जेकेके में फिर से जीवंत हुए महान कहानीकार 'मंटो'

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जयपुर
जवाहर कला केंद्र के रंगायन में सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित नाटक 'एक मुलाकत मंटो से' ने आज जयपुर के रंगमंच के प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 'राजी' और 'हैदर' फेम कलाकार, अश्वत्थ भट्ट द्वारा अभिनीत इस सोलो नाटक में दर्शकों को ऐसा लगा मानो महान कहानीकार 'मंटो' फिर से जीवंत हो गये। यह नाटक जेकेके द्वारा एक्टर्स कल्ट एंड थिएटर गैराज के सहयोग से प्रस्तुत किया गया। नाटक में अश्वत्थ ने अपने बेहतरीन अभिनय से मंटो की सोच और उस दौर के माहौल का सृजन किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में मंटो द्वारा लिखे लेख एवं कहानियां - 'मंटो, मैं अफसाना क्यों कर लिखता हूं', 'खोल दो', 'कल सवेरे जो मेरी आंख खुली' और 'दीवारों पे लिखना' को शामिल किया। नाटक में 1947 में भारत विभाजन के दौरान हुए सामाजिक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करते हुए मंटो के जीवन एवं विचारधारा को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया गया। मंटो ने भारत विभाजन की त्रासदी पर कहानियां लिखने का निर्णय क्यों लिया, उनका बचपन, परिवार, दोस्तों, उत्पीडऩ, आत्म-उपहास, अवसाद, बेबसी, शराब पीने की लत, हिंदी सिनेमा, व्यंग्य, विडंबना, छल-कपट, उदासी, संघर्ष और समाज के नैतिक पतन को नाटक में शामिल किया गया। मंटो के समय का माहौल बनाने और उनके जीवन की उदासी को दर्षाने के लिए नाटक में अनेक बार बेगम अख्तर की गज़लों का उपयोग भी किया गया। प्रसिद्ध शायर दाग़ देहलवी के शेर के साथ नाटक का समापन हुआ।