शिक्षा विभाग की जांच में फर्जी परिणामों और अनियमिताओं का खेल उजागर!

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गंगापुरसिटी की एक निजी शिक्षण संस्था - डी.एस.सांइस एकेडमी की मान्यता वापस लिये जाने की अभिशंषा  

  • बड़े और भ्रामक विज्ञापन देकर स्टूडेंट्स और अभिभावकों को किया गया गुमराह 
  • जांच दल ने की एकेडमी की मान्यता वापस लिये जाने की अभिशंसा 

जयपुर/गंगापुरसिटी
निजी स्कूलोंं एवं शिक्षण संस्थाओं द्वारा किये जा रहे भ्रामक प्रचार और अनियमिताओं के प्रति सरकार ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिये है। ऐसे ही एक मामले में कोटा के कोचिंग सेंटरो में उच्च रेंक प्राप्त छात्रों को अपने स्कूल में डमी और फर्जी एडमिशन के जरिये थोथी लोकप्रियता प्राप्त करने की कोशिश कर रही गंगापुरसिटी की शिक्षण संस्था डी.एस.साइंस एकेडमी के फर्जीवाडे की शिकायत पर कार्यवाही करते हुये शिक्षा विभाग द्वारा कराई गयी जांच में डी.एस.साइंस एकेडमी को कई मामलों में गम्भीर अनियमितताओं का दोषी पाये जाने पर जांच दल ने अपनी रिपोर्ट मे डी.एस.साइंस एकेडमी की मान्यता को वापस लिये जाने की राज्य सरकार से अनुशंसा की है। जांच रिपोर्ट को गम्भीरता से लेते हुये राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के शासन उपसचिव महेश कुमार गेरयानी ने डी. एस. साइंस एकेडमी के संचालक को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिये 17 जून को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। राज्य सरकार के आदेश पर हुई जांच में जांच दल ने अपनी लगभग 1200 पेज की रिपोर्ट में डी. एस. साइंस एकेडमी को कई मामलों में गम्भीर अनियमितताओं का दोषी मानते हुये राज्य सरकार को तथ्यात्मक प्रतिवेदन में जानकारी दी है कि उक्त संस्था ने अपने स्कूल डी.एस.साइंस एकेडमी की मान्यता भी नियम विरुद्ध तरीके से ली है। जांच दल ने कोटा की कोचिंग संस्था एलन के प्रतिभाशाली छात्रों के नाम डमी/फर्जी एडमिशन के जरिये डी. एस. साइंस एकेडमी में लिखकर झूठे विज्ञापन के जरिये लोगो को गुमराह करने का दोषी माना है। इन सभी बिन्दुओं के अतिरिक्त अन्य कई बिन्दुओं पर की गयी जांच में जांच अधिकारी ने डी. एस. साइंस एकेडमी को अनियमितताओं का दोषी मानते हुये राज्य सरकार से डी.एस.साइंस एकेडमी की मान्यता वापस लिये जाने की स्पष्ट अनुशंसा की है। शिक्षा विभाग ने जांच दल की रिपोर्ट को गम्भीरता से लेते हुये डी. एस. साइंस एकेडमी की मान्यता समाप्त करने से पहले उसे सुनवाई का एक मौका देते हुये 17 जून को सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सभी आरोपों का जवाब देने के लिये संस्था संचालक को नोटिस जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट में डी.एस. सांइस एकेडमी के खिलाफ जो आरोप बताए गए है, यदि उन पर कार्रवाई हुई तो संस्था के खिलाफ स्टूडेंट्स एवं अभिभावकों से धोखाधड़ी करने की एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। 

