रमाकांत आचरेकर की अंतिम यात्रा में उमड़ा हुजूम, सचिन तेंदुलकर और राज ठाकरे हुए शामिल

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मुंबई
भारतीय क्रिकेट को सचिन तेंदुलकर जैसा नायाब सितारा देने वाले कोच रमाकांत आचरेकर का बुधवार शाम मुंबई में उनके आवास पर निधन हो गया। वो 87 वर्ष के थे। शिवाजी पार्क में पिछले पांच दशक से युवा खिलाडिय़ों को क्रिकेट का ककहरा सिखाने वाले गुरु आचरेकर को अंतिम विदाई देने पूरा क्रिकेट जगत उमड़ पड़ा। उनकी अंतिम यात्रा में शरीक होने वालों में उनके सबसे प्रिय शिष्य सचिन तेंदुलकर के साथ-साथ राज ठाकरे जैसी राजनीतिक शख्सियत भी शामिल थी। मुंबई क्रिकेट सर्किट के इस जाने माने कोच के अंतिम दर्शन के लिए मुंबई का पूरा क्रिकेट जगत उमड़ पड़ा। आचरेकर के पार्थिव शरीर को शिवाजी पार्क में रखा गया था जहां वह युवा क्रिकेटरों को कोचिंग देते थे। इसी मैदान पर आचरेकर सालों से बच्चों को क्रिकेट की बारीकियां सिखाते रहे। उन्हें शिवाजी पार्क मैदान पर बच्चों ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी। जब आचरेकर के शरीर को मैदान से बाहर ले जाया गया जो वहां अभ्यास करने वाले युवा बच्चों ने इस कोच के सम्मान में 'अमर रहे' के नारे लगाए। इसके बाद समीप के शमशान गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सचिन तेंदुलकर ने अन्य पूर्व खिलाडिय़ों के साथ आचरेकर सर की अर्थी को कांधा दिया। रमाकांत आचरेकर के पार्थिव शरीर के साथ उनकी वो बैगी कैप भी दिखाई दे रही थी जो उनकी पहचान थी। आचरेकर सर के दामाद ने उन्हें मुखाग्नि दी। 2013 में आचरेकर के बीमार होने के बाद बेटी कल्पना और दामाद दीपक मुरकर उनकी क्रिकेट अकादमी को संभालते हैं। तेंदुलकर के अलावा विनोद कांबली, बलविंदर सिंह संधू और चंद्रकांत पंडित जैसे आचरेकर के अन्य शिष्यों ने भी शवयात्रा में हिस्सा लिया। इससे पहले आचरेकर के पार्थिव शरीर को उनके निवास पर भी रखा गया जिससे कि लोग द्रोणाचार्य और पद्म श्री पुरस्कार विजेता इस कोच के अंतिम दर्शन कर सकें। अतुल रानाडे, अमोल मजूमदार, रमेश पोवार, पारस म्हाम्ब्रे, रणजी कोच विनायक सावंत, नीलेश कुलकर्णी और विनोद राघवन जैसे मुंबई के क्रिकेटर आचरेकर के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। राजस्थान के पूर्व कोच प्रदीप सुंदरम, मुंबई क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों और अनुभवी क्रिकेट प्रशासक रत्नाकर शेट्टी भी आचरेकर को विदाई देने पहुंचे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे, विधायक और भाजपा नेता आशीष सेलार, मेयर विश्वनाथ महादेश्वर ने भी इस प्रतिष्ठित कोच को श्रद्धांजलि दी।

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