एसएमएस अस्पताल में हो सकेंगे हार्ट ट्रांसप्लांट, 20 करोड़ की लागत से ओटी बनकर तैयार

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जयपुर
एसएमएस अस्पताल में लीवर, किडनी के बाद अब हार्ट ट्रांसप्लांट हो सकेगा। जिससे मरीजों को ट्रांसप्लांट के लिए राज्य के बाहर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही ब्रेन डेड मरीज से मिलने हार्ट को बाहर नहीं भेजना पड़ेगा। बांगड़ परिसर स्थित सैकंड फ्लोर पर करीबन 20 करोड़ की लागत से हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू तथा वार्ड बनकर तैयार है। कॉलेज व स्पेशलिस्ट के स्तर पर ओटी का निरीक्षण भी किया जा चुका है। प्रदेश में सरकारी स्तर पर हार्ट ट्रांसप्लांट सुविधा उपलब्ध कराने वाला राज्य का पहला अस्पताल होगा। हार्ट फेल्योर मरीज की एंजियोग्राफी, फेफड़ों व अन्य जांच में हरेक तरह से सही पाए जाने पर ही डोनर का हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

ये होगा खास :                                                                                                                                                      कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी विभाग के डॉ.अनिल शर्मा का कहना है कि यहां पर न केवल माड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बल्कि दो बैड की ऐसी आईसीयू बनाई गई है। जहां पर दिल के मरीजों के किसी तरह का संक्रमण नहींं लग सकेगा। मेडिकल भाषा में हाई डिपेन्डेसी यूनिट के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा पोस्ट आपरेटिव वार्ड, जांच सुविधा व चेजिंग रुम बनाया गया है। डॉ.शर्मा ने बताया कि अब दिल हार नहीं मानेगा और ना ही उसकी धड़कन रुकेगी। ट्रांसप्लांट में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसे 4 घंटे के अंदर ट्रांसप्लांट करना पड़ता है। बहुत से ऐसे मरीज होते हैं कि जिनका दिल सिर्फ 20 फीसदी ही काम कर रहा होता है। लेकिन उनके हार्ट फेल्योर लक्षण नहीं दिखते हैं। कुछ मरीजों 20 फीसदी से अधिक हार्ट काम करने पर भी उन्हें चलने फिरने तक में परेशानी होती है।

कहां-कहां सुविधा : हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल सीतापुरा, नारायणा मल्टीस्पेशलिटी प्रतापनगर, ईटरनल हॉस्पिटल मालवीय नगर व फोर्टिस अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है। आरएनओएस वेबसाइट के अनुसार वर्ष -2015 से अब तक 30 डोनर के सहयोग से 99 लोगों को जिन्दगी मिल चुकी है। इनमें से 53 लोगों को किडनी, 28 के लीवर, 16 के हार्ट, एक-एक के लंग्स व पेन्क्रियाज ट्रांसप्लांट किया जा चुका है।

इन्हें हार्ट ट्रांसप्लांट की जरुरत : डॉक्टरों के अनुसार बाईपास सर्जरी, एंजियोग्राफी, वाल्व रिप्लेसमेंट, ऑटोमेटेड इंप्लांटेबल कार्डियोवेरटेर, डीफ्रीब्रीलेटर, वाइवेट्रीकुलर पेसमेकर, लेफ्ट वेंट्रीकुलर असिस्ट डिवाइस तथा अंत में हार्ट ट्रांसप्लांट का ही विकल्प होता है। 

देश में हर साल 50 हजार हार्ट की जरुरत 
एसएमएस अस्पताल के कार्डियोलोजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.एस.एम.शर्मा का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली ने दिल के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीमारी 20 से 30 साल की उम्र के युवाओं मे ज्यादा देखने को मिल रही है। हैरानी की बात यह है कि हर साल देश में करीबन 50 हजार हार्ट पेशेंट को ट्रांसप्लांट की जरुरत होती है। जबकि देशभर में 350 हार्ट ट्रांसप्लांट होने की संभावना है।