जिंक फुटबाल के रूप में भारत को मिला पहला प्रौद्योगिकी आधारित ग्रासरूट फुटबाल प्रोग्राम

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उदयपुर
इस विश्वास के साथ कि सही समय पर प्रौद्योगिकी के दखल और डेटा संचालित विश्लेषण के इस्तेमाल से देश में जमीनी स्तर पर फुटबाल के विकास को एक नई दिशा दी जा सकती है और भारतीय फुटबाल के समग्र विकास में योगदान दिया जा सकता है, वेदांता ग्रुप की कम्पनी-हिंदुस्तान जिंक ने शुक्रवार को अपने सामाजिक निवेश कार्यक्रमों और पहलों को मूर्त रूप देने के लिए जिंक फुटबाल के रूप में एक विशाल ग्रासरूट प्रोग्राम की घोषणा की। जिंक फुटबाल अपने तरह का पहला ग्रासरूट फुटबाल विकास पहल है, जिसके केंद्र में उदयपुर के पास जावर में स्थित सभी सुविधाओं से लैस पूर्ण आवासीय अकादमी है। यह अकादमी विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस है। इसके अलावा यहां देश में पहली बार अद्वीतीय एफ.क्यूब तकनीक की मदद से तकनीक आधारित फुटबाल ट्रेनिंग का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा जिंक फुटबाल ने समूचे राजस्थान में जिंक फुटबाल स्कूल्स के नाम से 64 सामुदायिक फुटबाल केंद्र भी शुरू करने का फैसला किया है, जिनमें 2000 जुनूनी लड़के और लड़कियों को कुशल फुटबाल ट्रेनर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। जिंक फुटबाल के इस पहल का लक्ष्य भारत में फुटबाल के विकास में योगदान देना है और साथ ही साथ दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल का इस्तेमाल एक साधन के रूप में करते हुए ब'चों, लोगों और समुदायों का सामाजिक उत्थान करना है। जिंक फुटबाल अकादमी के पहले बैच के लिए 30 बेहद प्रतिभाशाली लड़कों का चयन कर लिया गया है। ये लड़के अंडर-14 वर्ग के हैं। इनका चयन बीते एक साल में आय़ोजित विभिन्न प्रतिभा खोज कार्यक्रमों के माध्यम से किया गया है, जिनमें 4500 से अधिक ब'चों ने हिस्सा लिया। कम्पनी इस ब'चों को एक पेशेवर फुटबाल खिलाड़ी बनने की दिशा में सभी प्रकार की मदद और उचित मार्गदर्शन देगी और साथ ही साथ इनकी औपचारिक शिक्षा का भी ध्यान रखेगी। जिंक अकादमी के लांच के अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा, हमारा सपना दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल की मदद से राजस्थान में लोगोंए खासकर युवाओं के जीवन को बदलना है। हमारा यह सपना जिंक फुटबाल के रूप में आकार ले चुका है। इस अकादमी के लांच के साथ हम राजस्थान में जमीनी स्तर पर प्रतिभा की तलाश को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हमारा सपना न सिर्फ राजस्थान को एक बार फिर भारतीय फुटबाल के मानचित्र पर स्थापित करना है बल्कि भारतीय फुटबाल को नई ऊंचाईयों पर ले जाना है। वेदांता फुटबाल के अध्यक्ष अनन्या अग्रवाल ने कहा,  एक समूह के तौर पर वेदांता देश में ग्रासरूट फुटबाल के विकास में मदद के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में काम करते हुए समूह ने इस खेल के विकास में मदद करने के लक्ष्य के साथ मूलभूत सुविधाएं तैयार करने हेतु कई पहल किए हैं। हमारा लक्ष्य भारत को वैश्विक फुटबाल मानचित्र पर स्थापित करना है। हम अगले पांच सालों में भारत को एशिया की शीर्ष-10 और दुनिया की शीर्ष-50 टीमों में देखना चाहते हैं। अनन्या ने आगे कहा, एक जुनूनी फुटबाल प्रशंसक होने के नाते जिंक फुटबाल के विजन को सकारात्मक और प्रभावशाली रूप में विकसित होते हुए देखकर मैं काफी उत्साहित हूं। जावर में स्थापित विश्व स्तरीय आवासीय फुटबाल अकादमी और राजस्थान भर में फैले 64 जिंक फुटबाल स्कूल्स देश में फुटबाल के स्तर को बढ़ाने की दिशा में मददगार होंगे और साथ ही साथ उन क्षेत्रों में हजारों लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालेंगे, जहां हमारी कम्पनी काम करती। जि़ंक फुटबाल ने अपना अधिकारिक लोगो भी लाँच किया। इस लोगो में राजस्थान और फुटबाल के लिए जारी इस पहल के रंग उकेरे गए हैं। इसमें नीले और पीले रंग का उपयोग हुआ है और साथ ही फुटबाल से जुड़े उन तमाम तत्वों को शामिल किया गया है जो जि़ंक फुटबाल हासिल करना चाहता है। एफ-क्यूब ट्रेनिंग एंड एसेसमेंट टेक्नोलाजी (एफ-क्यूब प्रशिक्षण और आकलन प्रौद्योगिकी) जिंक फुटबाल अकादमी और जिंक फुटबाल स्कूलों में दी जानी वाली ट्रेनिंग के केंद्र में है। इस तकनीक के माध्यम से अकादमी और स्कूलों में ट्रेनिंग ले रहे ब'चों के विकास सम्बंधी पैरामीटर्स पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा डेटा टैकिंग सिस्टम के माध्यम से योग्य ट्रेनर्स खिलाडिय़ों के विकास का निरंतर मूल्यांकन करेंगे। एफ-क्यूब फुटबाल और फिटनेस प्रशिक्षण, कौशल मूल्यांकन, संज्ञानात्मक विकास, अभ्यास और कौशल, पोषण, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और मानसिक विकास जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर काम करने क लिए दुनिया का पहला स्मार्ट इंटरैक्टिव डिवाइस है। जिंक फुटबाल अकादमी में 3 फीफा क्वालिटी टर्फ हैं। इसके अलावा इसमें टीम डगआउट से युक्त अभ्यास तथा प्रशिक्षण के लिए 7वी7 फुटबाल के लिए उपयुक्त प्राकृतिक घास वाले मैदान हैं। इसके अतिरिक्त यहां एक मल्टी स्पोर्ट काम्पलेक्स हैश् जहां बास्केटबॉलश् वालीबॉलश् बैडमिंटन तथा क्रिकेट जैसे खेल हो सकते हैं। जि़ंक फुटबाल की इस पहल में उ'च स्तरीय कोचिंग पर बल दिया गया है और साथ ही इसके लिए योग्य तथा लाइसेन्सधारी कोचिंग स्टाफ़ की नियुक्ति की गयी है। ये कोच ब'चों की ट्रेनिंग सम्बंधी हर ज़रूरत का पूरा खय़ाल रखने में सक्षम हैं।

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