मीडिया में डी.एस.साइंस एकेडमी के फर्जीवाड़े की खबर वायरल होने पर हरकत मेंं आया शिक्षा विभाग                                          प्रदेश में सर्वप्रथम एक फेसबुक चैनल पर इस खबर के प्रसारित होने के बाद राजस्थान के एक लोकप्रिय टी. वी. चैनल ने डी.एस. साइंस एकेडमी के फर्जीवाडे को उजागर किया था। गन्दा है पर धन्धा है के शीर्षक से देश-प्रदेश भर मे सुर्खियों में रही खबर के कारण शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी हरकत में आये और इस बहुचर्चित मामले की जांच शुरू हुई। यदि मीडिया इस खबर को प्रसारित नहीं करता तो शायद ही इस सच्चाई की जानकारी आम जनता तक पहुंचती। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के एक लोकप्रिय दैनिक समाचार पत्र ने भी इस सम्बन्ध में प्रदेश की प्रमुख खबरों में निजी स्कूलों पर अब सरकार और सख्त हेडिंग बनाकर फर्जी शिक्षण संस्थाओं के फर्जीवाड़े को उजागर करते हुये जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया था। टी.वी.चैनल ने अनेक बार जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर खबर का असर के रूप में फर्जीवाड़े की हकीकत को आम जनता के समक्ष प्रस्तुत किया था। पुख्ता सूत्रों के हवाले से डी.एस. साइंस एकेडमी के संबंध में की गई विभागीय जांच में संस्था के निम्न फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। 
1. जांच दल ने पाया है कि जेईई मेन्स 2019 के परीक्षा परिणाम में छात्र निशांत अंभागी (AIR-I) टॉपर रहा है। जबकि डी.एस. साइंस एकेडमी ने अपने विज्ञापन में छात्र अवधेश प्रसाद को राजस्थान टॉपर बताया था। जो कि झूठा साबित पाया गया। 
2. जांच दल को कोटा की सुप्रसिद्ध कोचिंग संस्था एलन ने छात्र अवधेश प्रसाद के नियमित रूप से दो वर्ष से एलन कोचिंग में अध्ययन करने संबंधी सभी प्रमाणिक व ऑनलाइन दस्तावेज उपलब्ध कराए, जो कि सभी विद्यार्थियों के समान होते है। इससे साबित हुआ कि डी.एस. साइंस एकेडमी में छात्र अवधेश प्रसाद का डमी एडमिशन दिखाया था, जो कि विभागीय नियमों के विपरित है। 
3. छात्र अवधेश के अलावा  दो अन्य छात्र गर्वित सिंघल और अमित गहडवाल भी डी.एस. साइंस एकेडमी के सत्र-2018-19 में नियमित छात्र नहीं रहे है।  
4. जांच दल ने जेईई मेन्स के परीक्षा परिणाम में डी. एस. साइंस एकेडमी में अध्ययनरत 171 विद्यार्थियों के चयन की सच्चाई जानने के लिये सभी विद्यार्थियों के रिकार्ड की जांच की, जिसमें भी भारी अनियमितता मिली। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के नाम प्राइवेट स्कूल ऑनलाइन पोर्टल पर दर्शा रखे है। जेईई मेन्स के परीक्षा परिणाम में डी. एस. साइंस एकेडमी में अध्ययनरत 171 विद्यार्थियों के चयन के दावे को जांच दल ने गलत बताते हुये कहा कि पोर्टल पर बहुत से विद्यार्थियों के नाम नही मिले जबकि डी. एस. साइंस एकेडमी ने झूठे विज्ञापन के जरिये यह दावा किया था कि जेईई मेन्स के परीक्षा परिणाम में उसके स्कूल के 171 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। 
5. जांच दल ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी माना है कि डी.एस. साइंस एकेडमी ने पूर्व के वर्षों में भी इसी तरह भ्रामक विज्ञापन देकर लोगों को भ्रमित किया। 
6. डी.एस. साइंस एकेडमी के मान्यता संबंधी दस्तावेजों में भी जांच दल को गंभीर अनियमितताएं मिली है।

