समाज मे नशा मुक्ति व कुरीति समाप्त करने पर जोर

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भरतपुर
भरतपुर जिला खण्डेलवाल वैश्य समाज के तत्वाधान मे जिला खण्डेलवाल वैश्य युवा महासम्मेलन रमेशचंद खण्डेलवाल फरीदाबाद वालो के मुख्य आतिथ्य मे सम्पन्न हुआ। समारोह मे रमेश बडाया अध्यक्ष के रूप में, हुकमचंद खण्डेलवाल बैंक वाले अति विशिष्ट अतिथि के रूप मे उपस्थित रहे जबकि पूरा कार्यक्रम शिवलाल खण्डेलवाल कार्यकारी अध्यक्ष वात्सल्य ग्राम के सानिध्य मे सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ करते हुए सीताराम गुप्ता अधिशाषी अधिकारी लुपिन ने समाज एवं राष्ट्र का विकास करने के लिए युवा शक्ति का महत्व बताया जबकि अन्य वक्ताओं ने टूटते परिवार, नशा मुक्ति, सामाजिक संस्कार एवं वृद्धजनों के सम्मान को परिवार मे कैसे बनाया जा सकता है जिस पर विस्तार से चर्चा हुई जिसमे इन कुरीतियों के कारण एवं निराकरण सुझाये गये तथा महासभा से अनुरोध किया गया कि पूरे देश मे नशा मुक्ति का अभियान चलाया जाये। कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा संत सुन्दरदास जी की प्रतिमा पर हार व वन्दना कर किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ मे मनमोहन अभिलाषी द्वारा काव्य पाठ से सम्मेलन मे आये सभी अतिथियो व समाज बन्धुओ का स्वागत किया गया। कार्यक्रम मे रोहित खण्डेलवाल व गोविन्द गुप्ता द्वारा व्यवस्थाए सुचारू रूप से बनायी रखी गयी। जिसका धन्यवाद नैमचंद ट्रस्ट अध्यक्ष द्वारा किया गया। नैमचंद खण्डेलवाल ट्रस्ट अध्यक्ष द्वारा मंच क परिचय कराया गया जबकि सतीश तमोलिया पूर्व जिलाध्यक्ष द्वारा सभी का अभार व्यक्त किया गया तथा ओमप्रकाश खण्डेलवाल जिलाध्यक्ष द्वारा अतिथियों का स्वागत, भाषण एवं सम्मेलन के आयोजन पर प्रकाश डाला गया। सर्वसम्मति से नशा मुक्ति का वचन लिया गया। कार्यक्रम में सुनील तमोलिया, गिरधारी, ओमनारायण, विजय पटवारी, कैलाश लोहिया, सुभाष बम्ब, विपुल, गिरधारी, संजीव एडवोकेट, अनिल, ललिता तमोलिया, लता खण्डेलवाल, सरोज लोहिया, बृजलता गांधी, विनोद बिहारी, श्याम तमोलिया, दिनेश जुरहरा, मुरारीलाल गुप्ता, नवतेज तमोलिया, जिला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामजीलाल खण्डेलवाल, उपाध्यक्ष रामदयाल खण्डेलवाल, दिनेश विपुल, राकेश खण्डेलवाल, महेश नाटानी कोषाध्यक्ष, उमेश पाटौदिया, अनिल खण्डेलवाल, मुरारीलाल संयुक्त मंत्री, संजय गांधी, अनिल, अतुल, खेमराज आदि सदस्य काफी संख्या मे उपस्थित रहे। व जिले के लगभग 1000 से अधिक महिला पुरूषो ने कार्यक्रम मे अपनी उपस्थिति दी। सम्मेलन मे समाज की महिलाओ द्वारा भी समाज मे महिलाओ की वर्तमान स्थिति व स्थिति को कैसे सुधारा जावे इन बिन्दुओ पर भी प्रकाश डाला गया। जिसमे उनके द्वारा समाज के पुरूष वर्ग से समाज मे सभी प्रकार के नशे पर पूर्ण प्रतिबंध लगे व महिलाओ को समाज मे बराबर भागीदारी करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। सम्मेलन मे सभी ईकाईयो से उपस्थित अध्यक्ष व मंत्रियो का सम्मान किया गया। सम्मेलन मे विवाह शादियो पर सडक पर डांस, मदिरा पान, दहेज, विवाह उपरान्त दिये जाने वाले त्योहारो पर रोक आदि समाज की ज्वलंत समस्याओ का विस्तार से विचार विर्मश किया गया। एवं समाज के विभिन्न कारणो से परिवारो के टूटने, परिवारों व समाज मे वृद्धजनों के सम्मान मे आई कमी, परिवारों में संस्कारों व सामाजिकता में कमी जैसी समाज की ज्वलंत समस्याओ पर भी सभी उपस्थिति लोगो ने अपने विचारो को विस्तार से व्यक्त किया। एवं युवा वर्ग से समाज मे इन कमियो को दूर करने का आहवान किया गया साथ ही कमियां कैसे दूर की जा सके इस प्रकार की बातो पर भी विशेष प्रकाश डाला गया। एवं समाज के बुद्धिजीवियो द्वारा समाज व देश की मातृशक्ति से इन बुराईयो को समाज से दूर करने का आहवान किया गया क्योकि सर्वप्रथम यह कार्य उपस्थित प्रत्येक सदस्य के घर से प्रारम्भ होने का आहवान किया गया। जिससे धीरे धीरे समाज मे परिवर्तन आवे। साथ ही समाज मे मातृशक्ति को समान अधिकार के साथ उन्हे देश मे कैसे आगे बढाया जावे उप पर जोर दिया गया। क्योकि देश व समाज का विकास की नीव मे मातृशक्ति का विशेष योगदान आदिकाल से रहा है अत: वर्तमान मे भी मातृशक्ति की महत्तवता को मानते हुए उन्ही से आहवान किया गया। इसी ओर समाज की कुछ बुद्धिजीवी महिलाओ द्वारा सभी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत किये गये एवं नारीयो की स्थिति को किस प्रकार सुदृष्ढ बनाया जा सकता है। इस पर भी प्रकाश डाला गया। जिसमे मेधा खण्डेलवाल द्वारा महिलाओ को किस प्रकार समाज मे अपना महत्व बनाने पर प्रकाश डाला गया। उनके द्वारा समाज मे व्याप्त कुरूतियो द्वारा महिलाओ को आने वाली समस्याओ पर प्रकाश डाला गया। एवं अन्य विभिन्न महिलाओ ने भी नशाए दहेजए आदि समस्याओ के साथ परिवार मे किस प्रकार बच्चो को संस्कार दिये जावे इस पर भी प्रकाश डाला। साथ ही समाज मे परिवारो को किस प्रकार एक सूत्र मे बान्धकर उन्हे टूटने से बचाया जावे इन पहलुओ पर भी प्रकाश डाल विस्तृत चर्चा व सभी के द्वारा अपने मत व विचारधाराए प्रस्तुत की गयी। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि परिवार मे वृद्धजनो का किस प्रकार आदर सत्कार किया जावे जिससे घर मे भगवान का वास होवे।