40 वर्ष के युवाओं में बढ़ रहे है प्रोस्टेटाइटिस और बीपीएच के मामले

img

जयपुर
जैसे-जैसे पुरूषों की आयु बढ़ती है, उनके शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं, जिन पर हमेशा नियंत्रण नहीं हो पाता है। अधिकांश पुरूषों में इन परिवर्तनों में से एक है पौरूष गं्रथि (प्रोस्टेट) का बढऩा। बड़ी आयु के पुरूषों का प्रोस्टेट छोटी आयु के पुरूषों की तुलना में बड़ा होता है। प्रोस्टेट की जो वृद्धि कैंसर के कारण नहीं होती है, उसे बेनाइन प्रोस्टैटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) कहते हैं। बड़ी आयु के पुरूषों में बीपीएच सर्वाधिक सामान्य स्थिति है, जिसमें 50 वर्ष की आयु के बाद प्रोस्टेट का आकार बढ़ता है! बीपीएच को पौरूष ग्रंथि विस्तार भी कहा जाता है- यह बढ़ती आयु के पुरूषों में पाई जाने वाली आम स्थिति है। प्रोस्टेटाइटिस और बेनाइन प्रोस्टैटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) पौरूष ग्रंथि के आम रोग हैं; जो विश्व के लाखों पुरूषों को प्रभावित करते हैं। लेकिन यह जानना महत्वपूर्ण है कि बीपीएच प्रोस्टेट कैंसर नहीं है और इसके होने का कारण भी नहीं है। आपके प्रोस्टेट के आकार से लक्षणों की गंभीरता ज्ञात नहीं होती है। थोड़े बड़े आकार के प्रोस्टेट वाले कुछ पुरूषों में बड़े लक्षण हो सकते हैं, जबकि बहुत बड़े प्रोस्टेट वाले पुरूषों में न्यून लक्षण हो सकते हैं। कुछ पुरूषों में लक्षण स्थिर हो जाते हैं और कुछ समय बाद इनमें सुधार भी आ सकता है। डाक्टर एस एस यादव, वरिष्ठ प्रोफेसर, यूरोलोजी विभाग, एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर के अनुसार, ''बढ़ा हुआ (एनलार्ज) प्रोस्टेट पुरूष की मूत्र निकासी को सीधे प्रभावित करता है, क्योंकि ब्लैडर पर दबाव होता है या ब्लैडर संवेदनशील हो जाता है- इससे मूत्र निकासी की तीव्र इच्छा होती है। चूंकि ब्लैडर की खुद को खाली करने की क्षमता नहीं होती है, इसलिये थोड़ी-थोड़ी देर में पेशाब आने जैसा लगता है। बीपीएच की प्रधानता आयु के साथ बढ़ती है, 70 वर्ष और इससे अधिक आयु के पुरूष इससे सबसे अधिक पीडि़त होते हैं। वर्ष 1997 में किये गये एक अध्ययन के अनुसार, भारत में आयु के हिसाब से बीपीएच की मौजूदगी 40-49 वर्ष के लिये 25 प्रतिशत, 50-59 वर्ष के लिये 37 प्रतिशत, 60-69 वर्ष के लिये 37 प्रतिशत और 70-79 वर्ष के लिये 50 प्रतिशत होती है। प्रोस्टेटाइटिस और बीपीएच प्रोस्टेट में विकसित होने वाले रोग हैं; यह पुरूषों को होते हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। यह प्रोस्टेट के रोगों के अलावा यौन शक्ति के अभाव से भी हो सकता है। यौन शक्ति का अभाव प्रोस्टेट रोग के उपचार से भी हो सकता है; इसलिये प्रोस्टेट के उपचार के समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिये। प्रोस्टेट के रोगों और उनसे संबद्ध यौन शक्ति के अभाव को समझकर पुरूषों के जीवन की गुणवत्ता बनाये रखने के लिये प्रत्येक स्थिति के लिये उपयुक्त उपचार का चयन करना चाहिये। भारत में प्रोस्टेट कैंसर का शुरूआती अवस्था में ही पता लगाने और उपचार के लिये टारगेटेड स्क्रीनिंग या स्मार्ट स्क्रीनिंग की जरूरत है। 50 वर्ष की आयु के बाद और प्रोस्टेट कैंसर के पारिवारिक इतिहास वाले 40 वर्षीय लोग, जो मूत्र सम्बंधी समस्याओं के लिये यूरोलॉजी ओपीडी जाते हैं, उन्हें पीएसए और डिजिटल रेक्टल परीक्षण करवाना चाहिये।