फिडिक कॉन्टे्रक्ट पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

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जयपुर
डिजाइन बिल्ड़ एण्ड ऑपरेट फॅार्म ऑफ कॉन्ट्रेक्ट अर्थात फिडिक कॉन्टे्रक्ट, संवेदक एवं क्रियान्वयन विभाग को बराबरी का हक देता है, जिससे की एक मंच पर बैठ कर कॉन्टे्रक्ट के हित को भी देखा जा सकें। परियोजना कार्यों में इसका उपयोग करते हुये कार्यों को समय पर पूरा कर आमजन को तय समय सीमा में लाभ दिलाया जाये। ये विचार हैं राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना के परियोजना निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के। सोनी आज आरयूआईडीपी और एचसीएम रीपा के राजस्थान शहरी विकास केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में फिडिक कॉन्टे्रक्ट के सही इस्तेमाल के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन सत्र में बोल रहे थे। सोनी ने कहा की मुझे खुशी है कि आरयूआईडीपी ने डिजाइन बिल्ड़ एण्ड ऑपरेट फॉंर्म ऑफ कॉन्टे्रक्ट अपने परियोजनाओं की निविदा में उपयोग कर रही है और अंतराष्ट्रीय स्तर की पद्दति के सही तरह से उपयोग के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है। गौरतलब है की आरयूआईडीपी ने अपने तृतीय चरण में पहली बार फिडिक कॉन्टे्रक्ट पर आधारित अंतराष्ट्रीय निविदा प्रक्रिया को अपनाया है। सोनी ने कार्यशाला के उददेश्यों कि प्राप्ति हेतु पूरे मन से चर्चाओं में भाग लेने को कहा। फिडिक कनसल्टिंग इंजीनियर्स एक अंतराष्ट्रीय स्तर की फैडरेशन है जिसमें अंतराष्ट्रीय मानको के आधार पर कॉन्ट्रेक्ट तैयार किये गये है, जिससे अंतराष्ट्रीय स्तर के बिडर्स इनमें भाग लेते है इससे कार्यों की गुणवश्रा में सुधार होता है। फिडिक की स्थापना 1913 में बेलजियम, स्विटजरलैण्ड और फ्रांस ने मिलकर की थी आज इस संस्था में 100 से अधिक देश शामिल है। इस संस्था का मुख्य उद्देष्य कनसल्टींग इंजीनियर्स, बिर्डस और तकनीक का अंतराष्टीऊय स्तर पर आदान-प्रदान किया जाना है। फिडिक कॉन्टेऊक्ट की षर्तो व आधारभूत विकास कार्यो में प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आरयूआईडीपी में कार्यरत अभियन्ताओं, निर्माण कार्यो से जुडी तकनीकी व सामाजिक सलाहकार संस्थाओं के प्रतिनिधियों के लिए एक दो दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम का आयोजन एचसीएम रीपा में किया गया। इस कार्यक्रम में फिडिक द्वारा एक्रीडेटेड अमेरीका से आये अंतराष्टीऊय टेऊनर जेम्स पैरी ने फिडिक कॉन्टेऊक्ट पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया साथ ही कोन्ट्रक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं से संबधित अभियन्ताओ के सवालों के जवाब दिये। इस कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लेकर सवालों व षंकाओ के जवाब जाने जिससे की परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन में लाभ होगा। कार्यक्रम की षुरुआत में राजस्थान षहरी विकास केन्द्र के अरबन कन्सलटेन्ट पूर्व आईएएस पुरूषोश्रम बियानी ने केन्द्र की स्थापना व इसके द्वारा किये जा रहे कार्यक्रमों का विस्तृत ब्योरा दिया। आरयूआईडीपी के मुख्य अभियन्ता अखिल कुमार जैन ने प्रषिक्षण कार्यक्रम की महत्वता एवं आवष्यकता का वर्णन करते हुये परियोजना कार्यो में विषेष तकनीक व दस्तावेजीकरण, एशियाई विकास बैंक द्वारा दिये गये दिषा निर्देषानुसार, फिडिक कॉन्ट्रेक्ट की शर्तों के अनुसार सिविल कार्य करने की सलाह दी। एशियन विकास बैंक से विश्र पोषित आरयूआईडीपी के तृतीय चरण के तहत 5 षहरों में पेयजल व सीवरेज के तथा 8 षहरों में केवल सीवरेज से संबधित आधारभ्ूात विकास कार्य किये जा रहे हैं। एशियन विकास बैंक की विशेषज्ञ गीता मलहोत्रा ने कहा की इस कार्यषाला का आयोजन एडीबी के क्षमता वर्धन कार्यक्रमों की श्रंखला में किया है। एशियन विकास बैंक परियोजना अधिकारी पुष्कर श्रीवास्तव ने आरयूआईडीपी के संदर्भ में फिडिक कॉन्टेऊक्ट की षर्तो के बारे में बताते हुऐ कहा कि इस कार्यषाला का लाभ आरयूआईडीपी के अभियन्ता ले सकेंगे।