राजस्थान के विजेताओं को ‘आरबीएस अर्थ हीरोज‘ अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया

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जयपुर
रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) के नवाचार और संचालन केंद्र आरबीएस इंडिया ने 2018 के लिए ‘आरबीएस अर्थ हीरोज‘ अवॉर्ड्स के विजेताओं का एलान हुआ। पुरस्कार हासिल करने वाले विजेताओं को माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने सम्मानित किया। उन्होंने वन्यजीवों के शिकार के विरुद्ध मुहिम चलाते हुए शक्तिशाली लोगों के खिलाफ लडाई लडने के लिए श्री ललितकुमार बोरा को आरबीएस ‘ग्रीन वॉरियर‘ अवॉर्ड, बचाव और पुनर्वास के माध्यम से लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में काम करने के लिए श्री पीरा राम बिशनोई को आरबीएस ‘सेव द स्पिशीज‘ अवार्ड से और भारत की आर्द्रभूमि के महत्वपूर्ण संसाधन को प्रबंधित करने की दिशा में असाधारण उपलब्धियों के लिए डॉ बृज गोपाल को आरबीएस ‘अर्थ हीरो‘ अवॉर्ड से सम्मानित किया। आरबीएस ‘ग्रीन वॉरियर‘ अवॉर्ड से सम्मानित श्री ललितकुमार बोरा ने वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए हैं और अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। वन्यजीव अपराध मामलों में सुरक्षा और जांच में राजस्थान के कई जिलों में बुनियादी संसाधनों की कमी थी। श्री बोरा पिछले 15 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण उपायों को लागू करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने सफलतापूर्वक उत्तरदायित्व कायम किया, जिसके परिणामस्वरूप वन्यजीवों के शिकार से जुडे अनेक मामलों में वन्यजीव संरक्षण संभव हो पाया और ऐसे मामले सामने आने पर सजा के लिए सख्त उपाय किए जा सके। श्री बोरा ने धरती के बेरहमी से विनाश की प्रक्रिया को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए और इस प्रक्रिया में बहुत अधिक कष्ट उठाया। आरबीएस ‘सेव द स्पिशीज‘ अवॉर्ड लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा और शिक्षा, जागरूकता कार्यक्रम, क्षमता निर्माण और मानव-पशु संघर्ष को हल करने में योगदान देने वाले लोगों को मान्यता देता है। गांव धामाना के निवासी श्री बिश्नोई एक दशक से वन्यजीव संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान का इलाका कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है, लेकिन वन्यजीव समृद्ध क्षेत्र में वाहनों के आवागमन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क हादसों में इन प्राणियों की मौत होने अथवा घायल होने की घटनाएं आए दिन होने लगी हैं। साथ ही वन्य जीवों के शिकार की वारदातें भी अक्सर सामने आने लगी हैं। इन हालात को देखते हुए श्री विश्नोई अपने व्यक्तिगत संसाधनों का उपयोग करके वन्य जीवन के बचाव और संरक्षण की दिशा में काम करने के लिए आगे आए। उन्होंने गांव में घायल वन्यजीवों के लिए एक बचाव केंद्र स्थापित किया और खुद को पशु चिकित्सा देखभाल में प्रशिक्षित किया। 7 वर्षों की अवधि के दौरान श्री बिश्नोई ने अपने केंद्र में हजारों लुप्तप्राय वन्यजीवों की देखभाल की है और उन्हें व्यक्तिगत और चिकित्सा देखभाल प्रदान की है। इस पहल को आगे बढानेे के लिए श्री बिश्नोई ने श्री जंबेश्वर जीव रक्षा प्रदेश संस्थान स्थापित किया है। राजस्थान में इस संस्थान के 400 से अधिक सदस्य हैं जो जानवरों के इलाज के के काम में जुटे हैं। आरबीएस ‘अर्थ हीरो‘ पुरस्कार वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और नीतियों पर प्रभाव डालने के मामले में किसी व्यक्ति की असाधारण उपलब्धियों को मान्यता देता है। डॉ बृज गोपाल को यह पुरस्कार दलदली भूमि से जुडे विज्ञान और इसके प्रबंधन को भारत में एक जाना-माना विषय बनाने के लिए प्रदान किया गया। दलदली भूमि में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की क्षमता है, और ये पानी और खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन हमारी आर्द्रभूमि का भविष्य - जिसमें बार-बार गिरावट आ रही है - सीमित ताजा जल संसाधनों को कुशलता से प्रबंधित करने की हमारी क्षमता और कौशल पर निर्भर करता है। डॉ बृज गोपाल पिछले पांच दशकों  से आर्द्र भूमि के प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में काम करते रहे हैं और उनके प्रयासों से ही यह विषय मुख्यधारा में आने में सफल रहा है। इन लोगों ने धरती की पारिस्थितिकी संपत्तियों को बचाने के लिए अपने कर्तव्य से परे जाते हुए योगदान किया और उनके इस असाधारण योगदान के लिए नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। पर्यावरण को बचाने और इसे संरक्षित करने की दिशा में असाधारण योगदान करने वाले लोगों को सम्मानित करते हुए माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू ने कहा, ‘‘मैं रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) को बधाई देता हूं कि उसने उन लोगों और संस्थानों को सम्मानित करने के लिए इन पुरस्कारों की स्थापना की है, जिन्होंने पर्यावरण की रक्षा करने के साथ हमारी धरती के मूल्यवान संसाधनों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। आरबीएस फाउंडेशन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री हैड ऑफ सर्विसेज; इंडिया चेयरपर्सन श्री पंकज फाटरफोड ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन के परिणामों और धरती के कम होते प्राकृतिक संसाधनों के नतीजे अब  बहुत करीब हैं। इन गंभीर मुद्दों को हल करना सिर्फ कानून के बल पर संभव नहीं है, बल्कि हमें भी अपनी तरफ से सकारात्मक कदम उठाने होंगे। आरबीएस अर्थ हीरोज अवॉर्ड्स की यात्रा विनम्र और प्रेरणादायक रही है, क्योंकि इसके माध्यम से आरबीएस को ऐसी संस्थाओं और लोगों का सम्मान करने का अवसर मिलता है, जो संरक्षण और स्थायित्व की दिशा में निरंतर अपने काम को अंजाम देने में जुटे रहते हैं। हर साल इन पुरस्कारों को होस्ट करना हमारे लिए वास्तव में एक विशेषाधिकार है। रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड के हैड ऑफ सस्टेनेबिलिटी, इंडिया और आरबीएस फाउंडेशन इंडिया के डायरेक्टर श्री एन सुनील कुमार ने कहा, ‘‘अर्थ हीरोज का प्रेरणादायक काम भविष्य की पीढियों के लिए वन्यजीवन और पर्यावरण को संरक्षित रखने से जुडा है, ताकि आने वाली पीढियां भी किताबों में उनके बारे में पढने की बजाय उन्हें अपनी खुद देख सकें। आरबीएस ने 2007 में आरबीएस फाउंडेशन इंडिया की स्थापना की और तब से 1100 से अधिक गांवों में आजीविका में सुधार और संरक्षण को बढ़ावा देते हुए इसने समुदायों को और सशक्त किया है। तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में फाउंडेशन की 22 परियोजनाएं 124,475 से अधिक परिवारों को लाभान्वित कर रही हैं। समुदायों, वन्यजीवन और उनके निवास पर प्रतिकूल असर डालने वाले बढ़ते पारिस्थितिक असंतुलन के माहौल के बीच आरबीएस अर्थ हीरो अवॉर्ड्स की शुरुआत 2011 में उन लोगों और संस्थानों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए की गई थी, जिन्होंने हमारे लुप्तप्राय जंगल, आर्द्रभूमि और अन्य प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इन पुरस्कारों के लिए देशभर से मिले 60 से अधिक नामांकनों में से विजेताओं का चयन एक स्वतंत्र नौ सदस्यीय जूरी द्वारा किया गया, जिसमें कंजर्वेशन और फील्ड बायोलोजी क्षेत्र के कुछ सबसे सम्मानित लोगों और अधिकारियों को शामिल किया गया।