दो नगर निगम के मामले में आयोग नहीं पेश कर पाया जवाब

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जयपुर
नगर निगम को दो भागों में बांटकर दो नए नगर निगम बनाने के मामले में शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। दी बार एसोसिएशन जयपुर के महासचिव अधिवक्ता सतीश कुमार शर्मा ने कोर्ट में याचिका दायर करके इस पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करके पूरे मामले में जवाब मांगा था। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग इस मामले में शुक्रवार को जवाब पेश नहीं कर सका।

अब 19 को होगी अगली सुनवाई
आयोग के अधिवक्ता आरबी माथुर ने कोर्ट से जवाब पेश करने के लिए ओर समय मांगा। इस पर कोर्ट ने समय देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 19 नवंबर तय की है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी रस्तोगी ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 18 अक्टूबर को एक आदेश जारी करके जयपुर नगर-निगम को जयपुर ग्रेटर और जयपुर हैरिटेज नाम से दो भागों में विभक्त कर दिया है।

संविधान के अनुच्छेद 243-यू का उल्लंघन बताया
बकौल रस्तोगी यह संविधान के अनुच्छेद 243-यू का उल्लंघन है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 243-यू के अनुसार निकाय चुनाव किसी भी दशा में उसके गठन के 5 साल तक ही वैध रहते हैं। ऐसे में जयपुर नगर निगम का वर्तमान कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। इस अवधि को किसी भी रूप में बढ़ाया नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर जयपुर, जोधपुर और कोटा के चुनाव टाल रही है।

तीनों निगमों के वार्डों के पुन: सीमांकन का कार्य शुरू
उल्लेखनीय है कि हाल ही में राज्य सरकार ने जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों को दो-दो भागों में बांट दिया है। अब तीनों जगहों पर 2-2 नगर निगम हो गए हैं। 

इन तीनों निगमों के वार्डों के पुन: सीमांकन एवं पुर्नगठन का कार्य भी शुक्रवार से ही शुरू हो गया है। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि वार्ड निर्धारित सीटों के अनुरूप होंगे।