महिलाओं को अपनी कलम के साथ राजनीति का दामन थामना होगा - कालिया

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जयपुर
प्रतिष्ठित कथाकार-उपन्यासकार ममता कालिया ने कहा कि हम लिखते हैं तो हमारे सामने न पुरस्कार होता है, न सम्मान होता है, और न कोई तिरस्कार का भय होता है। चमत्कार की आशा भी नहीं होती। हम अपने संतोष के लिए और कुछ सवाल जो हमें व्यथित करते हैं उन्हें टटोलने के लिए लिखते हैं। एक चिकित्सक जैसे शल्य किया करके यह पता लगाना है कि कौन सा वह रोगी अंश है जिसे निकालना है। यही काम लेखक साहित्य में करता है। कालिया यहां साहित्य समर्था, शिक्षाविद्, पृथ्वीनाथ भान, कथा एवं काव्य संग्रह, सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि लेखन हमारे समाज में निरन्तर आगे बढ़ रहा है बल्कि यह कम नहीं हो रहा है। जैसा कि कहा जा रहा है कि नये सोशियल मीडिया के कारण परम्परागत लेखन कम हो रहा है। ऐसा नही है। यह तेजी से बढ़ रहा है। ममता ने कहा कि बावजूद सारी तरक्की के हमारे देश में महिलाओं के साथ हिंसक रवैया बढ़ रहा है। उसके प्रति हमें लगातार सचेत रहना पड़ेगा। लेखन कहीं न कहीं एक हथियार भी है। इस हथियार को जंग नहीं लगने देनी है। इसको भौतिक वैभव में उठाकर रख नहीं देना है। उन्होंने कहा कि साहित्य लेख भागीदारी ही काफी नही है। अब महिलाओं को राजनीति में भी भागीदारी निभानी चाहिए। समाज कार्य और राजनीति खुरदरा क्षेत्र माने जाते हैं लेकिन हम इन्हें छोड़ देंगे तो गलत लोग इसमें आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे पास कलम है तो हमारे पास एक हथियार है। इस पर जड़ता की नींद नहीं आने देनी है। साहित्यिक भागीदारी ही काफी नहीं है। समाज में ऐसा समय आ गया है कि आज हम महिलाओं को राजनीति में भी आगे आने की जरूरत है। हमें आत्म केन्द्रितता छोडऩी होगी। हम राजनीति में भी कोई दखल पैदा करें। हमारे भीतर 50 प्रतिशत से ज्यादा की ताकत है। हम सब में एक-एक एटम बम है। हम राजनीति का चेहरा बदल सकते हैं। जैसे हम कला साहित्य, संगीत संस्कृति में धीर-धीरे स्थान बनाते हुए यहां तक पहुंचे हैं। उसी प्रकार राजनीति, कार्यपालिका, न्यायपालिका में भी स्थान बनाना होगा। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखिका चन्द्रकांता, देवर्षि कलानाथ शास्त्री, डॉ. पवन सुराणा, वेदव्यास, डॉ. नरेन्द्र शर्मा 'कुसुम' ने भी अपने विचार व्यक्त किये। प्रतिष्ठित साहित्यकार ममता कालिया, चन्द्रकांता, देवर्षि कलानाथ शास्त्री, प्रो. पवन सुराणा, वेद व्यास एवं डॉ. नरेन्द्र शर्मा 'कुसुम' ने श्रेष्ठ कविता संग्रह के लिए रमेश गौतम (बरेली) फारूक आफरीदी (जयपुर) और अर्पण कुमार (बिलासपुर) को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह के साथ शॉल ओढाकर सम्मानित किया। व्यास सम्मान से सम्मानित सहित्यकार ममता कालिया को 'स्पन्दन शिखर सम्मान', श्याम शारदा को स्पंदन महिला सम्मान, कमलेश माथुर को स्पन्दन वरिष्ठ साहित्यकार सम्मान, आभासिंह को स्पंदन विशिष्ठ साहित्यकार सम्मान, डॉ. विमला भण्डारी को स्पंदन बाल साहित्यकार सम्मान एवं अनिता श्रृंगी उपाध्याय को स्पन्दन युवा प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया।