सुशासन आश्वस्त करने के लिए फलौदी को जिला बनाए जाने की आवश्यकता

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  • गुड गवर्नेंस व जन कल्याण की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छोटी प्रशासनिक इकाईयां का महत्व 
  • सन् 2003 में चुनावी वायदों में फलौदी को जिला बनाने का संकल्प अभी तक अधूरा
  • छोटी प्रशासनिक इकाईयां गठित करने हेतु गठित समिति का प्रतिवेदन भी सरकार को प्रस्तुत
  • बालोतरा को भी पृथक जिला बनाए जाने का प्रस्ताव 

जोधपुर
यह एक सर्वमान्य धारणा है कि गुड गवर्नेंस एवं जन कल्याण की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन व मोनिटरिंग हेतु प्रशासनिक इकाईयां भौगोलिक रूप से छोटी होनी चाहिए। यहां तक कि राज्यों का भी पुनर्गठन कर छोटे-छोटे राज्य बनाए जाने आवश्यक हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते छत्तीसगढ़, झारखंड व उत्तराखंड का पुनर्गठन हुआ। मनमोहन सिंह जी के प्रधानमंत्री रहते पृथक तेलंगाना व आंध्रप्रदेश राज्यों का पुनर्गठन हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश व बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सुशासन को दृष्टिगत रखते हुए ही उत्तरप्रदेश को तीन राज्यों में पुनर्गठित करने की मांग की है। राजस्थान को 'मारवाड़' (मरू प्रदेश) अर्थात् पश्चिमी राजस्थान व पूर्वी राजस्थान में पुनर्गठित करने की मांग पूर्व मेंं उठी है। इसी क्रम में राज्य सरकारें भी समय-समय पर यह प्रयास करती है कि राज्य के बड़े जिलों का पुनर्गठन हो कर छोटे-छोटे जिले बनें ताकि जन सामान्य को जिला मुख्यालय पहुंचने में प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न योजनाओं की क्रियान्वित करने एवं मोनिटरिंग करने में सुविधा हो और फलस्वरूप विकास की गति तीव्र हो सके तथा 'प्रशासन आपके द्वार' सार्थक हो सके हर राज्य सरकार यह चाहती है कि सुशासन के लिए अधिक से अधिक तहसीलों का गठन हो व बड़े जिलों का पुनर्गठन हो, लेकिन इसको लागू करने में आवश्यक धन राशि बजट में उपलब्ध कराने की समस्या आती है। राज्य में, वर्तमान में नए जिले गठित करने की बात करें तो ब्यावर, बालोतरा, फलौदी भिवाड़ी व कोटपूतली मुख्यतया नए जिले तुरन्त बनाए जाने आवश्यक है। जोधपुर जिले में तो फलौदी को पृथक से जिला बनाए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। श्रीमती वसुन्धरा राजे ने वर्ष 2003 में चुनाव प्रचार के दौरान फलौदी की चुनाव सभा में फलौदी को जिला घोषित कर तालियां बटोरी थी, पर यह संकल्प पूरा नहीं कर पाई। बीच में कांग्रेस की सरकार भी बनी लेकिन लटियाल माता के धाम फलौदी पर जिले का सेहरा फिर भी नहीं बंधा। हाल ही में संसदीय चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री जी ने फलौदी को जिला बनाना सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया है। तत्कालीन संभागीय आयुक्त जोधपुर, आर.के.जैन ने वर्ष 2012 में संबंधित अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों से चर्चा कर, समुचित आंकड़ों, तथ्यों एवं नक्शों के साथ फलौदी व बालोतरा को पृथक जिला गठित करने के प्रस्ताव प्रेषित किए थे। फलौदी का प्राचीन नाम विजयनगर था व विक्रम संवत 1515 में श्री सिद्धू कल्ला ने फल वृधिका नाम से इसकी स्थापना की थी जो वर्तमान में फलौदी के नाम से जाना जाता है। फलौदी मेंं एक दुर्ग व प्रसिद्ध लटियाल माता का मंदिर है। फलौदी के समीप ही खींचन गांव है, जो कुरंजा पक्षी के आने-जाने के कारा विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। फलौदी को 'साल्ट सिटी' के नाम से जाना जाता है। यह गोल्डन सिटी जैसलमेर व सन सिटी जोधपुर शहरों के बीच स्थित है। यहां ऊंट पर नमक का व्यापार होता था। हाल ही में फलौदी एवं बाप के क्षेत्रों में सूर्य ऊर्जा के बड़े-बड़े प्लान्ट स्थापित होने से यह एक सोलर पावर हब बन चुका है तथा भविष्य में भी इसके विस्तार की संभावनाएं है। फलौदी सट्टा बाजार के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। यहां लगे सट्टे कदाचित् ही गलत होते हैं। लटियाल माता की श्रद्धा इतनी है कि हर चुनाव के पहले पूर्व मुख्यमंत्री यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते है। इन छोटे जिलों से न केवल ये जिले विकास करेंगे बल्कि इनके साथ-साथ राजस्थान का विकास भी तेज होगा। जोधपुर मुख्यमंत्री जी का गृह जिला होने के साथ-साथ राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी भी है। इसके विकास में रूकावट की हर समस्या का दैनिक जलतेदीप प्रमुखता में प्रकाशित कर इसे दूर करने की दिशा में प्रयासरत रहेगा।