कलश स्थापना व घट पूजन के साथ नवरात्रा आज से

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जयपुर
कलश स्थापना व घट पूजन के साथ आज से नवरात्रा शुरू हो रहे है। शारदीय नवरात्रि आज से 18 अक्टूबर तक रहेंगे। इस दौरान हर दिन मां दुर्गा के सभी 9 रूपों की पूजा की जाएगी। इस बार कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 10 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। कुल अवधि 1 घंटा है।
कलश स्थापना की सामग्री : मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदें। इसके अलावा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए। नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में रामलीला का मंचन भी किया जाता है। वहीं, पश्चिम बंगाल में दुर्गा उत्सव मनाया जाता है। हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है। नवरात्रि का मतलब है नौ रातें। इस दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा की जाती है। यह त्योहार पूरे भारत वर्ष में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। साल में दो बार नवरात्र िपड़ती हैं, जिन्हें चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है। जहां चैत्र नवरात्र से हिन्दू वर्ष की शुरुआत होती है।  वहीं शारदीय नवरात्र अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार बताता है कि मां की ममता जहां सृजन करती है वहीं मां का विकराल रूप दुष्टों का संहार भी कर सकता है। शारदीय नवरात्रि को मुख्य नवरात्रि माना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार यह नवरात्रि अश्विन शुक्ल पक्ष से शुरू होती हैं और पूरे नौ दिनों तक चलती हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल सितंबर-अक्टूबर के महीने में आता है। इस बार शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक हैं। 19 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व बताता है कि झूठ कितना भी बड़ा और पापी कितना भी ताकतवर क्यों न हो अंत में जीत सच्चाई और धर्म की ही होती है। नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग देवी के नौ रूपों की आराधना कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में जो भी सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा करता है उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।