तीन बार हाजिर हो चुका दस्यु जगन ने फिर मचाया आतंक

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धौलपुर
हिंदी में एक कहावत मशहूर है कि उड़ जहाज को पंछी फिर जहाज पर आवे। सीधा सपाट मतलब यह है कि समुद्री जहाज पर बैठा हुआ पंछी उड़ता है आसमान में। मगर और कोई ठिकाना नहीं है, इसलिए लौट कर उसे जहाज पर आना पड़ता है। लगभग यही हालत दस्यु जगन की है, जो तीन बार हाजिर हो चुका है। पुलिस उसे पहले भी गिरफ्तार कर चुकी है। मगर पैरोल पर छूटने के बाद भी उसमें अपराध की दुनिया को छोडऩे का साहस और कुब्बत नहीं है। चंबल नदी के मुहाने पर गांव बहुत ही विभूति पुरा स्थित है। नदी से पहाड़ी चढ़कर इस गांव में जाया जाता है। इसी विभूति पुरा में शिवचरण गुर्जर के यहां 50 वर्ष से अधिक पहले जगन का जन्म हुआ था। यह गांव नयापुरा के पास है, जो बसई डांग थाना क्षेत्र में आता है और यहां तक पहुंचने के लिए धौलपुर से आठ मील या बाडी होकर बाबू महाराज को जाने वाले रास्ते के बीच में होकर जाना पड़ता है। जगन ने अन्य बच्चों के साथ ही अपना बचपन गुजारा। स्कूल की चौखट आज तक नहीं देखी। गांव में तब भी डाकू और बदमाशों की आमद रफत रहती थी। जो जगन को पसंद थी। 1970- 80 के दशक में कई डाकू थे और बीहड़ में राधाचरण गिरोह का दबदबा था। जिसका प्रभाव जगन पर पड़ा और वह छोटी-छोटी बातें करने लगा। 1994 में उसके विरुद्ध पहला मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। उसके बाद मामले दर्ज हुए हुए। पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट की धाराओं में 1996 में गिरफ्तार किया। जहां से वह जमानत पर रिहा हो गया 1998 में जगन का नाम सुर्खियों में आया। पुलिस की दवाब गांव में बढ़ा। तो अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को राजस्थान की सीमा से दूर भेज दिया। जगन की मां बाड़ी क्षेत्र में ही कहीं रहती है, मगर पुलिस के पास उसकी कोई जानकारी नहीं है। पिता शिव चरण गुर्जर बाबू महाराज के मंदिर का भगत है। जगन के भाई पान सिंह, लाल सिंह व पप्पू जगन के साथ बीहड़ में आ गए पुलिस कहती है कि जगन के विरुद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। 2002 में बाडी के बटेश्वर गांव में ग्रामीणों को जबरदस्त पीटा और एक व्यक्ति की हत्या की थी। इस गांव में उनकी की बहन रहती थी और उसके बहनोई को गांव के दबंग लोग परेशान करते थे। उसने खुद कुदिन्ना में एक महिला को लेकर जबरदस्त आतंक फैलाया और लाठी तथा बटों से पीटा। इससे जगन का आतंक पड़ा। नयापुरा गांव में उसने 2 लोगों की हत्या की। बाद में ए एस आई पुलिस बाबूलाल की हत्या की। जगन बाद में जब चर्चा में आया जब यह एके 56 राइफल के साथ देखा गया और उसमें 31 जनवरी 2003 को करौली में पुलिस के समक्ष समर्पण किया, मगर राइफल 315 बोर की थी। पुलिस ने आज तक पता नहीं लगाया कि वह राइफल एके 56 कहां गई। बाद में यह फिर फरार हुआ और बीच में अपनी बेटी की शादी करने के लिए पैरोल पर जेल से रिहा हुआ। मगर इसके डीएनए में अपराध भरे हैं। इसलिए अब शांति से नहीं रहता है। कुछ समय पहले ही इसने भरतपुर परिक्षेत्र की आईजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष समर्पण किया, मगर कोई भी हथियार समर्पण के समय नहीं दिया। पुलिस कोई खास नहीं कर पाई है। यह बार-बार समर्पण करता है। कुछ दिन जेल में रहता है, फिर जेल से बाहर आ जाता है। ग्रामीण परेशान है क्योंकि 12 जून को गांव करण सिंह का पुरा में जाकर दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर उन्हें गांव में घुमाया। इस घटना के बाद इसे पकडऩे के लिए निरंतर पुलिस के प्रयास हो रहे हैं, मगर इन प्रयासों का कोई भी सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहा है। यह जब कोर्ट में हाजिर होता है , तो इसके भाई बीहड़ में रह जाते हैं, जो गवाहों को होस्टाइल करते हैं  जिससे कोर्ट में इसके विरुद्ध कोई भी आरोप साबित नहीं हो पाता है और ना ही गवाह बयान  देते हैं। इसलिए कोर्ट से जमानत पर आ जाता है और फिर पक्षी की तरह वापस अपराधों की दुनिया में पहुंच जाता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इसका नेटवर्क पुलिस से मजबूत है और इसका मुखबिर तंत्र भी प्रभावशाली है। यह बेहद चतुर किस्म का है और उसे मालूम है कि गंभीर घटना के बाद पुलिस का दबाव बढ़ेगा। तो वो बीहड़ छोड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाता है। इसीलिए फिलहाल उम्मीद नहीं है कि डाकू जगन का आतंक चंबल बीहड़ से खत्म होगा और ग्रामीण चैन की नींद सो पाएंगे।