फिक्की द्वारा राजस्थान एमएसएमई फाइनेंस समिट 2018 आयोजित

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जयपुर
एमएसएमई क्षेत्र के वित्तीय क्षेत्र से संबंधित चुनौतियों, समाधान व भविष्योंन्मुखी योजनाओं को संबोधित करने के उद्ेदश्य से फिक्की राजस्थान द्वारा जयपुर में राजस्थान एमएसएमई फाइनेंस समिट 2018 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथी सांसद रामचरण बोहरा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा की माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य देश भर में एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देना हैं तथा इस क्षेत्र के विकास के संबंध में केंद्र व राज्य सरकार बेहद सक्रिय हैं। उन्होंने एमएसएमई की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि कृषि के बाद एमएसएमई देश में दूसरा सबसे ज्यादा रोजगार का सृजन करता हैं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को शीध्र लोन उपलब्ध कराने हेतू लांच किये वेब पोर्टल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जिसमें मात्र 59 मिनट के अंतर्गत एमएसएमई के लिये 1 करोड रूप्ये तक का लोन स्वीकृत किया जा सकेगा तथा 7 से 8 दिन में इसे वितरित भी किया जा सकेगा। फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के हैड अतुल शर्मा ने सभी का स्वागत करते हुये कहा कि इस विषय पर चर्चा करना आवश्यक है। एमएसएमई को वित्त सुविधायें प्रदान करने के लिये यघपि केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा कई योजनायें चलाई जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर एमएसएमई को लघु व दीर्घ अवधि के लिये ऋण प्राप्त करने में काफी समस्या आती है। इसलिये यह आवश्यक है कि इन्हें आसान व किफायती ऋण सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके ताकि वे अपनी क्षमता पूर्ण उपयोग कर देश के विकास में और अधिक योगदान दे सकें। भारतीय रिजर्व बैंक के जनरल मैनेजर - फाइनेंशियल इन्कुलजन और डेवलपमेंट के प्रमोद किशोर प्रधान ने बताया कि, भारत के विकास में एमएसएमई का योगदान अतुलनीय रहा है और भविष्य में भी यह क्षेत्र देश की प्रगती का वाहक रहेगा। देश में वर्तमान में लगभग 5 करोड़ 13 लाख एमएसएमई यूनिट्स कार्यरत है तथा इनसे लगभग 11 करोड़ 12 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है। एमएसएमई को लेकर सरकार काफी सक्रिय है, यहीं कारण है कि मेक इन इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया आदि कार्यक्रम प्रस्तुत किये जा रहे है। आरबीआई द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिये समय-समय दिशा निर्देश जारी किये गये है। विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुये बैंकर्स को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाता है तथा संवाद स्थापित किया जाता है। इस क्षेत्र को ऋ ण देने में अगर बैंक कोताही बरतते है तो रिर्जव बैंक कार्यवाही करता है।