वाटर शुद्धिकरण संयंत्र भारत में सुरक्षित पेयजल संकट का कर सकता है समाधान : पराग अग्रवाल

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वाटर प्यूरीफिकेशन प्लांट्स (डब्ल्युपीपी) और वाटर एटीएम महंगे बोतलबंद पानी की तुलना में लोगों को न केवल सस्ती कीमत पर सुरक्षित पेयजल मुहैया कराते हैं, बल्कि बेरोजगारों के लिए ही नहीं बल्कि अकुशल लोगों के लिए भी रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा करते हैं। साथ ही प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम कर पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं लागों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और सेहत को सुनिश्चित करता है।

  • पानी और स्वच्छता पर एक वैश्विक एडवोकेसी समूह - वाटरएड की ओर से किए गए एक नए अध्ययन 'द वॉटर गैप - स्टेट ऑफ द वल्ड्र्स वॉटर 2018' के अनुसार दुनिया भर में 84 करोड़ 40 लाख लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। यह संख्या पूर्व की गणना से करीब 20 करोड़ अधिक है।
  • अध्ययन में यह भी कहा गया है कि भारत में 68 करोड़ से अधिक लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। भारत जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर कई चुनौतियों का भी सामना करता है।
  • जनजल ने भारत में पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा निर्धारित प्रति दिन 8-10 लीटर प्रति व्यक्ति की अनुमानित खपत के साथ आज तक भारत में 9 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया है।

जयपुर
भारत की प्रमुख जल सेवा कंपनी - जनजल वाटर एटीएम, वाटर ऑन व्हील्स और सामुदायिक पेयजल परियोजनाओं के माध्यम से आम लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराकर स्वच्छ और सुरक्षित जल पाने के तरीकों में क्रांति ला रही है। सुरक्षित पेयजल की मांग और आपूर्ति में काफी अधिक अंतर है। हमारे देश में लगभग 68 करोड़ लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी नहीं मिल रहा है। महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए कई मील पैदल चलना पड़ता है, जिसके कारण वे स्कूल नहीं जा पाते हैं और नौकरी नहीं कर पाते हैं। इससे देश की आर्थिक वृद्धि पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।राजस्थान को सुरक्षित पानी की कमी के कारण कुछ सबसे गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसका कारण मुख्य रूप से टीडीएस का अत्यधिक असामान्य स्तर और फ्लोराइड, आर्सेनिक, आदि जैसे प्रदूषण की उपस्थिति के अलावा भूजल स्तर का घटना है। 2011 में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुमान के अनुसार, 30 लाख से अधिक आबादी वाले जयपुर में 20 लाख 80 हजार की आबादी जयपुर जल वितरण प्रणाली से जुड़ी थी और उन्हें 41 मिलियन लीटर जल की जरूरत थी। लेकिन यहां लगभग 33 मिलियन लीटर जल की ही आपूर्ति की जाती थी और इस कारण यहां लगभग 8 मिलियन लीटर जल की कमी थी। अगस्त 2018 में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, में राष्ट्रीय औसत 85.5 प्रतिषत की तुलना में राजस्थान में कुल 78.1 प्रतिषत घरों में ही सुरक्षित पीने के पानी की पहुंच है। यह चिंता का विषय है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कंपनी का मानना है कि राजस्थान में न केवल नए वाटर ट्रीटमेंट संयंत्रों को स्थापित करने की आवश्यकता है, बल्कि सभी मौजूदा वाटर ट्रीटमेंट संयंत्रों के पुनरुद्धार पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है जिन्हें उच्च क्षमता के उपयोग के उद्देश्य से पिछले कई दशकों में स्थापित किया गया है। सरकारी एजेंसियों, धर्मार्थ फाउंडेषन और सीएसआर पहलों द्वारा स्थापित सभी विकेन्द्रीकृत जल अवसंरचना को एक एकीकृत प्रौद्योगिकी वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, ताकि