दुनिया भारत के युवाओं की तरफ देख रही है, युवा देश की ताकत: प्रणब मुखर्जी

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जयपुर
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राजधानी में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा शक्ति नए विश्व के निमार्ण के लिए जुट जाए। क्योंकि पूरी दुनियां अब भारत की ओर देख रही हैं। उन्होंने विश्व के सबसे नौजवान देश के युवाओं को मास्टर्स ऑफ वल्र्ड बनने का आव्हान किया। वे आज यहां राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ भी की। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज राजधानी के जेकेलक्ष्मीपत विश्वविद्यालय की ओर से जेकेएलयू लॉरेट अवार्ड से सम्मानित किया गया। यहां प्रणब दा ने हरिशंकर सिंघानिया स्मृति व्याख्यान में युवाओं को संबोधित करते हुए एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करने की बात कही। जिसमें युवाओं की सहभागिता हो उनके कौशल का सदुपयोग हो। उनका कहना था कि देश की पैंसठ फीसदी जनसंख्या 35 साल से कम उम्र के लोगो की है। ऐेसे में इस युवा ताकत को और मजबूती देने की जरूरत है। यहां उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी के दिए गए उदाहरणों को दोहराया और बताया कि गांधी कहा करते थे कि युवा देश का जीवन हैं। युवा किसी भी राष्ट्र को सशक्त बना सकते हैं। हमारे देश की बात करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यहां भले ही विभिन्न धर्म,जाति और भाषाएं और कितनी भी विविधताएं क्यों ना हो लेकिन एक संविधान, एक सिस्टम और एक काननू और एक विचार सबको एकता के सूत्र में पिरोता है वो हैं भारत। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में युवाओं के लिए देश में बेहतर रोजगार की जरूरत बताई। साथ ही ये भी कहा कि इन चुनौतियों से भी निपटना होगा। हालांकि उन्होंने युवाओं निराश नहीं होने और हमेशा आत्मविश्वास रखने का हौंसला दिया। उन्होंने कहा कि हमारे केन्द्र में इसांनियत होनी चाहिए। क्योंकि व्यक्ति से ज्यादा कोई और महत्वपूर्ण नहीं हैं। इसलिए हमे संकीर्ण सोच से बाहर निकलना होगा। क्योंकि हमारे देश की भावनाएं दुश्मनी की कभी नहीं रही। हमारी मूल अवधारणा में सर्वेभवन्तु सुखिन और वसुधैव कुटूम्बकम शामिल हैं। यहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय किए गए परमाणु परीक्षण की तारीफ की। हम उस समय दुनियां के छठें देश बन गए थे। देश की आणविक शक्ति बढाने के साथ भारत अपनी ओर नेवर फर्स्ट पॉलिसी बनाई। क्योंकि हमारी भावना में इसका कभी गलत उपयोग करना नहीं रहा।