महाविद्यालय में मनाया संविधान दिवस

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धौलपुर
राजकीय महाविद्यालय में युवा विकास केन्द्र के तत्वावधान में संविधान दिवस पर एक व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में अधिवक्ता रामकुमार शर्मा ने बताया संविधान की संरचना हेतु एक संविधानसभा का गठन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में किया गया। प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर रहे। 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र की स्थापना हुई। कोई कानून गजट नोटिफि केशन से लागू किया जाता है। उन्होंने बाल अपराधों से सम्बन्धित कानूनों के परिप्रेक्ष्य में भूतलक्षी प्रभाव वाले कानूनों के बारे में विस्तृत चर्चा की। 26 नवम्बर 1949 को संविधान की रचना पूर्ण हुई। हमारे संविधान का निर्माण विभिन्न देशों के संविधानों से लेकर किया गया है। देश के संचालन का दायित्व आज के युवाओं पर है। विद्यार्थियों को विषयकृत ज्ञान नहीं प्राप्त करना बल्कि गुणवत्ता पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। कानून का निर्माण विधायिका द्वारा ,लागू करना कार्यपालिका द्वारा रक्षा न्यायपालिका द्वारा किया जाता है। संविधान लिखित है और सर्वोच्च है तथा विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। मौलिक अधिकार संविधान द्वारा प्राप्त है। 18 वर्ष के व्यक्ति को मताधिकार प्राप्त है। संविधान में संशगोधन विधायिका द्वारा किया जाता है। लेकिन इससे संविधान की आत्मा के साथ छेड़छाड़ न हो। राजनीति शास्त्र विभाग की अध्यक्षा श्रीमती नीलिमा सक्सेना ने संविधान के अन्तर्गत मौलिक अधिकारों के विषय में विस्तार से बताया। न्यायपालिका इन मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु वचनबद्ध है। छात्रसंघ महासचिव सूरज कुशवाह ने संविधान दिवस पर बताया कि इस संविधान के निर्माण में 2 वर्ष 11 मास तथा 18 दिन लगे तथा यह पूर्णत: हस्तलिखित है। इसका निर्माण प्रारूप समिति के द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर बी.के.कुलश्रेष्ठ ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में युवाओं को प्रेरित किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें तथा कैसे ज्ञान प्राप्त करें तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुज कुमार ने किया तथा युवा विकास केन्द्र की संयोजिका डॉ. रचना मेहता ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में युवा कौशल प्रकोष्ठ समन्वयक डॉ. एस.के. जैन तथा महाविद्यालय स्टाफ एवं छात्रसंघ पदाधिकारी गण व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।