सभी मौजूदा संयंत्रों की वास्तविक समय पर दूर से निगरानी और निरीक्षण किया जा सके। जनजल ने हमेशा जल के उपचार के लिए प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण को बनाए रखा है क्योंकि पानी से संबंधित अलग- अलग समस्या को हल करने के लिए उपचार की अलग- अलग प्रक्रिया की जरूरत होती है। यह जल संरक्षण और लंबे समय में अधिक जल उपलब्ध कराने का एकमात्र तरीका है। कंपनी ने अपना विशिष्ट आईपी विकसित किया है जिससे क्लाउड सर्वर के माध्यम से वास्तविक समय पर जल शोधन संयंत्रों पर दूर से निगरानी रखना और इनका प्रबंधन करना संभव हो गया है। आईटी प्लेटफार्म  सभी वॉटर एटीएम को क्यूआर कोड्स, आरएफआईडी कार्ड के माध्यम से और डिजिटल टच स्क्रीन यूजर इंटरफेस का उपयोग कर ई-वॉलेट के माध्यम से कैशलेस ट्रांजेक्शन क्षमता से भी लैस करता है। ऑनलाइन गुणात्मक (टीडीएस स्तर, तापमान, कठोरता, फ्लोराइड, लोहा, आर्सेनिक और पीएच) और मात्रात्मक (प्रति दिन निकलने वाले लीटर पानी) पर क्लाउड-आधारित सर्वरों का उपयोग करके निगरानी कर रियल टाइम खपत के आंकड़ों का पूरा उपयोग करने से प्रारंभिक रखरखाव संभव हो पाता है और इनका संचालन दक्षता बढ़ जाती है। क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म से जुड़े विश्व स्तर पर अद्वितीय विश्व स्तरीय आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित नियंत्रकों को कंपनी ने अपने आईपी के रूप में विकसित किया है और यह संचालन की कुंजी बनी हुई है। जनजल ने हाल ही में भारत में कई राज्यों के लिए इस समाधान की पेशकश की है और बहुत कम समय में इसका कार्यान्वयन कर इस प्रणाली की प्रभावकारिता का प्रदर्शन किया है। जनजल के संस्थापक और सीएमडी पराग अग्रवाल ने जनजल द्वारा निर्मित प्रौद्योगिकी मंच के बारे में बात करते हुए कहा, हम दृढ़ता से मानते हैं कि यह एक ऐसा एकीकृत प्रौद्योगिकी मंच है जो सभी जल बुनियादी ढांचे और शोधन प्रणालियों को जोड़ता है और वितरकों को मषीन का रिमोट मैनेजमेंट, निगरानी, नियंत्रण और यहां तक कि जांच करने और ठीक करने की भी अनुमति देता है। प्रत्येक जल शुद्धिकरण संयंत्र और वॉटर एटीएम से पानी के प्रवाह, दबाव, तापमान, टीडीएस स्तर और चालकता जैसे तकनीकी मापदंडों पर एकत्र किए गए डेटा को क्लाउड में संग्रहीत किया जाता है और 24म7 के आधार पर इनका विश्लेषण किया जाता है और निगरानी की जाती है। इससे मिली जानकारी से हमें आगे रखरखाव संबंधित मुद्दों का अंदाजा लगाने और इंजीनियर की जरूरत का पता लगाने में मदद मिलती है। जिससे इससे संबंधित सभी हितधारकों के पैसे बचाने और परिचालन में दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है। हमारे अद्वितीय प्रौद्योगिकी मंच ने हमें प्रीवेंटिव से प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस की ओर ब?ने में मदद की। हमारे सहयोगी और संबंधित हितधारक एक समर्पित पोर्टल और एक मोबाइल ऐप के माध्यम से जानकारी देखने में सक्षम हैं जो हमें पूरी तरह से प्रबंधित सर्विस कांट्रैक्ट प्रदान करने में मदद करता है। जनजल अपने मूल में तकनीकी प्रगति और क्रियान्वयन को रखते हुए, सभी के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध, सुलभ और सस्ता बनाने के 'ट्रिपल ए' नीति का पालन करता है। जनजल हाइब्रिड वाटर एटीएम सौर ऊर्जा और नियमित बिजली का उपयोग करके दक्षता को अधिकतम करते हैं, जिससे बिजली की कटौती के कारण कम रूकना प?ता है। यह अन्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सुचारू विस्तार के लिए एक संपत्ति के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह इन क्षेत्रों की बिजली सीमाओं को खत्म करता है। कंपनी के दृश्टिकोण और मिशन के बारे में बताते हुए, श्री पराग अग्रवाल ने कहा, "हमारा मिशन बहुत ही कम कीमत में हर व्यक्ति को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। सुरक्षित पेयजल एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है, जो लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और फिर शिक्षा के लिए आवश्यक है, और यह जीडीपी को 6 प्रतिषत तक ब?