www.legalkart.com) सभी कानूनी पेशेवरों तथा अधिवक्ताओं के लिए भारत का पहला प्रैक्टिस मैनेजमेंट एप है तथा यह क्लाउड कम्प्यूटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अधिवक्ताओं के दैनिक मामलों के प्रबंधन को अत्यंत सरल एवं उपयोगी बनाता है। इसका उद्देश्य वकालत से संबंधित सभी प्रकार के कार्य, जैसे क्लाइंट जोडऩे, केस जोडऩे, केस से संबंधित नवीनतम जानकारियां, केस का वित्तीय प्रबंधन तथा रियलटाइम केस अपटेड जैसी विशेषताएं देश में पहली बार लीगलकार्ट पर प्रदान की गई हैं। लीगलकार्ट देश का पहला प्रैक्टिस मैनेजमेंट एप है जिसमें अधिवक्ता अपनी संपूर्ण वकालत से संबंधित कार्यों का संपादन कर सकते हैं। लीगलकार्ट अधिवक्ताओं को उन्नत तकनीक के माध्यम से अपने आपको अधिक सक्षम बनाने में सहायता करता है। इस एप की मदद से वे अपनी टीम को कार्य सौंप सकते हैं, केस कलैंडर को अत्यधिक प्रबंधित कर सकते हैं तथा अपने मित्रों एवं देश के अन्य शहरों में उपस्थित अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श तथा दस्तावेजों का सुरक्षित आदान प्रदान भी कर सकते हैं। 
इस एप का मकसद कानूनी मामलों को पारदर्शी तथा सुनियोजित बनाना है। कानूनी प्रैक्टिस के हर स्तर पर तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यह एप हिंदी एवं अंग्रेजी में डिजाइन किया गया है। जियॉन मार्केट रिसर्च के अनुसार, वैश्विक लीगल टेक्नोलॉजी एवं लीगल आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस बाजार वर्ष 2026 तक बढक़र 37,85.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा और उद्योग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में सिर्फ  2 प्रतिशत (लगभग 3 अरब डॉलर) कानूनी सेवा बाजार संगठित विधि कंपनियों से जुड़ा हुआ है। इस पृष्ठभूमि में लीगलकार्ट जैसे स्टार्टअप अधिवक्ताओं को वकालत के पेशे को सक्षम बनाने में मदद कर भारत में लीगल-टेक-स्पेस में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। लीगलकार्ट के संस्थापक, एस्सेल गु्रप और ओला कैब्स के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अरविन्द सिंघाटिया का मानना है कि लीगल प्रैक्टिस में किसी टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल नहीं होने से वकालत के पेशे के विकास की राह में बड़ी बाधा पैदा हुई है। इस समस्या को दूर करने के लिए नैषनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर के पूर्व छात्र और प्रबंधन के क्षेत्र में मानद उपाधि से सम्मानित डॉ. अरविन्द सिंघाटिया ने अधिवक्ताओं के लिए भारत का पहला लीगल प्रैक्टिस मैनेजमेंट मोबाइल एप और व्यवसायियों को पूरे देश में वकील तलाषने के लिए टेक डैषबोर्ड तैयार किया। पैतृक कंपनी ब्लैक कोट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना से पहले, उन्होंने ओला कैब्स, मेट्रो कैश ऐंड कैरी, एस्सेल गु्रप, एसीएमई सोलर और फिक्की जैसे संस्थानों के साथ काम किया।
लीगलकार्ट के सीईओ एवं संस्थापक डॉ. अरविन्द सिंघाटिया ने मोबाइल एप लॉन्च पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘भारत 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है और यहां लीगल एवं रेग्युलेशनल परिदृश्य इस शानदार वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होगा। टेक्नोलॉजी के युग में, जहां फूड, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्ट, सोशल मीडिया में मोबाइल टेक्नोलॉजी की वजह से बड़ा बदलाव आ रहा है, वहीं कानूनी पेशे में टेक्नोलॉजी का अभाव बना हुआ है। लीगलकार्ट में हमारा मानना है कि वकीलों के लिए हमारी टेक्नोलॉजी से उन्हें न सिर्फ अपनी प्रोडक्टीविटी और दक्षता बढाने में मदद मिलेगी बल्कि इससे उन्हें अपने ग्राहकों, वित्त और मामलों के आसान प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। बढ़ती अर्थव्यवस्था और तेज से विकसित हो रहे स्टार्टअप तंत्र के साथ वकीलों की व्यस्तता पहले की तुलना में बढ़ेगी, इसलिए लीगलकार्ट की टेक्नोलॉजी पूरे देश में सभी अदालतों और कानूनी फोरमों में सभी अधिवक्ताओं को लीगलकार्ट एप पर अपनी प्रैक्टिस करने, इसका प्रबंधन