसे में जब नारायण प्रधान देव हैं तो उनकी तिथि को प्रधान तिथि मानना स्वाभाविक है। कार्तिक मास में दीपावली से पहले पडऩे वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। जो कि भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी के नाम पर है। जिन्हें रमा भी कहते हैं। इस पावन एकादशी के बारे में मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने वाले पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और वह सभी पापों से मुक्त होते हुए अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। एकादशी का व्रत करने के लिए हमारे ऋषियों ने पांच ज्ञानेंद्रियां, पांच कर्मेंद्रियां और एक मन, इन ग्यारह को नियंत्रण में रखकर, ईश्वर स्मरण करते हुए एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस उपवास को करने वाले व्यक्ति को प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और तुलसी जी की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए।
 

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