किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर सदन में भाजपा का जमकर हंगामा

img

जयपुर
विधानसभा में आज किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर वेल में आकर हंगामा हिकया। भाजपा विधायकों के हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा में केवल प्रश्नकाल तक ही शांति रही। शून्यकाल शुरु होते ही किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर हंगामा शुरु हो गया। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सरकार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया, कटारिया ने पूछा सरकार बताए कितने किसानों का कितना कर्ज माफ हुआ, भाजपा के जेल भरो आंदोलन की घोषणा के बाद सरकर ने हर जले में महज पांच पांच कैंप लगाकर खानापूर्ति की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि किसानों का कर्ज माफ कर दिया है, जब भाजपा राज में कर्ज माफी की घोषणा की थी तब यह बताया था कि कितने किसानों का माफ करेंगे। इस पर जमकर नोकझोंंक हुई, इसी बीच भाजपा विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरु कर दी। भाजपा विधायकों की नारेबाजी के बीच ही शून्यकाल की कार्यवाही चलती रही। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने 1 बजे एक घंटे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरु होने के बाद महज 10 मिनट चली, भाजपा ने फिर कर्जमाफी का मुद्दा उठाया और वेल में आकर नारेबाजी शुरु कर दी। अध्यक्ष ने 2 बजकर 10 मिनट पर 3.45 तक के लिए स्थगित कर दी। तीसरी बार सदन की कार्यवाही शुरु होने पर भी हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच ही दो विधेयक पारित करवाए गए। इसके बाद कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। शून्यकाल में हंगामे के बीच ही सदन में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा उठा। रालोपा विधायक हुनमान बेनीवाल और बसपा विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना ने गुर्जर आरक्षण मसले का हल निकालने की मांग रखी। हनुमान बेनीवाल ने शून्यकाल में पर्ची के जरिए मामला उठाते हुए भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार पर गुर्जरों के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया। बेनीवाल ने कहा, केंद्र सरकार संविधान में संशोधन करके गुर्जरों को 5 फीसदी आरक्षण दे, राज्य सरकार भी गुर्जरों को 5 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव तैयार करे। जोगेंद्र सिंह अवाना ने भी यही मांग उठाई। बसपा और रालोपा विधायकों ने सदन मतें वेल में आक गुर्जर आरक्षण की मांग को लेकर नारेबाजी की। सदन में हंगामे के बीच ही दोनों बार शून्यकाल की कार्यवाही चली। हंगामे के बीच ही सदन में तीन विधेयक रखे गए। भाजपा राज में बंद किए गए अंबेडकर विश्वविद्यालय और पत्रकारिता विश्वविद्यालय के बिल सदन में रखे गए। सहकारी सोसाइटी संशोधन विधेयक भी सदन में रखा गया। इन तीनों विधेयकों को अब 13 फरवरी को बहस के बाद पारित करवाया जाएगा।