करने में मददगार साबित होगी। राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष अनिल कुमार उपमान ने इस लॉन्च पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमें विश्वास है कि टेक्नोलॉजी भविष्य है और उन्नत टेक्नोलॉजी सॉल्युशनों की मदद से अधिवक्ताओं को अपनी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी और वह पहले की तुलना में ज्यादा संख्या में लोगों को अपनी कानूनी सेवाएं देने में सक्षम होंगे। लीगलकार्ट टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की महासचिव संगीता शर्मा ने लॉन्च कांफ्रेंस के अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, ‘ई-कोट्र्स की शुरुआत के साथ अब अदालतें टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही हैं और अब समय आ गया है कि वकील भी सक्षम बने रहने के लिए नई टेक्नोलॉजी को अपनाएं। मैं लीगलकार्ट द्वारा किए गए श्रेष्ठ प्रयासों के लिए उसे बधाई देती हूं। लीगलकार्ट एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध है। ऑप्शनल इम्पैनलमेंट फीचर के साथ इसका इस्तेमाल नि:शुल्क है, जिसमें पेशेवर वर्ष में 1499 रुपये का भुगतान कर लीगलकार्ट के पैनल लायर बन सकते हैं।

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देश के पहले प्रैक्टिस मैनेजमेंट मोबाइल एप ‘लीगलकार्ट’ का जयपुर में अनावरण

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  • क्लाउड-आधारित नि:शुल्क मोबाइल एप लीगलकार्ट का उद्देश्य अधिवक्ताओं को सभी कोर्ट, ट्रिब्यूनल एवं अन्य न्यायिक मंचों पर उनके सभी प्रकार के परिवादों को इस एप पर एक स्थान उपलब्ध करवाना है। साथ ही वित्तीय प्रबंधन, दस्तावेजों तथा टीम प्रबंधन जैसे उपयोगी फीचर्स प्रदान करना है

जयपुर
बार कौंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 20 लाख पंजीकृत अधिवक्ता हैं तथा हर साल इसमें लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि दर से इजाफा हो रहा है। आज आम जीवन में मोबाइल तकनीक बहुत गहराई तक पहुंच चुकी है तथा दैनिक जीवन के लगभग सभी आयामों को प्रभावित करती है। 95 प्रतिशत से अधिक अधिवक्ता अपने दैनिक कोर्ट के कामकाज में किसी भी प्रकार की कोई तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते हैं। न सिर्फ  वकील अपितु 4.5 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड छोटी एवं मध्यम उद्योग इकाइयों, स्टार्टअप एवं कॉरपोरेट में भी अपने कानूनी मामले बिना किसी एप या आधुनिक तकनीक के परंपरागत तरीके से ही आयोजित किए जाते हैं जिसके फलस्वरूप न सिर्फ  पारदर्शिता में कमी आती है अपितु लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ती जाती है तथा उनका प्रबंधन अत्यंत कठिन हो जाता है। लीगलकार्ट (www.legalkart.com) सभी कानूनी पेशेवरों तथा अधिवक्ताओं के लिए भारत का पहला प्रैक्टिस मैनेजमेंट एप है तथा यह क्लाउड कम्प्यूटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अधिवक्ताओं के दैनिक मामलों के प्रबंधन को अत्यंत सरल एवं उपयोगी बनाता है। इसका उद्देश्य वकालत से संबंधित सभी प्रकार के कार्य, जैसे क्लाइंट जोडऩे, केस जोडऩे, केस से संबंधित नवीनतम जानकारियां, केस का वित्तीय प्रबंधन तथा रियलटाइम केस अपटेड जैसी विशेषताएं देश में पहली बार लीगलकार्ट पर प्रदान की गई हैं। लीगलकार्ट देश का पहला प्रैक्टिस मैनेजमेंट एप है जिसमें अधिवक्ता अपनी संपूर्ण वकालत से संबंधित कार्यों का संपादन कर सकते हैं। लीगलकार्ट अधिवक्ताओं को उन्नत तकनीक के माध्यम से अपने आपको अधिक सक्षम बनाने में सहायता करता है। इस एप की मदद से वे अपनी टीम को कार्य सौंप सकते हैं, केस कलैंडर को अत्यधिक प्रबंधित कर सकते हैं तथा अपने मित्रों एवं देश के अन्य शहरों में उपस्थित अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श तथा दस्तावेजों का सुरक्षित आदान प्रदान भी कर सकते हैं। 
