हमारी विदेश नीति के अधिकांश मूल्य गांधी दर्शन से संचालित होते हैं : श्रीवास्तव

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जयपुर
गांधी अध्ययन केन्द्र, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि ''भारत की विदेश नीति: सॉफ्ट पॉवर के रूप में गांधी" विषय पर गांधी अध्ययन केन्द्र में व्यख्याान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में बी. एच. यू. बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय वाराणसी में के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव थे। प्रो. श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की विदेश नीति अपने राष्ट्रीय हितों का तो संरक्षण करती ही है साथ ही वह वैश्विक हितों के साथ भी सामंजस्य रखती है। हमारी विदेश नीति के अधिकांश मूल्य गांधी दर्शन से संचालित होते हैं। भारत की विदेश नीति जो केवल शस्त्रों पर, सेना पर आधारित न होकर गांधी दर्शन से अनुप्रमाणित हैं। गांधी दर्शन से हमारे राजनीतिक मूल्यों में सत्य, अहिंसा, विश्व बन्धुत्व, निशस्त्रीकरण, आदि तत्व शामिल हुए गांधी ने विदेश नीति की सॉफ्ट पॉवर को एक आकार प्रदान किया। भारत ने लम्बे इतिहास में कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया शान्ति पर चलना, आगे बढ़कर किसी राष्ट्र पर आक्रमण नहीं करना गांधी दर्शन का विदेश नीति में प्रभाव को दर्शाता है। भारत की विदेश नीति में सॉफ्ट पॉवर के रूप में भारतीय संस्कृति पर भी गांधी को गर्व था। गांधी का निहितार्थ ही यह था कि हम जब एक बडी संस्कृति हैं तो हमें पूरे विश्व को संस्कृति और मूल्यों का पाठ पढ़ायें जाने की आवश्यकता है। हमारी विदेश नीति के निर्माताओं पर गांधी दर्शन ने एक गहरी छाप छोड़ी थी जिसका प्रभाव भारत की विदेश नीति में सॉफ्ट पॉवर के रूप में स्पष्ट दिखाई देता हैं। गांधी अपने सत्याग्रहियों के लिए उनके सामाजिकरण की बात करते है। सत्याग्रह को विचारधारा के रूप में स्वीकार करना आवष्यक है जिसमें अहिंसा को सत्य को उसे स्वीकार करना होगा। गांधी मानते थे कि हमारे लिए जो सत्य, अहिंसा, भ्रातत्व आदि मूल्य महत्वपूर्ण है जो विष्व के लिए भी अनुकरणीय है। गांधी इसीलिए राष्ट्रीय आन्दोलन के अन्य नेतृत्वकत्र्ताओं से अलग थे। सविनय, असहयोग, चम्पारण, खेड़ा आदि शान्तिवादी आन्दोलनों का प्रभाव भारत की विदेष  नीति में भी दिखाई पड़ता है। गांधी के प्रभाव से बडी संख्या में सत्याग्रही तैयार हुए जिनका भारत की विदेष नीति पर भी व्यापक  प्रभाव पडा। गांधी के शान्ति आन्दोलनों का सत्य, अहिंसा से गहरा नाता था, जिसका भारत की विदेष नीति पर गहरा प्रभाव पडा। अहिंसक होकर कैसे लडा जा सकता है ? अहिंसा सफल कैसे हो सकती है ? गांधी दर्षन की यह सीख पूरे विष्व के लिए अनुकरणीय रही हैं। जिसने विष्व में भारत की छवि एक शान्तिवादी देष के रूप में बनाई हैं। गांधी के सत्य और अहिंसा की वजह से गांधी को शान्ति का अग्रदूत माना गया। पूरे विष्व ने शान्ति के अग्रदूत के रूप में गांधी को स्वीकार किया है। गांधी के महत्वपूर्ण होने से भारत का महत्व बढ़ा और भारत की विदेष नीति में साफ्ट पॉवर का महत्व बढ़ा। जैसे भारत के पास भी परमाणु बम है मगर विष्व में चीन या पाकिस्तान के पास परमाणु बम होने से विष्व की जो  चिंताऐं नजर आती हैं वह भारत के परमाणु कार्यक्रम के साथ दिखाई नही देती हैं क्योकि भारत के परमाणु कार्यक्रम का संबंध गांधी दर्षन से जो हैं विष्व में भारत को एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में शान्तिवादी गांधीवादी देष के रूप में पहचानते हैं। गांधी विष्व शान्ति के अग्रदूत हैं जिसका हमारी विदेष नीति में सॉफ्ट पॉवर पर गहरा और स्पष्ट प्रभाव परिलक्षित होता हैं। एक ओर गांधी दर्षन हमारी विदेष नीति को प्रभावित करता है तो दूसरी ओर गांधी भारत की सॉफ्ट पॉवर बन जाते हैं। कार्यक्रम के अन्त में व्याख्यान में भाग लेने वाले विधार्थी, शोधार्थी, षिक्षकों का केन्द्र के निदेषक डॉ. राजेष कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।