सुशासन के लिए बालोतरा जिला निर्माण की महत्ती आवश्यकता

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  • बालोतरा को जिला घोषित किया जाना आवश्यक - 55 वर्ष पुरानी मांग
  • बालोतरा जिला निर्माण एवं विकास समिति का विस्तृत प्रस्ताव
  • वस्त्रों की रंगाई, छपाई, ग्रेनाइट के भंडार, रिफाइनरी और धार्मिक पर्यटन स्थलों का केन्द्र
  • तत्संबंधित गठित समिति का प्रतिवेदन भी सरकार को प्रस्तुत शीघ्र निर्णय का इंतजार 

जोधपुर
सुशासन आश्वस्त करने के लिए थार के विस्तार में जिस प्रकार फलौदी को एक नया जिला गठित करने की आवश्यकता है (जलते दीप, 14 जून 2019) उसी प्रकार बालोतरा को भी एक नए जिले का स्वरूप दिए जाने की उतनी ही आवश्यकता है। राजपूताने की रियासतों को एकीकृत कर जब नये जिलों का गठन किया जा रहा था, तब राज्य सरकार ने बाड़मेर की बजाय बालोतरा को ही जिला मुख्यालय बनाने का निर्णय किया था। कहा जाता है कि उस समय सम्पत राज भंडारी तत्कालीन आई.ए.एस. अधिकारी ने बालोतरा आकर जिला कार्यालय हेतु भवन किराए पर लेने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण बाड़मेर को जिला मुख्यालय बना दिया गया। बालोतरा के प्रबुद्ध लोगों ने कांलातर में एक 'बालोतरा जिला निर्माण एवं विकास समिति' गठित कर ली एवं उसके तत्कालीन संयोजक मेवाराम मेहता बालोतरा को जिला घोषित कराने के लिए संघर्षरत रहे। तत्कालीन संभागीय आयुक्त, आर.के.जैन ने मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार को एक पत्र दि. 8-6-2011 लिख कर पश्चिम राजस्थान की दूरियां दृष्टिगत रखते हुए फलौदी व बालोतरा को पृथक जिला गठित करने का प्रस्ताव प्रेषित किया था। उक्त पत्र मेें उन्होने ध्यान दिलाया कि बड़े जिले के कलेक्टर की व्यस्तता के कारण भारत सरकार एवं राज्य सरकार की कई योजनाओं की धन राशि की क्रियान्विती भली भांति नहीं हो पाती है उपलब्ध धन राशि प्रति वर्ष लैप्स होती है। उन्होंने उक्त पत्र में आयोजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया के जालौर भ्रमण के दौरान हुई वार्ता का भी हवाला दिया जिसमें उपाध्यक्ष ने मरूधरा क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए छोटे जिले बनाए जाने में योजना आयोग द्वारा सहूलियत उपलब्ध कराने की संभावना का आश्वासन दिया था। बालोतरा में जहां वस्त्रों की रंगाई व छपाई का बहुत बड़ा काम है, वहां ही इसके आस-पास के क्षेत्र में ग्रेनाइट खनिज के भंडार है। अब तो पचपदरा में आयल रिफाइनरी के स्थापित होने से इस क्षेत्र के विकास व सुगम प्रशासन की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यहां नाकौड़ा जी जैन तीर्थ, ब्रह्मा जी मंदिर आसोतरा ब्रह्म धाम, राणी भटियाणी मंदिर जसौल, रणछोडऱाय खेड़ मंदिर, वीर दुर्गादास की जन्म स्थली आदि विख्यात पर्यटन स्थलों की श्रंृखला है। हाल ही में बालोतरा में शिक्षा की आधुनिकतम सुविधाएं, होटल व रिसोर्ट भी विकसित हो गये है। बाड़मेर जिले का जिला एवं सत्र न्यायाधीस का कार्यालय तो आरंभ से ही यहां बालोतरा में स्थित है। बालोतरा जिले में तहसील पचपदरा, तहसील सिवाणा, तहसील सिणधारी (आंशिक) व उपतहसील गिड़ा को समाविष्ठ किया जाना प्रस्तावित था। ताकि भौगोलिक रूप से प्रबंध योग्य एक प्रशासनिक इकाई बन सके। तत्कालीन राज्य सरकार ने नए जिले गठित करने के ये प्रस्ताव एक सेनानिवृत आई.ए.एस. अधिकारी की अध्यक्षता में वर्ष 2012 में एक समिति गठित कर उन्हो सौंप दिए थे। बालोतरा जिला निर्माण एवं विकास समिति की ओर से संयोजक मेवाराम मेहता ने विस्तृत विवरण के साथ दि. 25.08.2012 को बालोतरा को जिला घोषित करने के प्रस्ताव उक्त समिति को प्रेषित किए थे। अब उक्त समिति ने अपना प्रतिवेदन भी राज्य सरकार को प्रस्तुत कर दिया है। इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह है कि पूर्व मे नव गठित प्रशासनिक इकाईयों का व्यय भार राज्य सरकार को गैर-आयोजना मद अर्थात् स्वयं अर्जित आय में से करना होता था। लेकिन अब भारत सरकार द्वारा आयोजना मद-गैर आयोजना मद का भेद समाप्त कर दिया गया है। अर्थात राज्य सरकार अब भारत सरकार से प्राप्त धन राशि में से यह व्यय कर सकती है। आशा है कि बदले हुए परिवेश में फलौदी एवं बालोतरा को शीघ्र नये जिले घोषित किए जायेंगे, ताकि समग्र विकास की गति तीव्र हो सके, राज्य व केन्द्र सरकार की लोक कल्याण की योजनाओं मेंं उपलब्ध धन राशि पूर्ण रूप से व्यय हो सके तथा जनता को समीपस्थ सुगम समस्या का समाधान मिल सके।

फोटो
      1. बालोतरा का वस्त्र उघोग
      2. नाकोडा जी जैन तीर्थ
      3. प्रस्त्तावित नक्शा
      4. डी.पी. एस स्कूल बालोतरा
      5. राज रिजोर्ट, बालोतरा
      6. आर. के. जैन