पुलिस और बजरी माफियाओ के बीच मुठभेड़

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धौलपुर
जिले में बजरी माफियाओ के हौसले बुलंद। पुलिस और बजरी माफियाओ के बीच हुई मुठभेड़। दोनों तरफ हुई फायरिंग और पथराव। हमले में एक पुलिस कर्मी विनोद पुत्र नत्थीलाल और एक बजरी माफिया कृष्णा पुत्र विशम्भर सिंह हुए घायल। दोनों घायलों को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया हैं। जहां उनका उपचार चल रहा हैं। वही पुलिस ने मौके से चम्बल बजरी से भरे आधा दर्जन वाहनों को जब्त किया और कुछ बजरी माफिया बजरी से भरे वाहन लेकर फरार हो गए। सुबह के पहर बजरी लेकर कुछ माफिया आगरा की ओर जा रहे थे। अवैध चम्बल बजरी से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली एनएच तीन से निकल रहे थे।पुलिस जैसे ही सामने पहुंची तो बजरी माफियाओं ने हथियारों से फायरिंग और पथराव शुरू कर दिया और पुलिसकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। बजरी माफियाओ ने हमला उस समय किया जब पुलिस को एनएच तीन पर अवैध चम्बल बजरी से भरे वाहन निकलने की सूचना मिली।जिस सूचना पर उप पुलिस अधीक्षक सुरेश मीणा के नेतृत्व कई थानों के पुलिस ने गुलाबबाग चौराहे घेराबंदी की तो बजरी माफियाओ ने पुलिस पर पथराव कर फायरिंग कर दी। जिस पर पुलिस ने भी आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग की।पुलिस की दबिश को देख बजरी माफियाओ के हाथ पैर फूल गए और कुछ बजरी माफिया अपने वाहन लेकर फरार हो गए तो कुछ माफिया अपने वाहन मौके पर छोड़ कर फरार हो गए।हमले में एक पुलिस कर्मी विनोद पुत्र नत्थीलाल और एक बजरी माफिया कृष्णा पुत्र विशम्भर सिंह घायल हो गए।दोनों घायलों को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया हैं।जहां उनका उपचार चल रहा हैं।वही पुलिस ने मौके से चम्बल बजरी से भरे आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त किया। फिलहाल पुलिस हमलावर बजरी माफियाओं के खिलाफ धरपकड़ करने में जुटी हुई हैं।सुप्रीम कोर्ट ने बजरी खनन पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में चंबल में बजरी खनन जारी है। इन्हें रोकने के लिए ना तो पुलिस कोई कार्रवाई करती है ना ही बजरी माफियाओं को पुलिस का डर है। चंबल से बजरी की निकासी को लेकर पुलिसकर्मी भी मौन रहते हैं। शहर में दिनदहाड़े बेखौफ बजरी निकालने वाले माफिया के खिलाफ पुलिस द्वारा कार्रवाई ना करना अपने आप में सवालिया निशान लगाता है। वैसे देखा जाए तो बजरी का अवैध खनन सरकार की रजामंदी से ही होता हैं।जब भी चुनाव आते हैं तो एक जाति विशेष के लोगो के वोट लेने के लिए बजरी चालू कर दी जाती हैं। और फिर पुलिस का भी इनको सपोर्ट मिल जाता हैं।इस खेल में नेताओ से लेकर पुलिसकर्मी भी शामिल रहते हैं।धौलपुर में जब उप चुनाव हुआ तो धुंआधार बजरी का खनन हुआ।लेकिन किसी ने इसे रोकने की जहमत तक नहीं उठाई,क्योकि बजरी निकासी के ऊपर से फरमान था और पुलिस भी मौज कर रही थी।सबसे बड़ा सवाल हैं कि सागरपाड़ा पुलिस चौकी, कोतवाली, निहालगंज, सदर और मनियां, सैपऊ और कौलारी पुलिस बजरी खनन को रोकने में नाकाम क्यों हैं।अगर बजरी खनन रुका तो एक पार्टी को वोट नहीं मिलेंगे और वोट की खातिर यह सब चलता हैं क्योकि उप चुनाव में यह सब चला और जब बजरी चालू की तो अब बंद क्यों?