प्रवासियों ने राजस्थानी संगीत और भोजन का उठाया लुफ्त

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जयपुर
राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका (राना) का 19वां दीपावली स्नेहमिलन समारोह 'दीप महोत्सव' लॉंन्ग आईलेंड की हिल्टन होटल में सम्पन्न हुआ। समारोह की जानकारी देते हुए राना के अध्यक्ष डा. शशि शाह, दीप महोत्सव समिति के अध्यक्ष हरिदास कोटेवाला ने बताया कि इस भव्य समारोह में 700 से अधिक अप्रवासी राजस्थानियों ने शिरकत की। समारोह में प्रवासियों ने सपरिवार राजस्थानी संगीत संध्या के साथ परोसे गये स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन का भी लुफ्त उठाया। इस अवसर पर जयपुर फुट यू.एस.ए चैयरमेन प्रेम भंडारी, डॉ. स्मिता लोढ़ा, रेणु जैन तथा मनीषा जालानी को अपने अपने क्षेत्र में किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में गेस्ट ऑफ ऑनर पद्म विभूषण पं. जसराज, डिप्टी कौंसल जनरल ऑफ इंडिया (न्यूयॉर्क) शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेसवुमन (न्यूयॉर्क) ग्रेस मेंग आदि रहे। अंत में राजीव पांड्या ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने समारोह के सभी आयोजकों की कड़ी मेहनत और दूर दूर से पधारे अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह में जयपुर फुट यूएसए की ओर से प्रेम भंडारी द्वारा जयपुर फुट, खाड़ी देशों से पिछले 10 वर्षों में 3000 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी तथा अन्य सामाजिक कार्यों का 6 मिनट का विडियो भी दर्शाया गया। प्रेम भंडारी ने इस सम्मान को भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर फुट यूएसए के साथियों तथा खास तौर से इसे संस्थापक डी.आर. मेहता को समर्पित किया। 

राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने तक चुप नहीं बैठूंगा : भंडारी
यूएस मीडिया से बातचीत में प्रेम भंडारी ने कहा कि लगभग 10 करोड़ राजस्थानियों की मातृभाषा को मान्यता नहीं मिलना राजस्थानियों के साथ घोर अन्याय है। उन्होंने बताया कि डॉ. शशि शाह के अथक प्रयासों और तत्कालीन राना अध्यक्ष के.के. मेहता द्वारा वर्ष 2003 में पहले अन्तर्राष्ट्रीय राजस्थानी सम्मेलन के दौरान न्यूयॉक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए ज्ञापन सौंपा गया था। जिसके डेढ़ माह पश्चात ही तत्कालीन गहलोत सरकार ने 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा के आखिरी दिन अंतिम सत्र में एक सकंल्प सर्व सम्मति से पारित करवाकर केन्द्र सरकार को भिजवा दिया था। यही नहीं 1992 में दिल्ली के बोट क्लब में राजस्थानी भाषा के लिए धरने में खुद वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तक ने शिकरत की थी। वहीं भाजपा के पिछले घोषणा पत्र में भी भाषा को मान्यता दिलाने की बात कही गई थी। मगर राजनेताओं की इच्छा शक्ति में कमी के चलते पिछले 15 सालों से यह मामला लटका हुआ है। इसके लिए तमाम राजनैतिक दल जिम्मेदार है। भंडारी ने साफ शब्दों मे कहा है कि वो चुप बैठने वालों में से नहीं है। वादा करके भी मान्यता ना मिलने से राजस्थानी ठगा सा महसूस करने लगा है। उन्होंने जल्द ही प्रधानमंत्री को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपने की बात कही। भंडारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो शक्ति प्रदर्शन भी होगा। जब तक राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिल जाती तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा।