विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति की लिखित अनुमति के बिना नही होंगे विज्ञापन जारी

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धौलपुर
लोकसभा आम चुनाव 2019 के मद्देनजर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं केबल चैनल में प्रसारित होने वाले राजनैतिक विज्ञापनों के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग व सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन प्रभावी है। जिला निर्वाचन अधिकारी नेहा गिरि ने बताया कि विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति द्वारा अधिप्रमाणित करने पर ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं केबल चैनल के माध्यम से ऐसे विज्ञापन प्रसारित किए जा सकेंगे। समिति के अधिप्रमाणन के बिना कोई विज्ञापन फोन, एसएमएस, रिंगटोन अथवा कॉलर टोन की श्रेणी में भी जारी नही किया जायेगा। अगकर कोई करता है तो उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में शामिल होगा और इस प्रकार से प्रसारित विज्ञापनों के विरूद्व सम्बंधित कानून के अन्तर्गत कार्रवाई की जायेगी। उन्होने बताया कि केबल टेलीविजन (रेगुलेशन) एक्ट, 1955 के सेक्शन 6 के अनुसार कोई भी केबल चैनल व केबल संचालक विज्ञापन कोड के विरूद्व विज्ञापन प्रसारित या पुनर्प्रसारित नही कर सकता। इसका उल्लंघन करने पर उपखण्ड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट को केबल उपकरण, कार्यालय, ट्रांसमिशन लाइन सीज करने का अधिकार है। चुनाव आयोग में पंजीकृत राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय राजनीतिक दल एवं अभ्यर्थी को प्रसारण से कम से कम तीन दिवस पूर्व तथा अपंजीकृत राजनीतिक दल या अन्य व्यक्ति को कम से कम 7 दिन पूर्व विज्ञापन अधिप्रमाणन समिति (एमसीएमसी) को आवेदन करना होगा। आवेदन पत्रा के साथ 2 इलेक्ट्रॉनिक कॉपी तथा एक लिखित संवाद कॉपी में विज्ञापन जमा करवाना है। इस आवेदन प्राप्ति के 48 घंटे के भीतर समिति को निस्तारण करना होगा। समिति इस विज्ञापन के किसी भी हिस्से को हटाने या परिवर्तित करने के निर्देश दे सकती है। ऐसा होने पर आवेदक को इस विज्ञापन को परिवर्तित कर समिति को पुन: प्रस्तुत करना होगा। इस आवेदन में विज्ञापन बनाने का खर्चा, विज्ञापन प्रसार का खर्चा भी दर्शाना होगा। यदि राजनीतिक दल या अभ्यर्थी के अतिरिक्त कोई अन्य आवेदन करता है तो उसे शपथ-पत्रा देना होगा कि इस विज्ञापन से किसी राजनीतिक दल या अभ्यर्थी को लाभ नही होगा, इसका भुगतान वह स्वयं कर रहा है, न कि कोई राजनीतिक दल या अभ्यर्थी। इस आवेदन के साथ यह भी उल्लेख होगा कि सारा भुगतान चैक या डिमाण्ड ड्राफ्ट के माध्यम से किया जायेगा।