पिछले कई सालों से चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल, टॉपर विद्यार्थियों के नाम का होता था उपयोग ! डी.एस. के ही विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़े को किया था उजागर                                                                                                            अब सवाल यह है कि आखिर डी. एस. साइंस एकेडमी को ऐसी क्या जरूरत पड़ गयी कि उसे इस प्रकार के झूठ का सहारा लेकर मीडिया मे अपनी उपलब्धियों का प्रचार करना पड़ा? जब इस सवाल के लिये खोजबीन शुरू की गयी तो पता लगा कि डी. एस. साइंस एकेडमी पिछले तीन साल से इसी प्रकार के झूठ के सहारे अपनी संस्था का प्रचार-प्रसार कर क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों को गुमराह कर रहा है। सोशल मीडिया पर प्रकाशित डी. एस. साइंस एकेडमी के कुछ विद्यार्थियों ने ही फेसबुक पर अपनी पोस्टों में दावा किया गया है कि पिछले साल 2018 में भी इसी प्रकार आईआईटी जेईई मेन्स 2018 के परीक्षा परिणाम में ऑल इण्डिया में 224वीं रेंक और एस.टी वर्ग मे सेकण्ड रेंक प्राप्त छात्र जतिन मीना को भी डी. एस. साइंस एकेडमी की फाउंडेशन कक्षाओं का नियमित छात्र बताते हुये मीडिया मे झूठा प्रचार-प्रसार किया था। जबकि वास्तविकता में छात्र जतिन मीना कोटा की कोचिंग संस्थान रेजोनेंस का नियमित स्टुडेण्ट रहा था। इस सम्बन्ध में कोचिंग संस्थान रेजोनेंस ने मीडिया में सच बताकर लोगों को सच्चाई से अवगत कराया था। इस के अतिरिक्त और भी कई ऐसे छात्र रहे है जो वास्तविकता में कोचिंग तो कोटा की प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थाओं में करते थे और डी. एस. साइंस एकेडमी में डमी और फर्जी एडमिशन के जरिये उनकी उपलब्धियों का श्रेय डी. एस. साइंस एकेडमी को मिल जाता था। लेकिन सवाल यह है कि आखिर किन कारणों से डी. एस. साइंस एकेडमी को इस प्रकार झूठ का सहारा लेना पड रहा है।

पढ़ाई के स्तर में भारी गिरावट आने से रची साजिश
सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ सालों से डी. एस. साइंस एकेडमी में पढाई के स्तर मे भारी गिरावट आने के चलते और कमजोर फेकल्टियों की नियुक्ति के कारण इस संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बहुत नुकसान उठाना पड रहा था। इस कारण बेहतर रिजल्ट भी नहीं आने से भविष्य में संस्था को एडमिशन मिलने में परेशानी होना स्वभाविक था। माना जा रहा है कि इसी परेशानी से स्थाई रूप से समाधान पाने के लिये डी. एस. साइंस एकेडमी के संचालक ने इस तरह के खेल खेलना शुरू किया। लोग इस खेल को समझ नही पाये लेकिन डी. एस. साइंस एकेडमी के विद्यार्थियों को यह झूठ नागवार लगा और उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लेकर डी. एस. साइंस एकेडमी के झूठ को बेनकाब करना शुरू कर दिया। डी. एस. साइंस एकेडमी के विद्यार्थियों ने बताया कि वे भी संस्था के झूठे प्रचार के चक्कर में आकर अपना भविष्य खराब कर बैठे है, लेकिन वे नही चाहते है कि अन्य विद्यार्थियों का भविष्य भी उनकी तरह खराब हो इस  इसी कारण सोशल मीडिया पर सच्चाई देनी पड़ी है। 

संचालक ने माना जांच हुई, 17 जून को व्यक्तिगत बुलाया है
डी. एस. साइंस एकेडमी के संचालक उमेश शर्मा से हमने बात की और इस विषय में जानकारी लेने पर उन्होंने माना कि हां, जांच दल आया था, उन्होंने जांच कर कई दस्तावेज मांगे थे और विभाग से 17 जून को व्यक्तिगत उपस्थित होने का आदेश भी हमें प्राप्त हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा संस्था का पक्ष उनके सामने रख देंगे। 

