शुरू हुई अब राजनीतिक नियुक्तियों की चर्चा

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  • बैठक के बाद प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा, मंत्रिपरिषद विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां जल्द होंगी
  • पायलट ने कहा, बसपा छोड़कर बिना शर्त कांग्रेस में आए हैं विधायक, मीडिया उन विधायकों को नए नए आइडिया नहीं दे
  • बसपा से विधायक मंत्री पद के लिए लिए नहीं जनता की सेवा के लिए कांग्रेस में आए हैं 
  • कई नेताओं ने बसपा छोड़ कांग्रेस में आए छह विधायकों को मंत्री नहीं बनाने की उठाई मांग, कहा, इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा
  • पांच साल तक कांग्रेस में काम करने वालों को राजनीकि नियुक्तियों में मिलेगी प्राथमिकता : पायलट

जयपुर
कांग्रेस सत्ता संगठन की साझा बैठक में राजनीतिक नियुक्तियों, निकाय चुनाव से की तैयारियों और ग्राउंड रियलिटी का मुद्दा छाया रहा। कांग्रेस की बैठक में कई पदाधिकारियों ने जल्द राजनीतिक नियुक्तियां करने की मांग उठाई, बैठक में बसपा छोड़ कांग्रेस मेंं आए छह विधायकों को मंत्री पद नहीं देने का मुद्दा भी उठा। मंत्रिपरिषद में जल्द विस्तार हो सकता है, बोर्ड, निगम और आयोगों में राजनीतिक निुयक्त्यिों के भी जल्द होने के आसार है। प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कांग्रेस की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां जल्द करने की बात कही। कांग्रेस की बैठक के दौरान कई पदाधिकारियों ने जल्द राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने पर गलत मैसेज जाने की बात कही, एक मंत्री और कुछ पदाधिकारियों ने टुकड़ों में राजनीतिक नियुक्त्यिां करने की बजाय एक साथ राजनीतिक नियुक्त्यिां करने का सुझाव दिया। कांग्रेस के मंथन में निकाय प्रमुखों के सीधे चुनाव नहीं करवाने की कई पदाधिकारियों ने मांग उठाई। कांग्रेस की बैठक में बसपा छोड़ कांग्रेस में आए छह विधायकों को मंत्री नहीं बनाने की बात भी उठाई गई। पीसीसी वीफ सचिन पायलट ने बैठक के बाद साफ कहा है कि बसपा छोड़कर विधायक बिना शर्त कांग्रेस में आए हैं। मीडिया उन विधायकों को नए नए आइडिया नहीं दे,ये विधायक मंत्री पद के लिए लिए नहीं जनता की सेवा के लिए कांग्रेस में आए हैं। सचिन पायलट के बयान से यह साफ है कि कांग्रेस संगठन बसपा से आने वाले विधायकों को मंत्री पद देने के पक्ष में नहीं है, पायलट  का इशारा साफ है कि मंत्री पद और राजनीतिक नियुक्तियों में कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ताइों को पहले मौका मिलेगा। बैठक के दौरान भी बसपा से आने वाले विधायकों को मंत्री पद नहीं देने की बात उठाई गई। अब सबकी निगाहें मंत्रिपरिषद विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर रहेगी, उस वक्त देखना होगा कि बसपा से आने वाले विधायकों को जगह मिलती है या नहीं।