मैं पदक के लिये नहीं, टाइमिंग के लिए दौड़ती हूं : हिमा दास

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नई दिल्ली
विश्व स्तर की प्रतियोगिता में ट्रैक स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने पहली भारतीय महिला एथलीट हिमा दास जब ट्रैक पर उतरती हैं तो उनका लक्ष्य पदक नहीं बल्कि अपनी 'टाइमिंग' में सुधार करना होता है। फिनलैंड के तम्पारे में आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर में सोने का तमगा जीतने वाली 18 वर्षीय हिमा ने जकार्ता एशियाई खेलों में महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर में स्वर्ण तथा 400 मीटर की व्यक्तिगत स्पर्धा और मिश्रित चार गुणा 400 मीटर में रजत पदक जीते। दिलचस्प बात यह है कि छह महीने पहले तक यह उनकी मुख्य स्पर्धा नहीं थी। इस साल के अपने शानदार प्रदर्शन के लिये अर्जुन पुरस्कार पाने वाली हिमा 400 मीटर को अब अपनी मुख्य स्पर्धा मानती हैं जिसमें वह अपने राष्ट्रीय रिकार्ड में निरंतर सुधार करना चाहती हैं। हिमा ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में अर्जुन पुरस्कार हासिल करने के बाद 'भाषा' से कहा, 'मेरा लक्ष्य अपने समय में लगातार सुधार करना है। मैं टाइमिंग के लिये दौड़ती हूं, पदक के लिये नहीं। उन्होंने दार्शनिक अंदाज में कहा, 'अगर मेरी टाइमिंग बेहतर होगी तो पदक मुझे खुद ही मिल जाएगा। मैं खुद पर पदक का दबाव नहीं बनाती। इसलिए मेरा लक्ष्य पदक नहीं पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करना होता है।असम की इस एथलीट ने फिनलैंड में 51.46 सेकेंड का समय निकाला था लेकिन जकार्ता एशियाई खेलों में वह 400 मीटर में दो बार राष्ट्रीय रिकार्ड तोडऩे में सफल रही। उन्होंने हीट में 51.00 सेकेंड का समय निकालकर मनजीत कौर (51.05) का 14 साल पुराना रिकार्ड तोड़ा और फिर मुख्य दौड़ में 50.79 सेकेंड के साथ अपने रिकार्ड में सुधार किया। हिमा ने कहा, 'मुझे रजत पदक मिला लेकिन मैंने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। इसलिए मैं निराश नहीं थी। उन्होंने कहा, 'मैंने छह महीने पहले ही प्रतियोगिताओं में 400 मीटर में दौडऩा शुरू किया था लेकिन मैं काफी पहले से इसमें अभ्यास कर रही थी। हिमा को उम्मीद नहीं थी कि उन्हें इतनी कम उम्र में अर्जुन पुरस्कार मिल जाएगा। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं। जब आपके प्रदर्शन को मान्यता मिलती है तो अच्छा लगता है। मैं बहुत खुश हूं। उम्मीद नहीं थी कि मुझे इतनी कम उम्र में यह पुरस्कार मिल जाएगा।

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