डी.एस. साइंस एकेडमी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
कोटा के कोचिंग सेंटरो में उच्च रेंक प्राप्त छात्रों के अपने स्कूल में डमी और फर्जी एडमिशन के जरिये थोथी लोकप्रियता प्राप्त करने की कोशिश कर रही गंगापुरसिटी की संस्था डी.एस.साइंस एकेडमी के फर्जीवाड़े की खबर सोशल मीडिया, न्यूज चैनल और समाचार-पत्रों में प्रकाशित होने के बाद अब क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभभिावकों में भी डी.एस. सांइस एकेडमी के खिलाफ गुस्सा है। गंगापुर सिटी निवासी छात्र रोहित ने बताया कि उनके पिता ने समाचार-पत्रों में उक्त संस्था की उपलब्धियों को पढ़कर उसका एडमिशन उक्त संस्था में कराया। संस्था में बार-बार फेकल्टियों के बदले जाने, अनुशासन का स्तर बहुत खराब होने एवं समय पर कोर्स पूरा नहीं करने के कारण उसका भविष्य खराब हो गया। डी.एस. साइंस एकेडमी में अध्ययनरत छात्र महेश के पिता ने बताया कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े से संस्था में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ गया है, क्योंकि अधिकांश विद्यार्थियों ने समाचार-पत्रों में प्रकाशित उपलब्धियों आदि को देखकर ही अपना प्रवेश इस संस्था में कराया था। क्षेत्र के कई अभिभावक इस संबंध में राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिकायत कर डी.एस. साइंस एकेडमी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे है। 

फ्री डेमो क्लासेज और टॉपर विद्यार्थियों की फीस माफ करने के प्रलोभन में होते थे अधिकतर एडमिशन                                  राज्य सरकार की और से कराई गयी जांच मे डी. एस. साइंस एकेडमी के फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलती चली गई। जांच में समाने आया कि फर्जी परीक्षा परिणामों के साथ साथ डी. एस. साइंस एकेडमी मे एडमिशन बढ़ाने के लिये टॉपर स्टूडेण्ट को विशेष प्रलोभन देकर और उसकी फीस माफ कर संस्था में एडमिशन देने का खेल भी खेला जाता रहा है। सूत्रों ने बताया कि इस खेल से टॉपर विद्यार्थियों को देखकर अन्य विद्यार्थी भी अपना एडमिशन डी. एस. साइंस एकेडमी में करा लेते थे। इतना ही नही प्रारम्भ के माह में फ्री डेमो क्लासेज में भी इस संस्था ने कोटा और जयपुर की फेकल्टियों के माध्यम से नवीन प्रवेश के लिये आने वाले विद्यार्थियों को गुमराह कर उनके एडमिशन संस्था में कराने में कामयाबी प्राप्त की। छात्रों का कहना है कि एक-दो माह बाद उन फेकल्टियों को बदलकर उनके स्थान पर स्थानीय स्तर की साधारण फेकल्टियों को वापिस नियुक्त कर दिया जाता था। इस खेल में डी. एस. साइंस एकेडमी को लाखों रूपए की बचत होती थी लेकिन कोटा और जयपुर की फेकल्टियों को देखकर अपना एडमिशन संस्था में कराने वाले विद्यार्थियों के भविष्य  के साथ खिलवाड़ होने से वे पढ़ाई में और भी अधिक पिछड़ जाते थे। डी.एस.साइंस एकेडमी के एक छात्र के अभिभावक रमेशचन्द ने बताया कि डी. एस. साइंस एकेडमी के फर्जी परीक्षा परिणामों से विश्वास में आकर जब उन्होंने अपने पुत्र को फ्री डेमो क्लास मे भेजा था उस समय संस्था की फेकल्टी कोटा और जयपुर के स्तर की थी, जिसे देखकर ही उन्होंने अपने पुत्र का और अन्य बहुत से विद्यार्थियों ने अपना एडमिशन डी. एस. साइंस एकेडमी में करा दिया लेकिन कुछ समय के बाद ही वे सभी फेकल्टियां संस्था से अचानक गायब हो गयी और उनके स्थान पर स्थानीय स्तर की सामान्य फेकल्टियों ने ही पूरे साल कार्य किया। उसके बाद भी वे विद्यार्थियों को निर्धारित कोर्स भी पूरा नही करा पाये इस कारण उनके पुत्र और अन्य विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया । 
अभिभावक रमेशचन्द ने सभी जागरूक लोगों से कहा है कि वे फर्जी परिणामों का विज्ञापन देखकर और फ्री डेमो क्लासेज आदि के लालच में ना आये। जिस भी संस्था में एडमिशन कराये उस संस्था की पूरी जांच कर के ही अपने बच्चे को एडमिशन कराये। सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग की जाँच में भी यह साबित हुआ है की अधिकांश स्टॉफ विभागीय नियमों के अनुसार योग्यताधारी नहीं है जो की मान्यता नियमों की स्पष्ट अवहेलना है।