सीओपीडी के मरीज़ कैसे करें अपनी देखभाल

img

जयपुर
क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ जिसे आमतौर पर सीओपीडी कहा जाता है, यह फेफड़ों की बीमारियों का समूह है। इनमें एम्फाईसेमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस सबसे आम हैं। डॉ अंकित बंसल, कन्सलटेन्ट, पल्मोनोलोजी, फोर्टिस एस्कॉट्र्स हॉस्पिटल, जयपुर के अनुसार सीओपीडी से पीडि़त ज़्यादातर लोगों में ये दोनों ही समस्याएं होती हैं। एम्फाईसेमा के कारण फेफड़ों में मौजूद एयर सैक (हवा के बैग) धीरे धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिसके कारण हवा के प्रवाह में रूकावट आने लगती है। ब्रोंकाइटिस में सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण नली संकरी हो जाती है और इसमें म्यूकस बन जाता है। हाल ही में सीओपीडी राजस्थान में मृत्यु और अपंगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है और पिछले 2 सालों में सीओपीडी से पीडि़त मरीज़ों की संख्या में 100 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। 

सीओपीडी के आम लक्षण हैं:
* सांस लेने में परेशानी, हल्का व्यायाम करने के बाद सांस फूलना
* छाती में घरघराहट, सांस लेने और छोडऩे के दौरान आवाज़
* छाती में जकडऩ 
* पुरानी खांसी, बलगम के साथ या बलगम के बिना
* रोज़ाना से फेफड़ों से म्युकस साफ करने की ज़रूरत
* बार-बार सर्दी, जुकाम और सांस के संक्रमण
* उर्जा की कमी

सीओपीडी की रोकथाम के लिए मुख्य बिन्दु

* अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें: 
अंगुलियों के नाखुन या होठ नीले पड़ जाएं, ऐसा खून में ऑक्सीजन कमी से होता है। सांस लेने में परेशानी और दिल की धड़कने बढऩा; अपने आप को भ्रमित महसूस करना।
* धूम्रपान करने वाले 20 से 30 फीसदी लोगों में सीओपीडी हो जाता है- ऐसे में एक्टिव और पैसिव स्मोकिंग से बचें, अपने आप को रसायनों से युक्त धुंए से बचा कर रखें। अगर आप धूम्रपान करते हैं और आपको अस्थमा है तो सीओपीडी की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।
* कैडमियम के धुंए, धूल, सिलिका की धूल, वेल्डिंग के धूंए, आईसोसायनेट, कोयले की धूल से दूर रहें। ये सभी सीओपीडी का कारण हो सकते हैं। 
* अगर सीओपीडी का इलाज न किया जाए तो बीमारी तेज़ी से बढ़ती है और दिल की बीमारियों या श्वसन तंत्र में संक्रमण का कारण बन सकती है। 
* सीओपीडी की जटिलताओं से बचने के लिए सेहतमंद आहार लें; अपने आहार में सब्जिय़ां, फल, अनाज, प्रोटीन और डेयरी उत्पाद शामिल करें। कैफीन का सेवन न करें। तरल पदार्थों और पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें, यह म्यूकस को पतला करने में मदद करता है। 
* अपना वजऩ सामान्य बनाए रखें- सामान्य से ज़्यादा वजऩ का बुरा असर फेफड़ों और दिल पर पड़ता है। वही कम वजऩ वाले कमज़ोर व्यक्ति की बीमारियों से लडऩे की ताकत कम होती है और वह आसानी से सीओपीडी का शिकार हो सकता है। 
* सीओपीडी के मरीज़ों को जुकाम, फ्लु, न्युमोनिया की संभावना अधिक होती है, इसलिए इन्फ्लुएंजा और न्युमोकोकल वैक्सीन लगवाएं, यह आपको संक्रमण से बचा कर रखेगी। 
* मौसम जब बदल रहा हो, या बहुत ज़्यादा गर्मी-सर्दी से अपने आप को बचा कर रखें। सीओपीडी के मरीज़ों में गर्मी और उमस के कारण भी सांस की समस्या बढ़ सकती है। 
* सीओपीडी एक गैर संचारी रोग है जिसकी रोकथाम की जा सकती है। हालांकि इसका इलाज संभव नहीं है; लेकिन इसके लक्षणों और जटिलताओं को कम कर मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। 
* सीओपीडी पल्मोनरी हाइपरटेंशन यानि धमनियों में उच्च रक्तचाप का कारण बन सकता है। जिसके कारण दिल की बीमारियों, यहां तक कि हार्ट अटैक की संभावना भी बढ़ जाती है।