अधिकारियों का स्थानांतरण कर सकते थे लेकिन लीपापोती नहीं करना चाहते थे: राठौड़

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नई दिल्ली
खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि सरकार ने खेल विभाग के अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपी है क्योंकि उन्हें स्थानांतरित करने से वास्तविक समस्या का हल नहीं होता। सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में गुरुवार को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के निदेशक सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने साई के निदेशक एस के शर्मा, कनिष्ठ लेखा अधिकारी हरिंदर प्रसाद, सुपरवाइजर ललित जॉली और यूडीसी वी के शर्मा को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा निजी ठेकेदार मंदीप आहूजा और उनके कर्मचारी यूनुस को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि 19 लाख रूपये का बिल लंबित था और इसे मंजूरी प्रदान करने के लिए साई अधिकारी तीन प्रतिशत राशि की मांग कर रहे थे। राठौड़ ने ट्वीट किया, '' कुछ महीने पहले, हमें जानकारी मिली कि खेल विभाग के कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। हम उन्हें स्थानांतरित कर सकते थे लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं होता सिर्फ लीपापोती होती। खेल मंत्री ने कहा कि जांच एजेंसी को जांच सौंपी गई क्योंकि लोगों को उम्मीद है कि सरकार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, '' लोगों को हमारी सरकार से कार्रवाई की उम्मीद है, हमने एजेंसियों को जांच का जिम्मा सौंपा। कुछ महीनों की जांच के बाद, गुरुवार को उन्होंने साई पर छापा मारा और कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। राठौड़ ने कहा, '' हम उम्मीद करते हैं कि एजेंसी (सीबीआई) जांच को सही निष्कर्ष पर ले जाएगी और हमारा प्रयास खेल में मौजूद किसी भी भ्रष्टाचार को खत्म करना है। हम खेल को हर तरह के भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते हैं। हम अपने सिस्टम को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सीबीआई के अधिकारी शाम में करीब पांच बजे जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम स्थित साई मुख्यालय पहुंचे और पूरे परिसर को सील कर दिया। यह पता चला कि साई महानिदेशक नीलम कपूर ने सीबीआई के समक्ष यह मामला उठाया था। उसके बाद एजेंसी ने छापे मारे। उन्होंने कहा कि साई महानिदेशक के समक्ष यह मामला छह महीने पहले आया जिसके बाद उन्होंने खेल मंत्री को इसकी जानकारी दी। मंत्री के कहने पर महानिदेशक ने सीबीआई को पत्र लिखा।

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