जेकेके में तीन दिवसीय धू्रपद के दूसरे दिन हुआ ओपन सिम्पोजियम का आयोजन

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जयपुर
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में आयोजित किये जा रहे तीन दिवसीय शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम 'धू्रपद' के दूसरे दिन की शुरुआत ओपन सिम्पोजियम के साथ हुई। इसमें धू्रपद गायक पं. प्रेम कुमार मलिक, ओम प्रकाश नायर, श्याम सुंदर, शबाना डागर और इमरान डागर जैसे कलाकार शामिल हुए। दरभंगा घराना के पं. प्रेम कुमार मलिक ने अपने घराने के इतिहास के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को धू्रपद की उत्पत्ति के बारे में बताया और इस गायन को बनाने वाली गोराल, खंडर, डागर व नोहार वाणियों की जानकारी दी। ये वाणियां पांच गीतियों- शुद्धा, भिन्न, गौरी, वेगस्वरा और साधारनी से विकसित हुई हैं। पं. मलिक ने यह भी बताया कि ध्रुपद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक जटिल शैली है जिसमें समय व धैर्य की विशेष आवष्यकता होती है। ओम प्रकाश नायर एवं श्याम सुंदर ने अपनी गुरु डॉ. मधु भट्ट तैलंग के सफर के बारे में बताया, जो कि राजस्थान की प्रथम महिला ध्रुपद गायिका हैं। उनकी रचनाएं मीरा, कबीरदास, तुलसीदास, स्वामी विवेकानंद व रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं पर आधारित हैं द्यनई शैलियों के साथ पुरानी परम्पराओं के विकास में भी उनका सहयोग हैं। डागर घराना की शबाना डागर और इमरान डागर (डागर आर्काइव्ज के संस्थापक) ने अपने घराने के इतिहास एवं परम्पराओं के बारे में बातचीत की। उन्होंने बताया कि आर्काइव्ज द्वारा उन कलाकारों के सैद्धांतिक व व्यावहारिक ज्ञान को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है, जिन्होंने संगीत में काफी अहम योगदान दिया है।