ा सकता है जैसा कि नीति आयोग द्वारा हाल में जारी एक लेख में कहा गया है। स्वच्छ पेयजल व्यक्तियों, स्व-सहायता समूहों, विधवाओं और बेरोजगारों को लाभकारी रोजगार प्रदान करने के अलावा समुदायों को स्वास्थ्य और सेहत प्रदान करने का एक माध्यम है। हम अपनी क्षमताओं का विस्तार करके लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौषल प्रदान करने के लिए गैर सरकारी संगठनों और धर्मार्थ संस्थापनाओं के साथ मिलकर काम करते हैं। स्वच्छ पेयजल लोगों को स्वस्थ और सेहतमंद रखने का माध्यम है। सीएसआर के लिए नया मंत्र अब 'सतत सीएसआर' के रूप में विकसित हो गया है, जिसके तहत कारपोरेट अब चाहते हैं कि सामुदायिक लाभ के लिए वे जिन परियोजनाओं का समर्थन करते हैं वे न केवल अपने स्वयं के रखरखाव और परिचालन व्यय के संदर्भ में आत्म निर्भर होने चाहिए बल्कि लोगों तक पहुंचने के व्यापक लाभों को प्राथमिक लक्ष्यों के ऊपर रखना चाहिए। ऐसा देखा गया है कि कॉर्पोरेट्स ने सुरक्षित पेयजल पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है ताकि लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के संदर्भ में इसके महत्व को इस तथ्य के साथ स्पष्ट रूप से समझा जा सके कि इससे प?ने वाले सामाजिक प्रभाव अद्वितीय हैं।" श्री अग्रवाल की राय है कि सरकार को स्मार्ट शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों सहित हर राज्य में लोगों को सुरक्षित जल उपलब्ध कराने पर अधिक से अधिक ध्यान देना चाहिए। विकेंद्रीकृत जल संरचना आज की जरूरत है और वाटर एटीएम आदर्श विकल्प है क्योंकि यह सुरक्षित पानी के अलावा, लोगों के लिए रोजगार और सामाजिक उद्यमिता के अवसर भी प्रदान करता है। सामाजिक उद्यमियों के रूप में काम करने के लिए और सम्मानजनक आजीविका कमाने के अलावा समाज की सेवा करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए वाटर एटीएम की स्थापना और संचालन के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यह जरूरी है कि पीने के पानी का मूल्य इतना हो कि उसे महत्व दिया जा सके और उसे सुसंगत और टिकाऊ तरीके से उपलब्ध कराया जा सके। जनजल को हाल ही में एआईएम2फ्लौरिश के द्वारा 2019 के फ्लौरिश पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एआईएम2फ्लौरिश अमेरिका के ओहियो के क्लीवलैंड में वेदरहेड स्कूल ऑफ मैनेजमेंट - केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में वल्र्ड बेनिफिट के एजेंट के रूप में फाउलर सेंटर फॉर बिजनेस में संयुक्त राश्ट्र समर्थित वैश्विक शिक्षण पहल है। यह सम्मान इस साल वैश्विक कंपनियों को दिए गए 17 फ्लॉरीश पुरस्कारों में से एक है, जो 17 यूएन वैष्विक लक्ष्य और उन्हें प्राप्त करने में बिजनेस की भूमिका के लिए प्रगति का जश्न मना रही है। कंपनी को सफीगिरी पुरस्कार 2018 में 'टेक आइकन' के रूप में भी मान्यता दी गई थी जिसे भारत में लाखों लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में योगदान के लिए इंडिया टुडे समूह ने 02 अक्टूबर 2018 को आयोजित किया था।

जनजल के बारे में:
जनजल रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों, ग्राम पंचायतों, कस्बों, शहरों, महानगरों और भारत के अन्य सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की एक सामाजिक पहल है। पारस्परिक बातचीत से उन स्थलों का चयन किया गया है जहां सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाना है। यह जल बहुत कम कीमत पर जनजल वाटर एटीएम के माध्यम से चैबीसों घंटे और सातों दिन समुदायों और आम लोगों के लिए उपलब्ध होगा।