पुरुषों की 800 मीटर रेस में भारत को दो पदक, मनजीत ने गोल्ड और जॉनसन ने सिल्वर जीता

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जकार्ता
18वें एशियाई खेलों के 10वें दिन मनजीत सिंह ने भारत को 9वां स्वर्ण पदक दिलाया। उन्होंने1:46.15 मिनट में 800 मीटर की रेस पूरी की। इस स्पर्धा का रजत पदक भी भारत के खाते में आया। भारत के जिनसन जॉनसन ने 1:46.35 मिनट का समय निकालकर यह उपलब्धि अपने नाम की। कतर के अबु बाकर अब्दुल्ला 1:46.38 मिनट के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें कांस्य पदक मिला। मनजीत आखिरी 200 मीटर में 5वें स्थान पर चल रहे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और जॉनसन तथा अबु को पछाड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत ने 18वें एशियाई खेलों के 10वें दिन महिला और पुरुष तीरंदाजी की कम्पाउंड स्पर्धा में 2 रजत पदक जीते। महिला टीम को कोरिया ने 231-228 से हराया। वहीं, पुरुष स्पर्धा के फाइनल का फैसला शूटआउट में हुआ। दोनों स्पर्धाओं के स्वर्ण पदक कोरिया के खाते में गए। एशियाड में महिला टीम ने पहली बार रजत पदक जीता। इससे पहले 2010 ग्वांगझू में भारत ने महिला टीम रिकर्व स्पर्धा का कांस्य पदक जीता था। एशियाड में अब तक भारत के 45 पदक हो गए हैं। भारतीय महिला टीम ने कम्पाउंड स्पर्धा में  शुरुआत बेहतर की। पहले राउंड में 59 का स्कोर किया। कोरियाई तीरंदाज 57 अंक ही ले पाए। हालांकि, दूसरे राउंड में कोरिया की टीम हावी रही और 58-56 से इसे अपने नाम किया। तीसरे राउंड में दोनों टीमों ने 58-58 का स्कोर किया। इस समय तक लग रहा था कि भारत स्वर्ण पदक जीत सकता है, लेकिन फाइनल राउंड में भारतीय टीम अपनी लय बरकरार नहीं रख पाई और टीम को 55 अंक ही मिले। कोरियाई तीरंदाजों ने 58 का स्कोर कर स्वर्ण पदक जीत लिया। पुरुष कम्पाउंड टीम के फाइनल में 4 सेट के बाद भारत और कोरिया का स्कोर 229-229 था। भारत ने शूटऑफ में भी विरोधी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन कोरियाई टीम के तीर सेंटर सर्कल में ज्यादा थे। इस कारण दक्षिण कोरिया स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रहा। शूटऑफ में भी बराबर रहे अंक :शूटऑफ में पहले निशाने में कोरिया ने 10 और भारत ने 9 अंक हासिल किए। दूसरे में भारत ने 10 जबकि कोरिया को 9 अंक मिले। तीसरे निशाने में भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ने 10-10 अंक लिए। इस तरह शूटऑफ में भी दोनों टीमों का स्कोर बराबर रहा, लेकिन दक्षिण कोरिया के तीर सेंटर सर्कल में ज्यादा निकले। इस वजह से भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

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