हस्तशिल्प के गुर, 21 जून तक होगा पंजीयन : आयुक्त उद्योग

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जयपुर
प्रदेश की हस्त व शिल्पकला को संरक्षित व सवंद्र्धित करने के लिए बच्चोंं, युवाओं, युवतियों और परंपरागत शिल्प से जुडऩे के इच्छुक कलाकारों को 24 जून से आयोजित शिल्प शाला में हस्तशिल्प के गुर सिखाएं जाएंगे। उद्योग आयुक्त डॉ. कृष्णा कांत पाठक ने बताया कि पांच दिवसीय शिल्प शाला का आयोजन भारतीय शिल्प संस्थान के सहयोग से उद्योग विभाग के उद्यम प्रोत्साहन संस्थान द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दस वर्ष और इससे अधिक आयुवर्ग के कोई भी इच्छुक भारतीय शिल्पकला संस्थान की वेबसाइट, ऑनलाईन या सीधे ही भारतीय शिल्प संस्थान या उद्योग विभाग में 21 जून तक कार्यालय समय में पंजीयन करा सकते हैं। शिल्प शाला का आयोजन झालाणा स्थित भारतीय शिल्प संस्थान में किया जाएगा। यह पांच दिवसीय शिल्प शाला नि:शुल्क होगी तथा केवल 200 रु. प्रति प्रतिभागी पंजीयन शुल्क देना होगा। डॉ. पाठक ने शुक्रवार को भारतीय शिल्प कला संस्थान व उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के अधिकारियों के साथ बैठक में शिल्प शिक्षा के संभावित शिल्पों का चयन करते हुए बताया कि पांच दिवसीय शिल्प शिक्षा के लिए पहले चरण में 14 शिल्पों का चयन किया गया है इनमें लाख, मीनाकारी, टाई एण्ड डाई, मिट््टी के बर्तन, टेराकोटा, मिनियेचर पेंटिंग, पेपर मैशे, ब्लाक प्रिटिंग, तारकशी, उस्ता कला, चर्म शिल्प, ब्लू पॉटरी, डेको पेज आर्ट, लैण्डस्केपिंग पेंटिंग और मेंहदी कला आदि को शामिल किया है। उन्होंने बताया कि शिल्प शाला में विशेषज्ञों द्वारा संबंधित शिल्प की बारिकियों को व्यावहारिक रुप से समझाया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसी भी शिल्प या कला की शिक्षा के लिए कम से कम दस प्रतिभागी होना आवश्यक होगा। उन्होंने बताया कि शिल्प शाला में प्रतिभागियों को केवल दो सौ रूपये में पंजीयन कराना होगा। इसके अलावा प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग का इस तरह की यह अनूठी पहल है। शिल्प शाला के आयोजन के माध्यम से उद्योग विभाग विशेषज्ञों और इन कलाओं को सीखने के इच्छुकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने जा रहा है जिससे इन कलाओं का संरक्षण व संवद्र्धन होने के साथ ही नई पीढ़ी को इन शिल्पों से जोड़कर उन्हें हस्तशिल्पी और एंटरप्रोन्योर बनाने की राह दिखाइ जा सकेगी। इसके साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकेगा। आयुक्त डॉ. पाठक ने कहा कि शिक्षा में शिल्प गुरुओं, पुरस्कृत शिल्पकारों, राज्य के इस क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं को जोड़ा जा रहा है ताकि समग्र रुप से यह प्रयास प्रदेश की हस्तकलाओं को संरक्षित, संवंद्र्धित करतेे हुए नई पहचान दिला सके। बैठक में भारतीय शिल्प संस्थान की उपनिदेशक प्रोजेक्ट्स लक्ष्मी पारीक, उद्यम प्रोत्साहन संस्थान के एमडी श्री संजीव सक्सैना, ईडी श्री एसएस शाह और सहायक निदेशक प्रचार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा ने भी सुझाव दिए।