'वल्र्ड रिमेम्बरेंस डे' के तहत आयोजित हुए नाटक

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जयपुर
भारत में सड़क दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। मरने वाले इन लोगों में 65 प्रतिशत युवा होते हैं। मंगलवार को जयपुर के रविंद्र मंच पर आयोजित हुए 'यूएन वल्र्ड डे ऑफ रिमेम्बरेंस फॉर रोड ट्रैफिक विक्टिम्स' कार्यक्रम के दौरान ये तथ्य साझा किए गए। जयपुर में सड़क सुरक्षा के लिए कार्यरत मुस्कान संस्थान द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन में एस. वी. पब्लिक स्कूल पार्टनर था। इस दौरान स्कूली बच्चों द्वारा सड़क सुरक्षा से सम्बंधित अनेक प्रस्तुतियां दी गई। 25 स्कूलों के 400 से अधिक बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए दो गीत इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे। कार्यक्रम के आरम्भ में श्रद्धांजलि गीत और अंत में सड़क सुरक्षा गीत पेश किया गया। अन्य प्रस्तुतियों में रोड सेफ्टी एंजेल (टैगोर इंटरनेशनल स्कूल), स्किट (टाबर एनजीओ), क्रिएटिव मैसेज (किंकिनी डांस एकेडमी व एस. वी. पब्लिक स्कूल) और नाटक (एस. वी. पब्लिक स्कूल) शामिल थे। इस अवसर पर दो इंटरेक्टिव सैशन भी आयोजित किए गए। प्रथम सैशन में राकेश जैन (डोनर पैरेंट्स) एवं सुश्री प्रेरणा साहनी (वरिष्ठ पत्रकार) के मध्य इंटरेक्षन हुआ, जबकि द्वितीय सैशन में डॉ. वी. डी. सिन्हा (न्यूरोसर्जन) और अमित शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार) ने चर्चा की। राकेश जैन ने दिल को छूने वाली घटना बताई कि गत वर्ष एक सड़क दुर्घटना में उन्होंने अपना 21 वर्षीय पुत्र 'मनन' खो दिया था। उन्होंने बताया कि जब उनके पुत्र का ब्रेन डेड हुआ तो उन्होंने उसके ऑर्गन डोनेट करने का फैसला किया। डॉ. सिन्हा ने हेलमेट के उपयोग किए जाने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी सड़क दुर्घटना पीडि़त को कभी भी सड़क पर अकेला नहीं छोडऩा चाहिए, बल्कि 108 एम्बुलेंस की मदद से तुरंत निकटतम अस्पताल ले जाना चाहिए। इस अवसर पर सभी दर्शक आश्चर्यचकित रह गये जब श्री अग्रसेन स्कूल के एक छात्र ने अचानक मंच पर आकर कन्फेस किया कि वह अंडरऐज मोबाईक राईडर है और दो दिन पूर्व उसके साथ एक एक्सीडेंट हो चुका है। उसने सभी के समक्ष कहा कि आज यह कार्यक्रम देखने के बाद उसने ट्रैफिक रूल्स कभी भी ना तोडऩे की शपथ ली है। इसका सभी दर्षकों ने तालियां बजा कर स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रसिद्ध वकील एवं फिलैन्थ्रोपिस्ट, श्री सुधांशु कासलीवाल थे। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना की और जोर देते हुए कहा कि बेसिक रूल्स का पालन करके यातायात दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु को कम किया जा सकता है।