फ्रांस के इस दिग्गज फुटबॉलर ने कहा, ISL ने ज्यादा प्रगति नहीं की

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नई दिल्ली
एफसी गोवा से अलग हुए आर्सेनल के दिग्गज फुटबॉल रॉबर्ट पिरेस ने गुरुवार को कहा कि पांच साल पहले जिस धूमधाम के साथ इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) की लांचिंग हुई थी उस तरह से उसने उतनी ज्यादा प्रगति नहीं की। 2014 में आइएसएल के सामने आने पर उसके पहले सत्र में पिरेस एफसी गोवा से करार किया था। हालांकि, क्लब के साथ एक साल बिताने के बाद विश्व कप जीतने वाले फ्रांस के इस खिलाड़ी ने संन्यास की घोषणा कर दी। ला लीगा के एंबेसडर पिरेस ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह (पहले से पांचवें सत्र की प्रगति) एक जैसा था, क्योंकि नींव को मजबूत करने के आपको फुटबॉल के अन्य सिद्धांतों के साथ प्रयोग करने की जरूरत होती है। उन्हें एक इटालियन, फ्रेंच, स्पेनिश या पुर्तगाली को अपने साथ जोड़ने की जरूरत है जो अन्य सिद्धांतों को उनसे परिचित कराए और आइएसएल को आगे बढ़ाने में मदद करे।’हालांकि, 44 वर्षीय यह फुटबॉलर भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर आशावादी नजर आए। पिरेस ने कहा, ‘मैं पहले सत्र में खेला था और वहां खिलाड़ियों के अंदर काफी जोश था। मैंने वहां कुछ प्रतिभाशाली भारतीय खिलाड़ी देखे। भारत का भविष्य अच्छा है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ने के लिए अच्छी अकादमी, कोचिंग और अभ्यास की जरूरत है। इन तीनों के मिश्रण से एक दिन कोई भारतीय खिलाड़ी ला लीगा में खेल सकता है और यह फुटबॉल के विकास की प्रगति के लिए बहुत जरूरी है। ला लीगा की टीम गिरोना एफसी और ऑस्ट्रेलियाई ए-लीग मेलबर्न एफसी ने जुलाई में अपने पूर्व-सत्र दोस्ताना मुकाबले केरल ब्लास्टर्स के साथ खेले थे। पिरेस ने इन मैचों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के मैच भारतीय क्लबों को आगे ले जाने में मदद करेंगे। आइएसएल में कोचिंग देने के बारे में पूछे जाने पर पिरेस ने भारत लौटने से इन्कार नहीं किया। उन्होंने कहा कि मेरे लिए एफसी गोवा के लिए खेलना शानदार अनुभव रहा

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