सिन्धी साहित्यकार ग्लोबल मुद्दों पर भी अपने विचार रखें-कलक्टर

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जयपुर
राजस्थान सिन्धी अकादमी द्वारा झालाना ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट, जयपुर में अखिल भारतीय सिन्धी लेखक एवं कवि सम्मेलन समारोह पूर्वक आयोजित किया गया। सम्मेलन में देशभर के सिन्धी साहित्यकारों ने सिन्धी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण व संवर्द्धन हेतु ''प्राइमरी लेवल ते मातृभाषा सिन्धी तालीम जी अहिमियत ऐं उपाव" एवं ''सिन्धी समाज जे रीतियुनि, रस्मुनि ते मकानी असर" विषयों पर विभिन्न सत्रों में अपने विचार प्रकट किये। 
उद्घाटन समारोह : सम्मेलन का उद्घाटन अतिथियों द्वारा ईष्टदेव झूलेलाल जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि जयपुर जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि सिन्धी साहित्यकार भी समय के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्हें अपनी भाषा एवं संस्कृति के साथ-साथ ग्लोबल मुद्दों पर भी अपने विचार रखने होंगे। हम सीमित दायरे में केन्द्रित रह कर उन्नति नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को आगे बढ़ाने का दायित्व साहित्यकारों का होता है। सिन्धी भाषा देश की सबसे प्राचीन, संस्कृत, मधुर एवं समृद्ध भाषा है एवं हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिये। समारोह की अध्यक्षता करते हुये अकादमी प्रशासक एवं जयपुर संभागीय आयुक्त के.सी.वर्मा ने अपने उद्बोधन में अकादमी की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि मातृभाषा किसी भी संस्कृति का प्राण होती है। भाषा एवं संस्कृति के विकास में साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। लेखक अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में भाषा के प्रति रूचि जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। सिन्धी भाषा का साहित्य अत्यन्त समृद्ध है। वर्तमान परिदृष्य में जहां आज की युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा एवं प्राचीन संस्कृति से विमुख होती जा रही है, ऐसे समय में लेखकों का यह दायित्व बनता है कि वह ऐसे साहित्य का संकलन कर समाज के सम्मुख रखे जिससे समाज के हर वर्ग का पाठक आकृषित हो तथा अपने वैभवशाली, समृद्धशाली साहित्य एवं संस्कृति को अक्षुण एवं विकसित बनाने में अपना योगदान दे। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से सिन्धी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के विकास के हर संभव प्रयास किये जायेंगे। समारोह की विषिष्ठ अतिथि उप शासन सचिव, कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग रंजीता गौतम, संयुक्त शासन सचिव, वित्त (व्यय-4) विभाग श्री मेवाराम जाट एवं भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार श्री भगवान बाबानी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा अकादमी की वार्षिक पत्रिका 'रिहाण' एवं अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। अकादमी द्वारा पाण्डुलिपि प्रकाशन सहयोग के अन्तर्गत पुस्तक प्रकाशन हेतु प्रति साहित्यकार 20 हजार रू. की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सत्र के अन्त में जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं "मुहिंजो वतन" पत्रिका के संपादक श्री हरीश मेंघानी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

प्रथम सत्र 
प्राइमरी लेवल ते मातृभाषा सिन्धी तालीम जी अहिमियत ऐं उपाव

सम्मेलन के प्रथम सत्र में अजमेर की वरिष्ठ साहित्यकारा डा0कमला गोकलानी ने "प्राइमरी लेवल ते मातृभाषा सिन्धी तालीम जी अहिमियत ऐं उपाव" विषय पर विस्तार से पत्र वाचन किया। सत्र अध्यक्ष जयपुर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्री भगवान अटलानी ने पत्र पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किये। पत्र पर प्रथम टिप्पणी ब्यावर के प्रो.अर्जुन कृृपलाणी ने की। सत्र के विशिष्ट अतिथि अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्री नरेश कुमार चंदनानी, उदयपुर के अकादमी के पूर्व सदस्य श्री राजेश खत्री समाजसेवी श्री चन्द्र वरयानी एवं समाजसेवी श्री मोहन नानकानी ने भी विचार व्यक्त किये।

द्वितीय सत्र 
सिन्धी समाज जे रीतियुनि, रस्मुनि ते मकानी असर

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में अहमदाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार डा.जेठो लालवानी ने "सिन्धी समाज जे रीतियुनि, रस्मुनि ते मकानी असर" विषय पर विस्तार से पत्र वाचन किया। सत्र की अध्यक्षता दिल्ली के वरिष्ठ साहित्यकार श्री हीरो ठकुर ने की। पत्र पर प्रथम टिप्पणी जयपुर के साहित्यकार श्री हरीश करमचंदानी ने की। सत्र के विशिष्ठ अतिथि अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्री प्रकाश टेकवानी, अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्री मोहनलाल वाधवानी एवं अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष श्री रमेश गुरसहानी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। 

खुला सत्र

सम्मेलन के खुले सत्र की अध्यक्षता भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री नारी लच्छवानी ने की। सत्र में विभिन्न साहित्यकारों ने सम्मेलन में प्रस्तुत पत्रों पर अपने-अपने विचार रखने के साथ कई सुझाव भी दिये एवं विषय वक्ताओं से कई प्रश्नों के उत्तर भी जानने चाहे। विषय विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। 

अखिल भारतीय सिन्धी कवि सम्मेलन

अखिल भारतीय सिन्धी कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अलीग? के वरिष्ठ साहित्यकार श्री अर्जुन चावला ने की। मंच संचालन कोटा के श्री किशन रतनानी ने किया। सम्मेलन में दिल्ली के वरिष्ठ कवि सर्वश्री हीरो ठकुर, भोपाल के नारी लच्छवानी एवं नन्द सन्मुखानी, अहमदाबाद के नरेश उदानी, रायपुर के कैलाश शदाब, अहमदाबाद के विक्रम शहाणी, जयपुर के हरीश करमचंदाणी, डॉ0खेमचन्द गोकलानी, वीना करमचंदानी, लक्ष्मण पुरसवाणी, सुश्री गायत्री, ब्यावर के प्रो0अर्जुन कृपलानी, बीकानेर के सुरेश हिन्दुस्तानी, जोधपुर की श्रीमती लीला कृृपलानी, भीलवा?ा के डॉ0एस0के0लोहानी "खालिस" एवं अजमेर के रमेश नारवानी "नींगर", ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार श्री लक्ष्मण भंभानी थे एवं मंच संचालन अजमेर की श्रीमती अनिता शिवनानी ने किया। अकादमी सचिव श्री ईश्वर मोरवानी ने सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।