ब्रेकथ्रु तकनीक और भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में सुधार विषय पर कॉन्फ्रेंस का आयोजन

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जयपुर
देश से लेकर दुनिया भर के स्वास्थ्य देखभाल, फार्मास्युटिकल और सम्बद्ध उद्योगो से जुडे लोग आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के जयपुर स्थित कैम्पस में इक्ठ्ठा होने जा रहे है, अवसर है यूनिवर्सिटी के वार्षिक कॉन्फ्रेंस ‘‘प्रदान्य’’ के 23वे संस्करण का आयोजन, जिसमे भविष्य के स्वास्थ्य देखभाल सम्बंधी विजन को प्रस्तुत किया जाएगा और इसके लिए ब्रेकथ्रु तकनीको, सुधारो, आविष्कारो और खोजो के साथ-साथ मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल मॉडल और बेहतरीन प्रैक्टिस आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी। 29 नवम्बर 2018 को शुरू होने वाला यह कार्यक्रम 1 दिसम्बर 2018 तक चलेगा। कार्यक्रम में डॉ. चंद्रकांत लहरिया, तकनीकी ऑफिसर-हेल्थ: केयर, एक्सेस एंड प्रोटेक्शन डब्ल्युएचओ इंडिया, वीपी आईपीई, ग्लोबल लिमिटेड डॉ. गौरव ठुकराल, डॉ. जयेश जानी, मेडिकल डायरेक्टर, एशिया पैसिफिक बोस्टन साइंटिफिक कंसल्टिंग, इग्जेकेटिव वाइस प्रेसिडेंट एवम चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हेल्थकेयर ऐट होम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, डॉ. गौरव ठुकराल, ओय चक्रबोर्ती, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर, मुम्बई, श्री सत्येन चतुर्वेदी, एग्जिक्युटिव डायरेक्टर, राजस्थान वीएचए और श्री दीप भंडारी (एग्जिक्युटिव कोच एवम पूर्व बीयू हेड, यूसीबी इंडिया लिमिटेड) के साथ-साथ कई जाने-माने वक्ता भाग लेंगे। इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस के दौरान ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य देखभाल की समानता सम्बंधी जरूरतों, इसकी चुनौतियों और उससे निबटने के तरीको को भी सामने लाया जाएगा। विविध क्षेत्रो के सन्योजन से स्वास्थ्य देखभाल डिलीवरी मे सुधार, आयुष्मान भारत, ग्रामीण विकास में एसडीजी लागू करने सम्बंधी भारत के अनुभवों, नई दवाओं, टीकों की खोज, अस्पतालों का बदलता कल्चर और स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में हुई नई प्रगति आदि को देखते हुए भारत में बीमारियों के बोझ के मामले में आए बदलावों पर भी चर्चा की जाएगी। इस साल की कॉन्फ्रेंस का थीम है रिइमैजिनिंग हेल्थकेयर यस्टरडेज ड्रीम्स टुमॉरोज रियलिटी। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी, जयपुर के प्रेसिडेंट डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि, ‘‘भारतीय स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में नई तकनीको के आने और वैश्विक स्तर की कार्यशैली अपनाए जाने से काफी सुधार आया है और यहाँ का सिस्टम अब मरीज-सेंट्रिक होने की दिशा में तेजी से आगे बढ रहा है। ये कुछ ऐसे ट्रेंड हैं जो हॉस्पिटल कल्चर को विकसित करेंगे, फार्मास्युटिकल आविष्कारों को बढावा देंगे और हेल्थकेयर एक्सेस को डिजिटलाइज करेंगे। मगर दूसरी ओर ग्रामीण भारत आज भी बेहतरीन स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और संसाधनो से वंचित है। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य है इन विविध और विवादित विषयों पर चर्चा करना जिनपर भारत के स्वास्थ्य का भविष्य टिका हुआ है, साथ ही जागरूकता का प्रयास किया जाएगा और सभी लोगों के सन्योजन से इन समस्याओं को दूर करने के उपाय भी तलाशे जाएंगे। स्वास्थ्य देखभाल सम्बंधी जन मानस पर होने वाला खर्च कुल जीडीपी का 1. 28 प्रतिशत है और जन स्वास्थ्य देखभाल सिस्टम सही ढंग से काम नहीं कर रहे, इलाज पर पॉकेट से अधिक खर्च हो जाने के कारण हर साल 55-60 मिलियन भारतीय गरीब हो जाते हैं। आयुष्मान भारत के जरिए इन चुनौतियों से उबरने में मदद मिलेगी और सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग का विकास कुछ हद तक हो सकेगा मगर पूरी सफलता के लिए बचाव के उपायो पर गौर करने और निजी क्षेत्र के सहयोग की भी आवश्यकता है। नई दवाओं की खोज और वैक्सीन के विकास में जागरूकता के प्रसार की आवश्यकता है जिसके बिना बीमारियों के बोझ को कम नहीं किया जा सकता है। सेवा प्रदाताओ को सही टूल्स और मरीजो की प्रतिक्रियाओं की भी जरूरत होती है जो बहु-स्तरीय ट्रीटमेंट प्रोग्राम के माध्यम से सम्भव है और यही वह तरीका है जिससे थेरेपी के परिणामो में सुधार लाया जा सकता है। भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल सिस्टम में रजिस्ट्रेशन, डाटा एनालिसिस और हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए बहुग्राही और एक्सेसिबल डिवाइस की भूमिका सबसे अहम होगी।