इस एप का मकसद कानूनी मामलों को पारदर्शी तथा सुनियोजित बनाना है। कानूनी प्रैक्टिस के हर स्तर पर तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यह एप हिंदी एवं अंग्रेजी में डिजाइन किया गया है। जियॉन मार्केट रिसर्च के अनुसार, वैश्विक लीगल टेक्नोलॉजी एवं लीगल आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस बाजार वर्ष 2026 तक बढक़र 37,85.8 करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा और उद्योग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में सिर्फ  2 प्रतिशत (लगभग 3 अरब डॉलर) कानूनी सेवा बाजार संगठित विधि कंपनियों से जुड़ा हुआ है। इस पृष्ठभूमि में लीगलकार्ट जैसे स्टार्टअप अधिवक्ताओं को वकालत के पेशे को सक्षम बनाने में मदद कर भारत में लीगल-टेक-स्पेस में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। लीगलकार्ट के संस्थापक, एस्सेल गु्रप और ओला कैब्स के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अरविन्द सिंघाटिया का मानना है कि लीगल प्रैक्टिस में किसी टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल नहीं होने से वकालत के पेशे के विकास की राह में बड़ी बाधा पैदा हुई है। इस समस्या को दूर करने के लिए नैषनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर के पूर्व छात्र और प्रबंधन के क्षेत्र में मानद उपाधि से सम्मानित डॉ. अरविन्द सिंघाटिया ने अधिवक्ताओं के लिए भारत का पहला लीगल प्रैक्टिस मैनेजमेंट मोबाइल एप और व्यवसायियों को पूरे देश में वकील तलाषने के लिए टेक डैषबोर्ड तैयार किया। पैतृक कंपनी ब्लैक कोट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना से पहले, उन्होंने ओला कैब्स, मेट्रो कैश ऐंड कैरी, एस्सेल गु्रप, एसीएमई सोलर और फिक्की जैसे संस्थानों के साथ काम किया।
लीगलकार्ट के सीईओ एवं संस्थापक डॉ. अरविन्द सिंघाटिया ने मोबाइल एप लॉन्च पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘भारत 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है और यहां लीगल एवं रेग्युलेशनल परिदृश्य इस शानदार वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होगा। टेक्नोलॉजी के युग में, जहां फूड, हेल्थकेयर, ट्रांसपोर्ट, सोशल मीडिया में मोबाइल टेक्नोलॉजी की वजह से बड़ा बदलाव आ रहा है, वहीं कानूनी पेशे में टेक्नोलॉजी का अभाव बना हुआ है। लीगलकार्ट में हमारा मानना है कि वकीलों के लिए हमारी टेक्नोलॉजी से उन्हें न सिर्फ अपनी प्रोडक्टीविटी और दक्षता बढाने में मदद मिलेगी बल्कि इससे उन्हें अपने ग्राहकों, वित्त और मामलों के आसान प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। बढ़ती अर्थव्यवस्था और तेज से विकसित हो रहे स्टार्टअप तंत्र के साथ वकीलों की व्यस्तता पहले की तुलना में बढ़ेगी, इसलिए लीगलकार्ट की टेक्नोलॉजी पूरे देश में सभी अदालतों और कानूनी फोरमों में सभी अधिवक्ताओं को लीगलकार्ट एप पर अपनी प्रैक्टिस करने, इसका प्रबंधन करने में मददगार साबित होगी। राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष अनिल कुमार उपमान ने इस लॉन्च पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमें विश्वास है कि टेक्नोलॉजी भविष्य है और उन्नत टेक्नोलॉजी सॉल्युशनों की मदद से अधिवक्ताओं को अपनी दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी और वह पहले की तुलना में ज्यादा संख्या में लोगों को अपनी कानूनी सेवाएं देने में सक्षम होंगे। लीगलकार्ट टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।
राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की महासचिव संगीता शर्मा ने लॉन्च कांफ्रेंस के अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा, ‘ई-कोट्र्स की शुरुआत के साथ अब अदालतें टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही हैं और अब समय आ गया है कि वकील भी सक्षम बने रहने के लिए नई टेक्नोलॉजी को अपनाएं। मैं लीगलकार्ट द्वारा किए गए श्रेष्ठ प्रयासों के लिए उसे बधाई देती हूं। लीगलकार्ट एंड्रॉयड और आईओएस प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध है। ऑप्शनल इम्पैनलमेंट फीचर के साथ इसका इस्तेमाल नि:शुल्क है, जिसमें पेशेवर वर्ष में 1499 रुपये का भुगतान कर लीगलकार्ट के पैनल लायर बन सकते हैं।

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