बिना वेंटीलेटर के भी बच सकती है मरीज की जान

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जयपुर
मरीज को वेंटीलेटर में होने वाले संभावित खतरों के बिना ही नई तकनीक से बचाया जा सकता है। अगर उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो वेंटीलेटर पर ले जाए बिना भी उसकी जान बचाई जा सकती है। इसके लिए हाईफ्लो नेजल कैन्युला (एचएनएफसी) तकनीक आ गई है। इस तकनीक से वेंटीलेटर के जोखिम बिल्कुल खत्म हो जाते हैं। एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एजुकेशन (एस) और इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन के संयुक्त तत्वाधान में शनिवार से आयोजित हुई दो दिवसीय इंटरनेशनल हैंड्स ऑन वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने ऐसे ही नए लाइफ सपोर्ट सिस्टम के बारे में बताया। कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. पंकज आनंद ने बताया कि वर्कशॉप में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरू से आए विशेषज्ञों ने आईसीयू में आने वाले गंभीर मरीजों का बचाने में काम आने वाली नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान मेडिकल स्टूडेंट्स को सिम्यूलेटर पर नई तकनीकों का इस्तेमाल करना सिखाया गया। हर बीमारी में वेंटीलेटर में होने वाली अलग-अलग सेंटिग्स से मरीज के शरीर में उसका क्या प्रभाव पड़ता है, उसका सिम्यूलेटर पर लाइव डेमो दिया गया। वर्कशॉप के पहले दिन बेंगलुरू के डॉ. सुनील कारांथ, मुंबई से डॉ. विजया पाटिल, हैदराबाद से डॉ. श्रीनिवास सामावेदम ने क्रिटीकल केयर में आई नवीनतम तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

वेंटीलेटर के खतरों से बचाती है एचएनएफसी तकनीक
हैदराबाद के डॉ. श्रीनिवास सामावेदम ने बताया कि जो मरीज पूरी तरह से सांस नहीं ले पाते हैं तो उन्हें वेंटीलेटर पर ले जाये बिना ही बचाया जा सकता है। इसके लिए एचएनएफसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें मरीज को वेंटीलेटर न लगाकर हाई फ्लो से सांस दी जाती है। इससे मरीज को वेंटीलेटर पर होने वाले नुकसान जैसे निमोनिया, बीपी संबंधित समस्याएं, पाइप डालने पर होने वाली तकलीफ नहीं होती और उसे बचा लिया जाता है। इसके अलावा पहले दिन कई साइंटिफिक सेशन आयोजित हुए जिसमें बेसिक फीजियोलॉजी, हार्ट-लंग इंटरेक्शन, आर्टरियल ब्लड गैस एनालिसिस, नॉन-इनवेसिव वेंटीलेशन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।