होलोचेन तकनीक नहीं पहुंचने देगी गूगल-फेसबुक तक यूजर का डाटा

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होलोचेन तकनीक गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को बड़ी चुनौती देने जा रही है। इस नई तकनीक से यूजर का डाटा उसी के पास सुरक्षित रह सकेगा और कंपनियों तक नहीं पहुंचेगा। अभी स्मार्टफोन में किए जाने वाले किसी भी काम का डाटा सीधे गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों के पास पहुंच जाता है। लेकिन होलोचेन ऐसा नहीं होने देगी। दरअसल 1990 के दशक में ब्रिटेन के टिम बर्नर्स ली के वल्र्ड वाइड वेब को टक्कर देने के लिए नई तकनीक बाजार में आ रही है। इसे होलोचेन का नाम दिया गया है। इसके डिजाइनरों का दावा है कि यह तकनीक डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू के बाद से बनाई गई सबसे अहम तकनीक है जो यूजर को ऑनलाइन गोपनीयता बनाए रखने में मदद करती है। इसके संस्थापक और अमेरिका के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ऑर्थर ब्रॉक व एरिक हैरिस ब्राउन ने कहा कि यह तकनीक हमारी कल्पना से भी ज्यादा निर्णायक साबित होगी। होलोचेन तकनीक से न सिर्फ सर्च इंजन, ईमेल, मैसेंजर या दूसरे तरह के एप बनाए जा सकते हैं बल्कि इस तकनीक से बने एप से कॉर्पोरेट सर्वर से जुडऩे की जरूरत नहीं होगी। इसका सारा डाटा यूजर के कंप्यूटर में ही स्टोर होता है। इस तरह से कॉर्पोरेट सर्वर चलाने वाली बड़ी कंपनियों के पास यूजर का डाटा पहुंचता ही नहीं है। होलोचेन टीम पर्सनल डाटा को कारपोरेट सर्वर तक न पहुंचाकर यूजर्स को उसकी जानकारी का नियंत्रण देना चाह रही है। ब्रोक कहते हैं, 'होलोचेन में यूजर्स एजेंट है और इसमें यूजर्स ही फैसला लेते हैं कि डाटा कहां जाएगा और किसे दिखेगा।Ó
 

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