सादुलपुर बाईपास लाईन के कार्य का हुआ शिलान्यास

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चूरू
राजेन गोहांईं (रेल राज्यमंत्री) भारत सरकार के द्वारा रविवार को सीकर-श्रीगंगानगर- सीकर त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस नई रेलसेवा के संचालन का शुभारम्भ तथा सादुलपुर-हनुमानगढ़ व सादुलपुर- रतनगढ़-सरदारशहर-बीकानेर रेलखण्ड के विद्युतीकरण के कार्य एवं सादुलपुर बाईपास लाईन के कार्य का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर राजेन गोहांई, माननीय रेल राज्यश्व मंत्री, भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान में पूरे देश में रेलवे के बहुत सारे प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं तथा विगत पाँच वर्षों में रेलवे में काफी बदलाव आया है। रेलवे पर स्वच्छता, यात्री सुविधाओं, आरओबी एवं आरयूबी के अनेक कार्य पूरे किए गए हैं तथा विभिन्न स्थानों के लिए अनेक ट्रेनें चलाई गई हैं। रेलवे का प्रयास है कि लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान की जाएं क्योंकि हमने देखा है कि ट्रेन के चलने से लोगों में बहुत उत्सालह रहता है और रेलवे लोगों की जीवन रेखा बनी हुई है। उन्होंने सभी जन प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राहुल कस्वांस, माननीय सांसद चूरू ने कहा कि चूरू एवं आसपास के क्षेत्र विगत वर्षों में ब्रॉडगेज से जुड चुकें है तथा इस क्षेत्र में अब विद्युतीकरण का कार्य किया जा रहा है। इससे देश में रेल कनेक्टिविटी की सुविधा बढ़ेगी। विगत समय में चूरू क्षेत्र में 15 नई ट्रेनों की शुरुआत की गई तथा कुछ अन्या ट्रेनें भी शीघ्र ही शुरू की जाएंगी। रींगस-जयपुर के ब्रॉडगेज का कार्य पूरा होने पर जयपुर के लिए सीधी ट्रेनें शुरू की जाएंगी। इसके अतिरिक्त रेल राज्य मंत्री से ट्रेनों के ठहराव व अन्य स्थानीय मागों को पूर्ण करने की मांग की। सुमेधानन्दर सरस्वती, सांसद सीकर ने रेल राज्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विगत समय में रेलवे पर बहुत से कार्य हुए हैं और इनकी गति इसी प्रकार बनी रहेगी। कृष्णा पूनिया (विधायक, सादुलपुर) ने मंत्री का स्वागत किया तथा सादुलपुर स्टेशन से संबंधित समस्या ओं के निराकरण तथा ट्रेनों के ठहराव की मांग की। 

रेलखण्ड के विद्युतीकरण की विशेषताएं
सादुलपुर-हनुमानगढ़ खण्डी के 179 किमी क्षेत्र का विद्युतीकरण का लक्ष्य सितंबर 2020 रखा गया है। इसकी कुल लागत 161 करोड़ रुपये है। सादुलपुर- रतनगढ-सरदारशहर-बीकानेर रेलखण्डह के 286 रूट किमी विद्युतीकरण का लक्ष्य 6 सितंबर 2020 रखा गया है। इसकी कुल लागत 236 करोड़ रुपये है। डीजल की तुलना में बिजली से चलने वाली ट्रेनों के काफी लाभ है। दिल्ली से बीकानेर बिना इंजिन बदले गाडिय़ों का संचालन संभव होगा। गति तेज व पर्यावरण अनुकूल उपनगरीय सेवाएं मिलेंगी। पेट्रोलियम आधारित ईंधन पर निर्भरता कम होगी। माल व यात्री लागत कम होगी। बिजली लोको  की औसत हॉर्स पॉवर अधिक होने के कारण बिजली की खपत कम होने से पूंजी की आवश्यकता, परिचालन व मरम्मत लागत कम होगी। विद्युत ट्रैक्श न रिजेनेरेटिव ब्रेकिंग से ब्रेक लगाने के दौरान विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होगा।