राजस्थान में तीसरा विकल्प सिर्फ निर्दलीय मंच : सिंघवी

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जयपुर
राजस्थान में भाजपा, कांग्रेस के बाद यदि कोई तीसरा विकल्प है तो वह है, निर्दलीय मंच। भारत वाहिनी, लोकतांत्रिक दल, एनसीपी, बसपा, सपा मिलकर कभी एक साझा मंच बनाकर तीसरा शक्ति यहां नहीं बन सकते। राजस्थान में अगला भविष्य यदि किसी का होगा तो वह है, निर्दलीय मंच। निर्दलीय मंच के संयोजन चन्द्रराज सिंघवी ने यह बात जलतेदीप को दिये अपने साक्षात्कार में कहीं। वे कहते हैं कि घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी 4 माह का दूध पीता बच्चा है। हनुमान बेनीवाल का राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल तो न्यूलीबार्न बेबी है। आम आदमी पार्टी यहां वजूद हीन पार्टी है। सपा का तो यहां कभी खाता ही नहीं खुला और न ही कभी खुलेगा। सिंघवी ने कहा हमारा निर्दलीय मंच ही एक ऐसा मंच है जहां योग्य उम्मीदवार हैं, कार्यकत्र्ताओं की बेहतर टीम है। निर्दलीय मंच में प्रत्याशी कम से कम 200 में से 75 सीटों पर चुनाव लडेंग़े तथा भाजपा एवं कांग्रेस दोनों को कड़ी टक्कर देंगे। चन्द्रराज का मानना है कि यदि निर्दलीय मंच 20-25 सीटें भी प्राप्त कर लेता है तो सरकार बनाने में इस मंच की महत्वपूर्ण भूमिका होंगी। हो सकता है मुख्यमंत्री भी हम में से ही कोई बन जाये। सिंघवी मानते हैं कि इन दोनों बड़े दलों को टक्कर देगी आसान नहीं है लेकिन फिर भी निर्दलीय मंच निरन्तर योग्य प्रत्याशियों की तलाश में रहता है और ऐसे ही योग्य उम्मीदवारों को वह चुनाव मैदान में उतारेगा। चन्द्रराज ने बताया चुनाव की रणनीति तय की जा रही है। भाजपा एवं कांग्रेस के टिकट वितरण के बाद ही निर्दलीय मंच ज्यादा ऐक्टिव होगा। कांग्रेस से भी ज्यादा भाजपा में इस बार असंतोष का लावा फूटेगा क्योंकि इनकी स्क्रीनिंग कमेटी की ओर से वर्तमान विधायकों, मंत्रियों में से 50 प्रतिशत विधायकों के टिकट करने की आशंका है। हमारी नजर इसी लिस्ट पर जाकर बार-बार ठहर रही है। टिकट कटने के बाद  भाजपा के वर्तमान विधायकों में से बहुत से निर्दलीय मंच में आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकतर विधायक एवं मंत्री तो हमारे सम्पर्क में है ही और टिकट वितरण के बाद की परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें निर्दलीय मंच का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। भारत वाहिनी और हनुमान बेनीवाल की लोकतांत्रिक दल में इन भाजपा के बागियों के जाने की संभावना कम है। एक तो ये पार्टियां एकदम नई है, इनका खुद ही अभी वजूद नहीं तो ये असंतुष्ट विधायकों को क्या मार्ग दिखलायेगी। भारत वाहिनी पार्टी और बेनीवाल की लोकतांत्रिक दल यदि आपस में मिलकर भी चुनाव लड़ती है तो एक या दो सीटें निकालने में ही इनके पसीने छूट जायेंगे। हनुमान बेनीवाल की पार्टी थोड़े बहुत जरूर हाथ पैर मार लें लेकिन घनश्याम तिवाड़ी की पार्टी तो राजस्थान में शायद ही कुछ प्राप्त कर सके। चन्द्रराज ने बताया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव एक रणनीति के तहत लडऩे वाले हैं। समाज के हर क्षेत्रों से प्रतिष्ठित लोग नित्य यहां मार्गदर्शन एवं चुनाव लडऩे का प्रस्ताव लेकर आते हैं। इनको इनकी योग्यता अनुसार विधानसभा की क्षेत्रवार सीट बताकर मार्गदर्शित किया जाता है और चुनावी तैयारी करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर दी जायेगी।