जयपुर आर्ट एक्सपो में रंग और शब्द शिल्पियों का छाया जादू

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जयपुर
कला आकार फाउंडेशन की ओर से एंटरटेनमेंट पैरेडाइज के ब्लू प्लूटो में चल रहे चार दिवसीय जयपुर आर्ट एक्सपो में शुक्रवार को रंगों के साथ ही शब्दों के शिल्पियों का सृजन छाया रहा। इसमें कई कलाकार ऐसे थे जो कि चित्रकारी के साथ ही कवि-शायर भी हैं। जयपुर आर्ट एक्सपो में इन्होंने ऑयल, वाटर कलर्स के साथ ही मिक्स मीडिया में रंगों और शब्दों का संयोजन किया है। शुक्रवार को एक्सपो में शामिल कलाकारों ने अम्ब्रेला पेंटिंग वर्कशॉप में भी हिस्सा लिया और अपने सृजन से आमजन को अवगत कराया। इन छतरियों को निराश्रित बच्चों को भेंट किया जाएगा। कला आकार फाउंडेशन की संस्थापक जया अरोड़ा ने बताया कि एक्सपो में बिजनौर, यूपी से आये हुसैन अब्बास ने प्लाईवुड पर ऑयल कलर्स से लैंडस्केप और सेल्फ पोट्रेट पेंटिंग्स बनाई हैं, जिनमें सम-सामयिक विषयों को शामिल करते हुए 32 पेंटिंग्स को यहां प्रदर्शित किया है। बिखरते हुए पन्नों की तरह है ये जिंदगी शायरी पर आधारित करते हुए हुसैन अब्बास ने अपने सृजन के विषय चुने हैं। इसी कड़ी में गाजियाबाद से आई बेला प्रसाद नही काव्य रचनाओं के साथ ही कला सृजन में पारंगत हैं। उन्होंने ऑयल व ऐक्रेलिक कलर्स में पैंटिंग बनाने के साथ ही स्केचेज़ पर भी मानवीय भावों को उकेरा है। पेपरमेशी प्रोडक्ट बनाने में सिद्धहस्त जयपुर की कलाकार शीला पुरोहित ने मिक्स मीडिया पेंटिंग्स भी जयपुर आर्ट एक्सपो में प्रदर्शित की हैं। बैलगाड़ी पर दादी के पीहर जाने के बचपन के यात्रा संस्मरण को उन्होंने अपने सृजन का माध्यम बनाया और इसमें अचार का डिब्बा, दादी मां का आंचल, दो बैलों की जोड़ी के साथ गाड़ीवान और अपने परिवार को बखूबी पेश किया है। वेस्ट मेटेरियल से तैयार इस शिल्प के जरिए शीला पुरोहित ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है।