बाल श्रम राष्ट्र के विकास में है बाधक : पहाडिया

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करौली
जिला कलक्टर नन्नूमल पहाडिया ने कहा कि बाल श्रम एक समस्या ही नहीं अपितु यह व्यक्ति एवं समाज को कमजोर करती है तथा राष्ट्र के विकास में भी बाधक बनती है। जिला कलक्टर ने मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय बंधक श्रमिक सतर्कता समिति की बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बालकों से कार्य लिए को बाल श्रम माना गया है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम से बालकों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में रूकावट आती है जिसकी बजह से समय पूर्व बूढ़ापा, कमजोर सन्तति का उत्पन्न होना, निकम्मेपन का भाव उत्पन्न होना जैसी समस्याएं आ जाती है। जिला कलक्टर ने कहा कि बाल श्रम अधिनियम सभी प्रकार के उद्योगों, संस्थानों, व्यवसाय एवं प्रतिक्रियाओं पर लागू है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत 13 व्यवसायों को जोखिमपूर्ण एवं 57 प्रतिक्रियाओं में बाल श्रमिकों का नियोजन पूर्णतया प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि नियोजक अधिनियम की सभी शर्तों का पालना करेगा। बाल श्रमिक की शिक्षा एवं स्वास्थ्य की देखभाल सहित श्रमिक रजिस्टर का संधारण करेगा। श्रम कल्याण अधिकारी शिवदयन सोलंकी ने बताया कि प्रतिबंधित व्यवसाय एवं प्रक्रियाओं में बाल श्रमिकों को नियोजन पाने की स्थिति में सक्षम न्यायालय द्वारा तीन माह से लेकर एक वर्ष की सजा या 10 हजार रूपये से लेकर 20 हजार रूपये का अर्थ दण्ड अथवा दोनों दण्ड दिए जा सकते है। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र में बाल श्रम हो रहा है तो श्रम निरीक्षक द्वारा कार्यवाही की जाएगी। जिला कलक्टर ने जिला स्तरीय बंधक श्रमिक सतर्कता समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुये साडी की दुकानो, किराने, होटल, चूडी वाले एवं खनन क्ष़ेत्र मे कार्य करने वाले बंधक श्रमिको को चिन्हिीकरण प्रारम्भ करे और उन्हे रोजगार एवं पुर्नवास से जोडने के प्रयास किये जाये। उन्होने कहा कि खनन क्षेत्रो मे काम करने से सिलिकोसिस रोग पनप रहा है जिसका उपचार भी नही है इसलिये स्वयंसेवी संस्थाओं की बैठक आयोजित कर कार्यरत श्रमिको को सुरक्षा के उपाय बताकर सुरक्षा उपकरण के बारे मे जागरूक किया जाये। उन्होने कहा कि बंधक श्रमिको को चिन्हित करने के लिये तहसील स्तर पर टीम बनाकर एक-एक सप्ताह श्रमिक निरीक्षको को चिन्हिीकरण कर कार्यवाही करने के निर्देेश भी श्रम कल्याण अधिकारी शिवदयन सोलंकी को दियें। श्रम कल्याण अधिकारी ने बधुआ श्रमिको की पहचान के लिये आवश्यक व्यवस्था किये जाने एवं बधुआ श्रम उन्मूलन संकल्प एवं प्रयास के बारे मे विस्तार से जानकारी दी। बैठक मे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्रीमति रेखा यादव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश मीना सहित श्रम कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। वास्तविक श्रमिको के पंजीयन सुनिश्चित करें। जिला कलक्टर ने बीओसीडब्लू की क्रियान्विती एवं सैस संग्रहण की बैठक मे निर्देश दिये कि वास्तविक श्रमिको का पंजीयन ही सुनिश्चित किया जाये। उन्होने बताया कि प्राय यह देखने मे आया है कि सभवननिर्माण से जुडे वास्तविक श्रमिको का पंजीयन नही हो पाता है जबकि किराने वाले, साडी की दुकानो पर काम करने वाले आदि लोगो का पंजीयन हो जाता है इस पर पूर्ण सतर्कता बरतते हुये सही जॉच कर गलत पंजीयन कराने वाले के खिलाफ शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश भी श्रम कल्याण अधिकारी को दिये। बैठक में विकास अधिकारी, जिला रसद अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, जिले के सीडीपीओ, शिक्षा, चिकित्सा, नगर परिषद, कोषाधिकारी, अल्पसंख्यक विभाग सहित संबंधित विभागो के अधिकारी उपस्थित थें।