अब व्यावसायिक खेती की आवश्यकता : मिश्र

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जयपुर
राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि किसान परम्परागत खेती के स्थान पर व्यावसायिक खेती करें। खेती की लागत कम हो तथा उत्पादन एवं आय बढ़े, इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों को नई तकनीकें इजाद करनी होंगी तथा किसानों तक तकनीक पहुंचानी होगी। 
राज्यपाल मिश्र शुक्रवार को बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के जिम्नेजियम हॉल में इंडियन सोसायटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन के 'आइएसइ राष्ट्रीय सेमिनार-2019' के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि आज भू-जल लगातार घट रहा है। ऐसे समय में जल का उचित उपयोग करते हुए अधिकाधिक उत्पादन लेना बड़ी चुनौती है। ऐसे में कम पानी वाली फसलें लेने के साथ किसानों को बागवानी, सब्जी उत्पादन, फ्लोरीकल्चर और मधुमक्खी पालन जैसे आयाम भी अपनाने होंगे। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि आज अनेक प्रगतिशील किसानों, खासकर महिलाओं ने समन्वित खेती प्रणाली का उपयोग करते हुए अपनी आय में इजाफा किया है। यह एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि आज कम जोत वाले किसान ज्यादा हैं। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक यह शोध करें कि किस स्थान पर किन फसलों का उत्पादन हो सकता है। किसानों को नवीनतम तकनीकें पहुंचाने के लिए मेले, संगोष्ठियां, प्रशिक्षण आदि आयोजित किए जाएं। वैज्ञानिक खेतों तक जाएं। मिट्टी के स्वास्थ्य का परीक्षण करें तथा इसके अनुरूप कार्य योजना बनायें। मिश्र ने कहा कि आज भी हमारे किसान परम्परागत खेती कर रहे हैं, लेकिन परम्परागत खेती से किसानों को आशातीत आर्थिक लाभ नहीं होता। ऐसे में व्यावसायिक खेती आज की आवश्यकता है। उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं विपणन की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों का यह प्रयास होना चाहिए कि किसान स्वावलम्बी बने तथा उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि खेती, हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ है। युवा इससे विमुख नहीं हों, इसके मद्देनजर सकारात्मक प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय और आइएसइइ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान कृषि वैज्ञानिक, विद्यार्थी और प्रगतिशील किसान, खेती के जुड़े मुद्दों पर मंथन करें तथा खेती के दौरान आने वाली प्रायोगिक समस्याओं के समाधान के प्रयास करें। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय इस बदलाव की पहल करे।